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आईटीआई कोर्स क्या है
आईटीआई (Industrial Training Institute) एक तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान है जहाँ छात्रों को विभिन्न औद्योगिक कार्यों से संबंधित व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य छात्रों को कुशल बनाकर उन्हें रोजगार या स्वरोजगार के योग्य बनाना है।
आईटीआई कोर्स भारत सरकार द्वारा युवाओं को व्यावसायिक कौशल (Vocational Skills) सिखाने के लिए शुरू किया गया एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो National Council for Vocational Training (NCVT) या State Council for Vocational Training (SCVT) द्वारा मान्यता प्राप्त होता है।
आईटीआई कोर्स की विशेषताएं
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स्किल-बेस्ड शिक्षा प्रणाली:
आईटीआई में मुख्यतः हाथों से काम करने वाली तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाती है। जैसे – मशीन चलाना, वायरिंग करना, वेल्डिंग करना, कंप्यूटर चलाना आदि। -
कम समय में तकनीकी दक्षता:
अधिकांश ट्रेड 6 महीने से 2 वर्ष तक के होते हैं, जिनमें छात्र व्यावसायिक रूप से दक्ष बन जाते हैं। -
जॉब ओरिएंटेड कोर्स:
आईटीआई कोर्स इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि छात्र को कोर्स के बाद रोजगार के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता न हो।
आईटीआई कोर्स क्यों करें?
- कम समय में नौकरी के लिए तैयार होना
- सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार की संभावना
- कम फीस में उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण
- स्वरोजगार के लिए स्किल डेवलपमेंट
- विदेशों में भी काम करने का अवसर
आईटीआई कोर्स कौन कर सकता है?
- जिनकी शैक्षणिक योग्यता 8वीं, 10वीं या 12वीं हो (ट्रेड के अनुसार)
- जिनकी आयु 14 वर्ष या उससे अधिक हो
- जो छात्र तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं
आईटीआई कोर्स कितने प्रकार के होते हैं?
आईटीआई कोर्स को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:
1. तकनीकी (Technical) ट्रेड्स:
जिनमें मशीनों, औजारों और उपकरणों के साथ कार्य करना सिखाया जाता है।
ट्रेड
कार्यक्षेत्र
Electrician
इलेक्ट्रिकल वर्क
Fitter
मशीन फिटिंग
Welder
धातु जोड़ने का कार्य
Mechanic Diesel
डीजल इंजन की मरम्मत
Turner
मेटल टर्निंग कार्य
Draughtsman
तकनीकी ड्राइंग
2. गैर-तकनीकी (Non-Technical) ट्रेड्स:
जिनमें व्यावसायिक और सेवा आधारित कौशल सिखाए जाते हैं।
ट्रेड
कार्यक्षेत्र
Stenography
टाइपिंग और शॉर्टहैंड
Sewing Technology
सिलाई
Fashion Design
कपड़ा डिज़ाइन
Basic Cosmetology
सौंदर्य कला
Health Sanitary Inspector
स्वच्छता एवं स्वास्थ्य निरीक्षण
आईटीआई कोर्स की अवधि
ट्रेड के अनुसार कोर्स की अवधि अलग-अलग हो सकती है:
- 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक
- साप्ताहिक कक्षाएं, प्रैक्टिकल और वर्कशॉप शामिल होते हैं
आईटीआई कोर्स की फीस
संस्थान
अनुमानित फीस
सरकारी आईटीआई
₹1000 – ₹3000 प्रति वर्ष
प्राइवेट आईटीआई
₹10,000 – ₹40,000 प्रति वर्ष
विशेष श्रेणियों के छात्रों को छात्रवृत्ति या फीस में छूट मिल सकती है।
आईटीआई कोर्स के बाद क्या करें?
आईटीआई कोर्स पूरा करने के बाद छात्र:
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सरकारी नौकरियों में आवेदन कर सकते हैं
जैसे – रेलवे, सेना, एयरफोर्स, डाक विभाग, जल निगम, बिजली विभाग आदि। -
निजी क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं
जैसे – ऑटोमोबाइल, निर्माण, फैब्रिकेशन, आईटी, इलेक्ट्रिकल कंपनियां आदि। -
अप्रेंटिसशिप (Apprenticeship)
छात्र किसी इंडस्ट्री में प्रशिक्षु बनकर अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। -
स्वरोजगार कर सकते हैं
जैसे – वेल्डिंग की दुकान, कंप्यूटर सेंटर, इलेक्ट्रिशियन सर्विस आदि। -
डिप्लोमा इंजीनियरिंग में प्रवेश
आईटीआई के बाद छात्र सीधे डिप्लोमा इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष (LEET) में प्रवेश ले सकते हैं।
निष्कर्ष
आईटीआई कोर्स युवाओं को व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करने वाला एक बेहतरीन विकल्प है। यह उन छात्रों के लिए आदर्श है जो कम समय में एक स्थिर और सुरक्षित करियर की शुरुआत करना चाहते हैं। अगर आप भी तकनीकी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, तो आईटीआई कोर्स आपके लिए उत्तम अवसर है।
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आईटीआई (Industrial Training Institute) एक ऐसा तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान है जो छात्रों को उद्योगों में काम करने के लिए आवश्यक प्रैक्टिकल और व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करता है। यही कारण है कि आईटीआई को एक इंडस्ट्रियल कोर्स कहा जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं को कम समय में दक्ष बनाकर रोजगार के लिए तैयार करना है।
इस लेख में हम जानेंगे कि आईटीआई को इंडस्ट्रियल कोर्स क्यों कहा जाता है, इसके लाभ क्या हैं और यह किन छात्रों के लिए उपयोगी है।
आईटीआई एक इंडस्ट्रियल कोर्स क्यों है?
इंडस्ट्रियल कोर्स का अर्थ होता है ऐसा पाठ्यक्रम जो सीधे उद्योगों, फैक्ट्रियों, तकनीकी कार्यों और निर्माण क्षेत्र की आवश्यकताओं से जुड़ा हो। आईटीआई इसी प्रकार का कोर्स है जिसमें विद्यार्थियों को व्यावहारिक कार्यों में दक्ष बनाया जाता है।
निम्नलिखित कारणों से आईटीआई को इंडस्ट्रियल कोर्स माना जाता है:
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उद्योगों की मांग पर आधारित पाठ्यक्रम
आईटीआई के सभी ट्रेड इस प्रकार बनाए गए हैं कि छात्र को उद्योगों में आवश्यक तकनीकी कार्यों में दक्षता प्राप्त हो। -
व्यावसायिक प्रशिक्षण पर जोर
आईटीआई में पढ़ाई से अधिक हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें छात्रों को मशीनों, उपकरणों और टूल्स का वास्तविक उपयोग सिखाया जाता है। -
वर्कशॉप आधारित प्रशिक्षण
आईटीआई संस्थानों में वर्कशॉप होती हैं जहाँ छात्रों को वास्तविक इंडस्ट्रियल वातावरण में प्रशिक्षित किया जाता है। -
प्रत्यक्ष रोजगार की तैयारी
आईटीआई कोर्स के बाद छात्र सीधे सरकारी या निजी उद्योगों में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त डिग्री नहीं करनी होती। -
राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय तकनीकी परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त
एनसीवीटी (NCVT) और एससीवीटी (SCVT) जैसे तकनीकी निकाय इस कोर्स की गुणवत्ता और औद्योगिक प्रासंगिकता सुनिश्चित करते हैं।
आईटीआई के प्रमुख इंडस्ट्रियल ट्रेड्स
आईटीआई में उपलब्ध कुछ प्रमुख इंडस्ट्रियल ट्रेड निम्नलिखित हैं:
ट्रेड का नाम
उपयोग क्षेत्र
Electrician
निर्माण, बिजली विभाग, रखरखाव
Fitter
मशीन टूल इंडस्ट्री
Welder
मेटल वर्क, ऑटोमोबाइल, निर्माण
Diesel Mechanic
वाहन मरम्मत, कृषि उपकरण
Machinist
मशीनिंग और निर्माण इकाइयाँ
Turner
स्पेयर पार्ट्स निर्माण
Draughtsman
मैकेनिकल और सिविल डिज़ाइनिंग
COPA (Computer Operator and Programming Assistant)
आईटी सेक्टर और कार्यालय कार्य
आईटीआई कोर्स करने के लाभ
- कम समय में औद्योगिक प्रशिक्षण प्राप्त करना
- सरकारी और निजी नौकरियों में आसानी से चयन
- कम खर्च में गुणवत्ता वाली शिक्षा
- स्वरोजगार की संभावना
- विदेशों में रोजगार के अवसर
- अप्रेंटिसशिप और अनुभव के अवसर
कौन कर सकता है आईटीआई?
- जिन्होंने कक्षा 8वीं, 10वीं या 12वीं पास कर ली हो
- जिनकी आयु 14 से 40 वर्ष के बीच हो
- जो तकनीकी और प्रैक्टिकल काम में रुचि रखते हों
निष्कर्ष
आईटीआई एक पूर्ण रूप से इंडस्ट्रियल कोर्स है जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्योगों के अनुकूल बनाना है। यह कोर्स छात्रों को न केवल तकनीकी रूप से दक्ष बनाता है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ाता है।
यदि आप जल्दी नौकरी करना चाहते हैं या तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो आईटीआई आपके लिए एक आदर्श विकल्प है।
Tags: iti कोर्सआईटीआई कोर्स फीसआईटीआई कोर्स लिस्टआईटीआई कोर्स लिस्ट 2019आईटीआई कोर्स लिस्ट 2018आईटीआई कोर्स लिस्ट इन हिंदी12 वीं के बाद आईटीआई कोर्सआईटीआई ट्रेड नामआईटीआई करने के फायदे
आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) उन युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है जो कम समय में व्यावसायिक कौशल प्राप्त कर रोजगार प्राप्त करना चाहते हैं। आईटीआई कोर्स विशेष रूप से उन छात्रों के लिए फायदेमंद होते हैं जो तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। आईटीआई प्रशिक्षण व्यावहारिक ज्ञान, अनुशासन और रोजगार के लिए आवश्यक तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देता है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आईटीआई करने के क्या-क्या फायदे हैं, कौन-कौन से क्षेत्र उपलब्ध हैं, और कैसे एक छात्र आईटीआई के माध्यम से अपने भविष्य को बेहतर बना सकता है।
1. कम समय में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करनाआईटीआई कोर्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कम समय में पूरा हो जाता है। अधिकांश आईटीआई ट्रेड 6 महीने से 2 साल की अवधि के होते हैं। इस दौरान छात्रों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों प्रकार की ट्रेनिंग दी जाती है। इस प्रकार, छात्र जल्दी से कौशल सीखकर नौकरी के लिए तैयार हो जाते हैं।
2. रोजगार के अपार अवसरआईटीआई करने के बाद सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों में रोजगार के अनेक अवसर होते हैं। निम्नलिखित क्षेत्रों में आईटीआई पास युवाओं की मांग लगातार बनी रहती है:
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रेलवे
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सेना (आर्मी, नेवी, एयरफोर्स)
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बीएचईएल, एनटीपीसी, भेल, ओएनजीसी जैसी सरकारी कंपनियाँ
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विभिन्न राज्य सरकारों के विभाग – सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, तकनीकी शिक्षा आदि
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प्राइवेट कंपनियाँ जैसे मारुति, टाटा मोटर्स, टीवीएस, हीरो, लार्सन एंड टूब्रो आदि
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इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, फिटर, डीजल मैकेनिक, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि के रूप में इंडस्ट्री में सीधा रोजगार
आईटीआई करने के बाद युवा स्वरोजगार (Self Employment) के क्षेत्र में भी कदम बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए:
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इलेक्ट्रिशियन बनकर अपनी दुकान खोल सकते हैं
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वेल्डिंग या मैकेनिकल वर्कशॉप शुरू कर सकते हैं
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कंप्यूटर की जानकारी के साथ साइबर कैफे या कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया जा सकता है
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फैशन डिजाइनिंग, ड्रेस मेकिंग, प्लंबिंग जैसे ट्रेड्स में भी स्वरोजगार संभव है
इससे वे न केवल खुद को आत्मनिर्भर बना सकते हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं।
4. कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षाआईटीआई कोर्स बहुत ही कम खर्च में उपलब्ध हैं। सरकारी संस्थानों में फीस नाममात्र होती है, जबकि प्राइवेट आईटीआई में भी कोर्स फीस अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की तुलना में बहुत कम है। इसके अलावा कई योजनाओं के अंतर्गत छात्रवृत्ति (scholarship) भी मिलती है।
5. नौकरी के साथ-साथ आगे पढ़ाई का विकल्पआईटीआई के बाद छात्र चाहे तो अपनी पढ़ाई भी जारी रख सकते हैं। उदाहरण के लिए:
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आईटीआई के बाद 10+2 (ओपन बोर्ड) किया जा सकता है
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एनटीसी (National Trade Certificate) के बाद डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग (LEET के जरिए) में सीधे प्रवेश
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एनसीवीटी प्रमाणपत्र के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेना संभव है
इस प्रकार, आईटीआई के बाद आगे की पढ़ाई और प्रोफेशनल ग्रोथ के द्वार भी खुले रहते हैं।
6. अपारेंटिसशिप का अवसरआईटीआई पास करने के बाद छात्र National Apprenticeship Promotion Scheme (NAPS) के तहत विभिन्न प्रतिष्ठानों में अप्रेंटिसशिप कर सकते हैं। इसके अंतर्गत:
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प्रतिष्ठानों में प्रशिक्षण के साथ स्टाइपेंड (वेतन) भी मिलता है
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सरकारी कंपनियों जैसे रेलवे, भेल, डीजल लोको शेड आदि में अप्रेंटिसशिप के अवसर
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अप्रेंटिसशिप के बाद स्थायी नौकरी पाने की संभावना
आईटीआई पास युवाओं की विदेशों में भी काफी मांग है, विशेषकर खाड़ी देशों (UAE, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन) में:
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प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर, मशीनिस्ट, HVAC टेक्नीशियन आदि की वैकेंसी
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ITI सर्टिफिकेट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलती है
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बेहतर वेतन और जीवनशैली के साथ काम करने का अवसर
अब आईटीआई केवल लड़कों तक सीमित नहीं है। लड़कियाँ भी कई ट्रेड्स में प्रशिक्षण ले रही हैं जैसे:
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फैशन डिजाइनिंग
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कंप्यूटर ऑपरेटर
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स्टेनोग्राफी
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ड्राफ्ट्समैन (सिविल)
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लैब असिस्टेंट
सरकार लड़कियों को प्रेरित करने के लिए विशेष योजनाएं और छात्रवृत्तियां भी प्रदान करती है।
9. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी योग्यताआईटीआई कोर्स पूरा करने के बाद छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी पात्र होते हैं:
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ग्रुप-C एवं ग्रुप-D सरकारी नौकरियों
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रेलवे टेक्निकल पोस्ट्स (ALP, Technician, RRB NTPC)
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SSC, पुलिस कांस्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड, एनटीपीसी, डाक विभाग आदि की वैकेंसी
इस प्रकार, आईटीआई केवल स्किल डेवलपमेंट नहीं बल्कि सरकारी नौकरी का रास्ता भी है।
10. आत्मविश्वास और व्यावसायिकता का विकासआईटीआई प्रशिक्षण में अनुशासन, समय पालन, हाथों से काम करने की दक्षता और टीम वर्क जैसे गुणों का विकास होता है। यह छात्र के व्यक्तित्व को मजबूत बनाता है और उसे एक योग्य, व्यावसायिक और आत्मनिर्भर नागरिक बनने में मदद करता है।
निष्कर्षआईटीआई करना केवल एक कोर्स पूरा करना नहीं है, बल्कि यह एक व्यावसायिक जीवन की नींव है। यह कोर्स न केवल रोजगार की गारंटी देता है बल्कि व्यक्ति को जीवन भर के लिए आत्मनिर्भर बना देता है।
यदि आप दसवीं या बारहवीं के बाद करियर को लेकर दुविधा में हैं, तो आईटीआई एक व्यावहारिक और लाभकारी विकल्प हो सकता है। इसके जरिए आप कम समय में हुनरमंद बन सकते हैं और एक उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
आईटीआई करने के बाद जॉब
आईटीआई (ITI - Industrial Training Institute) एक ऐसा व्यावसायिक कोर्स है जो विद्यार्थियों को टेक्निकल और इंडस्ट्रियल स्किल्स में प्रशिक्षित करता है। अगर आप दसवीं या बारहवीं के बाद जल्दी नौकरी करना चाहते हैं, तो आईटीआई एक बेहतरीन विकल्प है। आईटीआई करने के बाद आप न केवल प्राइवेट कंपनियों में अच्छी जॉब पा सकते हैं, बल्कि विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में भी सुनहरे अवसर उपलब्ध हैं।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आईटीआई करने के बाद आप किन-किन सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौकरी कर सकते हैं और आपके लिए कौन-कौन सी कंपनियां और विभाग सबसे अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
प्राइवेट सेक्टर में ITI के बाद जॉब के अवसरआईटीआई कोर्स पूरा करने के बाद आपके पास कई बड़ी और प्रतिष्ठित प्राइवेट कंपनियों में जॉब करने का मौका होता है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेलीकम्यूनिकेशन, मोबाइल कंपनियां, सिक्योरिटी सर्विस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेन्टेनेन्स क्षेत्र शामिल हैं।
टॉप प्राइवेट कंपनियां जहाँ आप ITI के बाद नौकरी कर सकते हैं:-
Maruti Suzuki
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TATA Motors
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Hero MotoCorp
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Hyundai Motors
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Oppo / Vivo (मोबाइल कंपनियाँ)
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SIS (Security and Intelligence Services)
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L&T (Larsen & Toubro)
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Mahindra & Mahindra
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Kirloskar Group
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TVS Motors
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Bajaj Auto
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Ashok Leyland
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मशीन ऑपरेटर
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वेल्डर
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इलेक्ट्रिशियन
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फिटर
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मोटर मेकैनिक
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CNC ऑपरेटर
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वायरमैन
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मोबाइल रिपेयर टेक्नीशियन
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सिक्योरिटी सुपरवाइजर
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टेलीकॉम टेक्नीशियन
इन सभी कंपनियों में आप अपने ITI ट्रेड के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। शुरुआती सैलरी ₹12,000 से ₹20,000 प्रति माह हो सकती है और अनुभव के साथ-साथ प्रमोशन व सैलरी ग्रोथ भी होता है।
सरकारी नौकरी के अवसर (ITI के बाद Sarkari Job)आईटीआई करने के बाद भारत सरकार के विभिन्न विभागों में नौकरी पाने के लिए आप योग्य बन जाते हैं। इन विभागों में नियमित रूप से रिक्तियां निकलती हैं और आईटीआई पास कैंडिडेट्स के लिए अवसर उपलब्ध रहते हैं।
1. इंडियन रेलवे (Indian Railways)रेलवे ITI पास छात्रों के लिए सबसे बड़ा सरकारी नियोक्ता है। यहाँ कई तरह के टेक्निकल पद होते हैं जिनके लिए ITI जरूरी है।
रेलवे में ITI के बाद मिलने वाले पद:-
ट्रैक मैन
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सिग्नल मेंटेनर
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गेटमैन
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लोको शेड टेक्नीशियन
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हेल्पर (Mechanical, Electrical)
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लाइनमैन
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टेक्निकल असिस्टेंट
योग्यता: 10वीं पास + संबंधित ट्रेड में ITI
चयन प्रक्रिया: CBT (Computer Based Test), PET और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
रेलवे में सैलरी: ₹20,000 से ₹35,000 + अन्य सरकारी भत्ते
यदि आप देश सेवा का सपना रखते हैं तो ITI करने के बाद आर्मी में जॉइन करना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
आर्मी में ITI के बाद मिलने वाले पद:-
सोल्जर जनरल ड्यूटी
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सोल्जर टेक्निकल
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सोल्जर नर्सिंग असिस्टेंट
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सोल्जर क्लर्क
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ट्रेड्समैन
चयन प्रक्रिया: फिजिकल फिटनेस टेस्ट, मेडिकल टेस्ट और रिटन एग्जाम
योग्यता: 10वीं पास + ITI प्रमाणपत्र (कुछ पदों के लिए जरूरी)
भारत सरकार के BSNL, MTNL जैसे विभागों में वायरमैन, लाइनमैन, टेलीकॉम ऑपरेटर, इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नीशियन आदि पदों पर ITI पास उम्मीदवारों की आवश्यकता होती है।
4. CRPF, BSF, ITBP, CISF (Paramilitary Forces)आईटीआई पास उम्मीदवार इन सुरक्षा बलों में टेक्निकल पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं जैसे:
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इलेक्ट्रिशियन
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मैकेनिक
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टेक्निकल असिस्टेंट
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वायरलेस ऑपरेटर
यह रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाला संस्थान है जहाँ ITI पास उम्मीदवारों को विभिन्न ट्रेडों में अप्रेंटिस और टेक्नीशियन के रूप में नियुक्त किया जाता है।
6. NTPC, BHEL, SAIL, ONGC जैसे PSU सेक्टरPublic Sector Undertakings (PSUs) जैसे सरकारी संस्थानों में ITI पास छात्रों के लिए नियमित अप्रेंटिसशिप और परमानेंट नौकरी की भर्तियाँ निकलती हैं।
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NTPC - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन
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ONGC - ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन
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BHEL - भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
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SAIL - स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड
यह कंपनियाँ समय-समय पर ITI ट्रेड वाइज नौकरियाँ निकालती हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)ITI करने के बाद आपके पास जॉब पाने के लिए ढेर सारे विकल्प होते हैं। चाहे आप सरकारी नौकरी का सपना देखते हों या प्राइवेट सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहते हों, ITI आपके लिए एक मजबूत नींव तैयार करता है।
यदि आप समय पर अपडेट रहना चाहते हैं कि कौन-कौन सी कंपनियां ITI पास उम्मीदवारों को जॉब ऑफर कर रही हैं, तो आप https://jobs.iti.directory वेबसाइट पर जाकर नियमित रूप से नई वैकेंसी देख सकते हैं।
आईटीआई में कुल कितने कोर्स होते है?
भारत में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित आईटीआई (Industrial Training Institute) आज लाखों युवाओं के लिए एक सशक्त करियर प्लेटफॉर्म बन चुका है। आईटीआई का मुख्य उद्देश्य छात्रों को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना है ताकि वे किसी विशेष क्षेत्र में दक्षता प्राप्त कर सकें और रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
लेकिन एक आम सवाल जो छात्रों और अभिभावकों के मन में रहता है वह यह है – आईटीआई में कुल कितने कोर्स होते हैं? और सबसे अच्छा कोर्स कौन सा है?
इस लेख में हम इन दोनों सवालों का विस्तृत उत्तर देंगे, साथ ही यह भी बताएँगे कि किस तरह के कोर्स किसके लिए उपयुक्त हो सकते हैं।
आईटीआई में कुल कितने कोर्स होते हैं?आईटीआई में कुल 130 से भी अधिक प्रकार के कोर्स उपलब्ध हैं, जो विभिन्न तकनीकी और नॉन-टेक्निकल क्षेत्रों में विभाजित हैं। ये कोर्स राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (NCVT) और राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (SCVT) द्वारा मान्यता प्राप्त होते हैं।
आईटीआई कोर्स को मुख्यतः दो भागों में वर्गीकृत किया गया है:
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तकनीकी (Technical) कोर्स
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गैर-तकनीकी (Non-Technical) कोर्स
ये कोर्स 6 महीने से लेकर 2 साल की अवधि वाले होते हैं। हर कोर्स की अवधि उस कोर्स की प्रकृति और जटिलता पर निर्भर करती है।
आईटीआई कोर्स किस वर्ग के लिए?-
8वीं पास विद्यार्थी: कुछ कोर्स ऐसे हैं जो 8वीं कक्षा पास करने के बाद भी किए जा सकते हैं, जैसे वेल्डर, कारपेंटर, वायरमैन आदि।
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10वीं पास विद्यार्थी: अधिकतर आईटीआई कोर्स 10वीं के बाद शुरू होते हैं, जैसे इलेक्ट्रीशियन, फिटर, कोपा आदि।
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12वीं पास विद्यार्थी: यदि आपने 12वीं कक्षा पास की है, तो आपके पास कुछ विशेष कोर्स जैसे स्टेनोग्राफी, ड्राफ्ट्समैन सिविल आदि के विकल्प भी खुलते हैं।
यहाँ उन कोर्सों की सूची दी जा रही है जो छात्रों के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय और रोजगार दिलाने में सहायक माने जाते हैं:
1. इलेक्ट्रीशियन (Electrician)-
अवधि: 2 वर्ष
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योग्यता: 10वीं पास
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मुख्य कार्य: घरेलू और औद्योगिक बिजली सिस्टम की इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस।
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रोजगार: बिजली विभाग, रेलवे, निर्माण कंपनियाँ, प्राइवेट फर्म
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अवधि: 1 वर्ष
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योग्यता: 10वीं पास
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मुख्य कार्य: कंप्यूटर ऑपरेशन, डाटा एंट्री, बेसिक प्रोग्रामिंग
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रोजगार: आईटी कंपनियाँ, ऑफिसेज़, स्कूल, बैंक
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अवधि: 2 वर्ष
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योग्यता: 10वीं पास
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मुख्य कार्य: मशीनों के पार्ट्स की फिटिंग और असेंबली
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रोजगार: इंडस्ट्रियल प्लांट, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
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अवधि: 1 वर्ष
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योग्यता: 8वीं पास
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मुख्य कार्य: धातुओं को जोड़ने का कार्य
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रोजगार: निर्माण उद्योग, ऑटोमोबाइल कंपनियाँ, वर्कशॉप
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अवधि: 1 या 2 वर्ष
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योग्यता: 10वीं पास
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मुख्य कार्य: डीजल इंजन के रख-रखाव और मरम्मत
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रोजगार: ट्रांसपोर्ट कंपनी, सरकारी वाहन विभाग, सर्विस सेंटर्स
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अवधि: 1 वर्ष
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योग्यता: 12वीं पास
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मुख्य कार्य: टाइपिंग और शॉर्टहैंड स्किल
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रोजगार: कोर्ट, सरकारी कार्यालय, सचिवालय
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अवधि: 2 वर्ष
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योग्यता: 8वीं/10वीं पास
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मुख्य कार्य: वायरिंग इंस्टॉलेशन और रिपेयरिंग
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रोजगार: घरेलू सेवा, इलेक्ट्रिकल कंपनियाँ
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अवधि: 2 वर्ष
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योग्यता: 10वीं पास
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मुख्य कार्य: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत
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रोजगार: मोबाइल कंपनियाँ, टीवी मरम्मत, इंडस्ट्रीज़
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अवधि: 2 वर्ष
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योग्यता: 10वीं पास
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मुख्य कार्य: प्लान और डिज़ाइन तैयार करना
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रोजगार: निर्माण कंपनियाँ, आर्किटेक्चर फर्म
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अवधि: 2 वर्ष
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योग्यता: 10वीं पास
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मुख्य कार्य: दोपहिया और चारपहिया वाहनों की मरम्मत
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रोजगार: ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, वर्कशॉप, डीलरशिप
इसके अलावा आईटीआई में कई और कोर्स भी हैं जो आपकी रुचि और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार चुने जा सकते हैं:
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टर्नर
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टूल एंड डाई मेकर
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प्लंबर
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कारपेंटर
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फ्रूट एंड वेजिटेबल प्रोसेसर
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हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट
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फैशन डिजाइनिंग
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हेल्थ सैनिटरी इंस्पेक्टर
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फोटोग्राफर
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लेबोरेटरी असिस्टेंट
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि “आईटीआई में सबसे अच्छा कोर्स कौन सा है?” इसका उत्तर व्यक्ति की रुचि, क्षेत्रीय माँग, और करियर लक्ष्य पर निर्भर करता है।
फिर भी करियर की दृष्टि से सबसे अधिक डिमांड में रहने वाले कोर्स हैं:
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इलेक्ट्रीशियन
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कोपा (कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट)
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फिटर
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वेल्डर
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मोटर व्हीकल मैकेनिक
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इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक
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ड्राफ्ट्समैन सिविल/मैकेनिकल
आईटीआई में कोर्स की संख्या 100 से भी अधिक है, और हर कोर्स अपने आप में विशेष है। आईटीआई का उद्देश्य छात्रों को किसी विशेष ट्रेड में दक्ष बनाना है ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
अगर आप 10वीं या 12वीं के बाद कोई व्यावसायिक कोर्स करना चाहते हैं, तो आईटीआई आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह कोर्स न केवल कम समय में पूरी शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि जल्द ही रोजगार के अवसर भी प्रदान करता है।
इसलिए अपनी रुचि, योग्यता और भविष्य के लक्ष्यों के अनुसार सही कोर्स का चुनाव करें और अपने करियर को ऊँचाई दें।
इंटरव्यू में सबसे पहले देखी जाती हैं ये क्वालिटीज, जानिए कैसे करें इसकी तैयारी
आज के प्रतिस्पर्धी युग में किसी भी अच्छी नौकरी को पाने के लिए सिर्फ डिग्री या कौशल ही पर्याप्त नहीं होते। नौकरी की दौड़ में सबसे अहम पड़ाव होता है – इंटरव्यू। यही वह प्रक्रिया है जिसमें आपके व्यक्तित्व, संवाद कौशल, व्यवहार और पेशेवर समझ का आकलन किया जाता है।
बहुत से उम्मीदवार इंटरव्यू की तैयारी केवल सामान्य सवाल-जवाब के आधार पर करते हैं, लेकिन सफल होने के लिए यह जानना जरूरी है कि नियोक्ता इंटरव्यू के दौरान किन गुणों (qualities) को सबसे पहले देखते हैं। हर कंपनी को एक ऐसा कैंडिडेट चाहिए होता है जो सिर्फ अपने काम में निपुण ही न हो, बल्कि टीम और कंपनी के वातावरण में भी फिट बैठ सके।
इस लेख में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि इंटरव्यू के दौरान कौन-कौन सी प्रमुख क्वालिटीज देखी जाती हैं और आप इनकी तैयारी कैसे कर सकते हैं।
1. बुद्धिमत्ता (Intelligence)इंटरव्यू के दौरान सबसे पहले जो चीज सामने आती है, वह है आपकी बुद्धिमत्ता। कोई भी नियोक्ता सबसे पहले यह जानना चाहता है कि आप समस्याओं को कैसे समझते हैं और उनका समाधान किस तरह से करते हैं। आपकी सोचने-समझने की क्षमता, तर्क शक्ति और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण (analytical thinking) से ही आपकी कार्यकुशलता का आंकलन किया जाता है।
तैयारी कैसे करें:-
इंटरव्यू में पूछे जाने वाले व्यवहारिक (situational) सवालों के जवाब अभ्यास करें।
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समस्या-समाधान पर आधारित प्रश्नों के उत्तर सोच-समझकर दें।
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यह दर्शाएं कि आप निर्णय लेने में सक्षम हैं।
टीम वर्क एक ऐसी स्किल है जो लगभग हर प्रोफेशनल वातावरण में आवश्यक होती है। कोई भी कंपनी अकेले काम करने वालों से ज्यादा उन लोगों को पसंद करती है जो दूसरों के साथ मिलकर कार्य करना जानते हैं। इसलिए, नियोक्ता यह जानने की कोशिश करता है कि आप टीम में कितनी अच्छी तरह काम कर सकते हैं।
तैयारी कैसे करें:-
अपने पूर्व अनुभव साझा करें जहाँ आपने टीम के साथ मिलकर किसी प्रोजेक्ट को पूरा किया हो।
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यह दिखाएं कि आप दूसरे सदस्यों के विचारों का सम्मान करते हैं और टीम को सपोर्ट करते हैं।
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ऐसे उदाहरण दें जिससे साबित हो कि आप टीम का एक विश्वसनीय हिस्सा हैं।
आज की कार्यशैली में केवल एक ही कार्य तक सीमित रहना अब व्यवहारिक नहीं है। कंपनियों को ऐसे कैंडिडेट्स की जरूरत होती है जो एक साथ कई कार्यों को प्रबंधित कर सकें। एक जॉब प्रोफाइल में काम की विविधता को संभाल पाना एक बड़ी आवश्यकता बन गई है।
तैयारी कैसे करें:-
अपने अनुभवों के उदाहरण दें जहाँ आपने एक साथ विभिन्न कार्य किए हों।
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दिखाएं कि आप समय प्रबंधन (time management) में निपुण हैं।
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ऐसे प्रोजेक्ट्स का उल्लेख करें जिसमें आपने विभिन्न जिम्मेदारियों को एक साथ संभाला हो।
कम्युनिकेशन स्किल्स आज के कॉर्पोरेट जगत में सबसे अहम स्किल मानी जाती है। एक अच्छा कैंडिडेट वह है जो अपनी बात को स्पष्ट, प्रभावी और विनम्रता से सामने रख सके। नियोक्ता को यह समझना होता है कि आप ग्राहकों, सहकर्मियों और सीनियर्स से कैसे संवाद करेंगे।
तैयारी कैसे करें:-
इंटरव्यू से पहले मिरर अभ्यास (mirror practice) करें।
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अपनी भाषा में आत्मविश्वास रखें। अगर इंग्लिश नहीं आती तो भी स्पष्टता और विनम्रता रखें।
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सुनने की क्षमता को भी उतना ही महत्व दें जितना बोलने को।
एक उम्मीदवार के अंदर लीडरशिप क्वालिटी होना यह दर्शाता है कि वह भविष्य में बड़ी जिम्मेदारियाँ उठाने के लिए तैयार है। नियोक्ता ऐसे लोगों को प्राथमिकता देते हैं जो संकट के समय टीम का नेतृत्व कर सकें, निर्णय ले सकें और दूसरों को प्रेरित कर सकें।
तैयारी कैसे करें:-
उदाहरण दें जहाँ आपने टीम या प्रोजेक्ट को लीड किया हो।
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अपनी समस्या-समाधान और निर्णय लेने की क्षमता पर प्रकाश डालें।
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दिखाएं कि आप सिर्फ अनुयायी नहीं, बल्कि संभावित लीडर हैं।
आत्मविश्वास आपकी पूरी प्रस्तुति में झलकता है – आपके हाव-भाव, बोलचाल, उत्तर देने के तरीके और आंखों के संपर्क (eye contact) से। आत्मविश्वास यह दर्शाता है कि आप अपने ज्ञान, स्किल और क्षमता को लेकर आश्वस्त हैं।
तैयारी कैसे करें:-
इंटरव्यू के संभावित सवालों की सूची बनाएं और उत्तर तैयार करें।
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समय-समय पर मॉक इंटरव्यू लें या परिवार/दोस्तों के सामने अभ्यास करें।
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साक्षात्कार के दिन संयम और धैर्य बनाए रखें।
बदलते समय में नई तकनीकों और नीतियों के अनुसार खुद को अपडेट करना बेहद जरूरी है। इसलिए नियोक्ता यह देखता है कि क्या कैंडिडेट नई चीजें जल्दी सीख सकता है या नहीं।
तैयारी कैसे करें:-
ऐसे अनुभव साझा करें जहाँ आपने कोई नया सॉफ्टवेयर, टूल या स्किल सीखी हो।
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यह दिखाएं कि आप नई चुनौतियों को स्वीकार करने और खुद को बदलने के लिए तैयार रहते हैं।
आपका पहनावा, समय पर पहुँचना, बातचीत करने का तरीका, धन्यवाद कहना – ये सभी छोटी-छोटी चीजें आपकी प्रोफेशनल सोच को दर्शाती हैं। कई बार योग्य उम्मीदवार केवल प्रोफेशनल व्यवहार की कमी के कारण छूट जाते हैं।
तैयारी कैसे करें:-
साक्षात्कार में समय से पहले पहुंचें।
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ड्रेस कोड का ध्यान रखें – साफ और औपचारिक पोशाक पहनें।
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प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त, स्पष्ट और सकारात्मक रखें।
इंटरव्यू केवल एक प्रक्रिया नहीं बल्कि स्वयं को साबित करने का अवसर होता है। नियोक्ता आपकी डिग्री से ज्यादा आपकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक क्वालिटीज को महत्व देता है। यदि आप ऊपर बताई गई स्किल्स और क्वालिटीज पर काम करते हैं और साक्षात्कार की तैयारी पूरे आत्मविश्वास से करते हैं, तो आप निश्चित ही किसी भी जॉब इंटरव्यू में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
याद रखें: तैयारी, अभ्यास और सकारात्मक सोच ही इंटरव्यू में सफलता की कुंजी है।
आईटीआई करने के बाद क्या करे
भारत में तकनीकी शिक्षा की नींव मानी जाने वाली आईटीआई (Industrial Training Institute) न केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करती है, बल्कि युवाओं को रोजगार योग्य भी बनाती है। लेकिन बहुत से छात्र जब आईटीआई कोर्स पूरा कर लेते हैं, तो उनके मन में यह सवाल आता है — अब आगे क्या करें?
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आईटीआई कोर्स करने के बाद छात्र क्या-क्या कर सकते हैं, कौन-कौन से विकल्प उनके सामने उपलब्ध होते हैं और किस दिशा में बढ़ना उनके लिए लाभकारी हो सकता है।
आईटीआई के बाद आपके सामने दो मुख्य रास्तेआईटीआई पूरा करने के बाद छात्रों के सामने दो प्रमुख विकल्प होते हैं:
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आगे की पढ़ाई (Higher Education)
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नौकरी (सरकारी या प्राइवेट)
आइए इन दोनों विकल्पों को विस्तार से समझते हैं।
1. आगे की पढ़ाई – ITI के बाद उच्च शिक्षाआईटीआई कोर्स पूरा करने के बाद छात्र यदि चाहें तो अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। इसके कई लाभ होते हैं:
(क) बी.ए., बी.एस.सी., बी.कॉम जैसे सामान्य ग्रेजुएशन कोर्सअगर आपने 12वीं कक्षा पूरी कर ली है या आपके पास समकक्ष योग्यता है, तो आप सामान्य डिग्री कोर्स में दाखिला ले सकते हैं:
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बी.ए. (Bachelor of Arts)
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बी.एस.सी. (Bachelor of Science)
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बी.कॉम (Bachelor of Commerce)
यह विकल्प उन छात्रों के लिए अच्छा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं या किसी नॉन-टेक्निकल सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं।
(ख) डिप्लोमा कोर्स (Lateral Entry)यदि आपने 2 वर्ष का आईटीआई कोर्स पूरा किया है, तो आप पॉलिटेक्निक डिप्लोमा में द्वितीय वर्ष में लेटरल एंट्री के माध्यम से सीधे प्रवेश पा सकते हैं।
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डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
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डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग
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डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स
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डिप्लोमा इन कंप्यूटर इंजीनियरिंग
यह कोर्स तकनीकी रूप से आगे बढ़ने के लिए बेहतरीन विकल्प है और बाद में आप बी.टेक/बी.ई. में भी प्रवेश पा सकते हैं।
(ग) एप्लाइड कोर्सेजकुछ विशेष संस्थानों में आईटीआई छात्रों के लिए एप्लाइड साइंस, टूल डिजाइनिंग, CNC मशीनिंग, CAD/CAM जैसे विशेष कोर्स भी उपलब्ध होते हैं जो आधुनिक औद्योगिक तकनीकों पर आधारित होते हैं।
2. नौकरी – ITI के बाद रोजगार के अवसरआईटीआई करने के बाद रोजगार प्राप्त करने की संभावना काफी अधिक होती है। आप चाहें तो प्राइवेट कंपनियों में नौकरी कर सकते हैं या सरकारी नौकरी की तैयारी कर सकते हैं।
(क) प्राइवेट सेक्टर में नौकरीआईटीआई धारकों की माँग भारत के प्राइवेट इंडस्ट्रियल सेक्टर में हमेशा बनी रहती है। कई प्रतिष्ठित कंपनियाँ नियमित रूप से ITI पास उम्मीदवारों को भर्ती करती हैं।
प्रमुख कंपनियाँ जहाँ आप नौकरी पा सकते हैं:
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मारुति सुजुकी
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टाटा मोटर्स
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हीरो मोटोकॉर्प
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TVS मोटर कंपनी
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ओप्पो मोबाइल इंडिया
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वोल्टास, LG, Whirlpool जैसी कूलिंग इंडस्ट्री कंपनियाँ
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लार्सन एंड टुब्रो (L&T)
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महिंद्रा एंड महिंद्रा
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बॉश, सैमसंग, हिटाची जैसी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियाँ
इन कंपनियों में इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेल्डर, मेकैनिक, कंप्यूटर ऑपरेटर, CNC ऑपरेटर आदि पदों पर नियुक्तियाँ होती हैं।
(ख) सरकारी नौकरी के अवसरआईटीआई पास छात्र अनेक सरकारी विभागों में नौकरी के लिए पात्र होते हैं। समय-समय पर विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा आईटीआई धारकों के लिए वैकेंसी निकाली जाती है।
प्रमुख सरकारी विभाग और संस्थान:
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इंडियन रेलवे (Indian Railways)
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इंडियन आर्मी और पैरामिलिट्री फोर्सेस (CRPF, BSF, ITBP, CISF आदि)
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NTPC (National Thermal Power Corporation)
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BHEL, ONGC, SAIL जैसी सार्वजनिक उपक्रम (PSUs)
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DRDO, ISRO जैसी अनुसंधान संस्थाएँ
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स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (State Electricity Boards)
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BSNL, MTNL जैसी टेलीकॉम कंपनियाँ
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राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभाग
इन विभागों में टेक्नीशियन, लाइनमैन, वायरमैन, हेल्पर, फिटर, इलेक्ट्रिशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर आदि पदों पर भर्ती होती है।
(ग) अप्रेंटिसशिप (Apprenticeship) करनाआईटीआई के बाद अप्रेंटिसशिप करना एक शानदार विकल्प होता है। इसमें छात्र को किसी इंडस्ट्री में काम सीखने के साथ साथ मानदेय (stipend) भी मिलता है।
कहाँ करें अप्रेंटिसशिप:
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रेलवे वर्कशॉप
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DRDO, HAL, BHEL, BEL
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विभिन्न राज्य बिजली बोर्ड
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ऑटोमोबाइल कंपनियाँ
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सरकारी संस्थानों के ट्रेनिंग सेंटर्स
अप्रेंटिसशिप पूरा करने के बाद संबंधित कंपनी में नौकरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
3. स्वरोजगार के अवसर – खुद का व्यवसाय शुरू करेंआईटीआई कोर्स करने के बाद यदि आप खुद का काम करना चाहते हैं, तो आप स्वरोजगार की दिशा में भी बढ़ सकते हैं। इसके लिए सरकार कई योजनाएँ भी चलाती है।
उदाहरण:
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इलेक्ट्रिशियन के रूप में घरों/दफ्तरों में सेवा देना
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वेल्डिंग वर्कशॉप खोलना
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मोटर/पंप रिपेयरिंग शॉप शुरू करना
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मोबाइल रिपेयरिंग या कंप्यूटर सर्विस सेंटर
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टेलरिंग या ड्रेसेज़ सिलाई व्यवसाय
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जनरेटर/इन्वर्टर रिपेयरिंग
सरकार द्वारा PMEGP, मुद्रा योजना आदि के तहत लोन भी उपलब्ध कराया जाता है।
निष्कर्षआईटीआई कोर्स करने के बाद आपके सामने अनेक विकल्प होते हैं — चाहे वह आगे की पढ़ाई हो, नौकरी हो या खुद का व्यवसाय। यह कोर्स एक मजबूत तकनीकी नींव प्रदान करता है जिससे आप कम उम्र में ही अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं।
जो छात्र जल्दी नौकरी करना चाहते हैं, उनके लिए यह कोर्स एक बेस्ट विकल्प है। वहीं जो छात्र उच्च शिक्षा में रुचि रखते हैं, उनके लिए डिप्लोमा और डिग्री का रास्ता भी खुला है।
आईटीआई एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो हुनर, आत्मनिर्भरता और रोजगार का संगम है।
आईटीआई कोर्स से जुड़े कुछ जरुरी सवाल
आईटीआई कोर्स से जुड़े कुछ ज़रूरी सवाल और उनके जवाब
भारत में तकनीकी शिक्षा का एक प्रमुख स्तंभ है – आईटीआई (Industrial Training Institute)। यह कोर्स न केवल विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता प्रदान करता है, बल्कि उन्हें रोजगार के लिए तैयार भी करता है। बहुत से विद्यार्थी इस कोर्स के बारे में जानकारी पाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें कुछ बुनियादी सवालों के जवाब नहीं मिल पाते।
इस लेख में हम आईटीआई कोर्स से जुड़े कुछ ज़रूरी और आम सवालों के विस्तृत जवाब देंगे, जो हर छात्र को जानने चाहिए जो इस कोर्स में दाखिला लेने की सोच रहा है।
प्रश्न 1: आईटीआई आप कब कर सकते हैं?
उत्तर:
आईटीआई कोर्स करने की न्यूनतम आयु सीमा 14 वर्ष है। अधिकतम आयु सीमा सामान्यतः 40 वर्ष तक होती है, हालांकि कुछ विशेष वर्गों (SC/ST/OBC/Ex-Servicemen आदि) के लिए छूट भी दी जाती है। यह आयु सीमा पूरे भारत में लगभग समान है।
मुख्य बिंदु:
- न्यूनतम आयु: 14 वर्ष
- अधिकतम आयु: 40 वर्ष (कुछ श्रेणियों को छूट)
- 8वीं या 10वीं पास विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं
यह कोर्स किशोरों और युवाओं दोनों के लिए उपयुक्त है, जो जल्दी से किसी तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।
प्रश्न 2: आईटीआई के फॉर्म कब निकलते हैं?
उत्तर:
आईटीआई के एडमिशन फॉर्म्स सामान्यतः जून से जुलाई के बीच निकलते हैं। ये फॉर्म 10वीं कक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद अधिकांश राज्यों में जारी किए जाते हैं।
कुछ राज्यों में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया होती है, जबकि कुछ में ऑफलाइन फॉर्म भी स्वीकार किए जाते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया का सामान्य क्रम:
- ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन फॉर्म जारी होना
- मेरिट लिस्ट के आधार पर चयन (कुछ राज्यों में प्रवेश परीक्षा)
- डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
- सीट अलॉटमेंट और कॉलेज रिपोर्टिंग
इसलिए विद्यार्थियों को अपने राज्य के स्किल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर नियमित रूप से नज़र रखनी चाहिए।
प्रश्न 3: आईटीआई में कितने साल का कोर्स होता है?
उत्तर:
आईटीआई कोर्स की अवधि 6 महीने से लेकर 2 साल तक होती है। कोर्स की अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कौन-सा ट्रेड चुना है।
कोर्स की अवधि के अनुसार वर्गीकरण:
- 6 महीने के शॉर्ट टर्म कोर्स: जैसे Domestic Wiring, Computer Basics आदि
- 1 साल के कोर्स: जैसे Welder, Wireman, Stenographer, Mechanic Diesel आदि
- 2 साल के कोर्स: जैसे Electrician, Fitter, COPA, Electronic Mechanic आदि
हर कोर्स को सेमेस्टर सिस्टम में बाँटा गया है, जिससे विद्यार्थियों को क्रमबद्ध तरीके से ज्ञान मिलता है।
प्रश्न 4: आईटीआई कॉलेज में फीस कितनी लगती है?
उत्तर:
आईटीआई कोर्स की फीस इस बात पर निर्भर करती है कि आप सरकारी संस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं या प्राइवेट में।
सरकारी आईटीआई कॉलेजों में:
- फीस बहुत कम होती है या बिल्कुल नहीं ली जाती
- कई बार सिर्फ रजिस्ट्रेशन और इंस्ट्रूमेंटल चार्ज लिया जाता है
- गरीब एवं आरक्षित वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति मिलती है
प्राइवेट आईटीआई कॉलेजों में:
- फीस ₹10,000 से ₹30,000 प्रति वर्ष के बीच हो सकती है
- कुछ संस्थानों में यह फीस ट्रेड और सुविधाओं के अनुसार बढ़ सकती है
- किताबें, यूनिफॉर्म, और अन्य चार्ज अलग से हो सकते हैं
कम बजट में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए सरकारी आईटीआई एक बेहतरीन विकल्प है।
प्रश्न 5: आईटीआई के लिए कितनी पढ़ाई चाहिए?
उत्तर:
आईटीआई कोर्स में दाखिले के लिए आपकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं या 10वीं पास होनी चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन-सा ट्रेड चुन रहे हैं।
योग्यता के अनुसार कोर्स:
- 8वीं पास वाले कोर्स: जैसे Welder, Wireman, Carpenter आदि
- 10वीं पास वाले कोर्स: जैसे Electrician, Fitter, COPA, Electronic Mechanic आदि
- 12वीं पास वाले के लिए कुछ विशेष कोर्स: जैसे Stenography (English/Hindi), Dress Making, Catering आदि
कुछ कोर्सों के लिए विज्ञान और गणित विषयों का अध्ययन किया होना आवश्यक होता है। साथ ही कुछ कोर्सों में इंग्लिश नॉलेज भी लाभदायक होता है।
अन्य महत्त्वपूर्ण बातें जो जाननी चाहिए:
आईटीआई कोर्स करने के बाद क्या करें?
आईटीआई पूरा करने के बाद विद्यार्थी के पास कई विकल्प होते हैं:
- नौकरी (सरकारी या प्राइवेट)
- अप्रेंटिसशिप
- NCVT सर्टिफिकेट प्राप्त करना
- डिप्लोमा या डिग्री में प्रवेश लेना (लैटरल एंट्री के माध्यम से)
- स्वरोजगार या अपना व्यवसाय शुरू करना
आईटीआई में कितने ट्रेड होते हैं?
भारत में लगभग 130+ ट्रेड उपलब्ध हैं जिन्हें विभिन्न सेक्टरों में बाँटा गया है:
- इलेक्ट्रिकल सेक्टर: Electrician, Wireman
- मैकेनिकल सेक्टर: Fitter, Turner
- आईटी सेक्टर: COPA, Information Technology
- ऑटोमोबाइल सेक्टर: Mechanic Diesel, Mechanic Motor Vehicle
- कपड़ा उद्योग: Sewing Technology, Dress Making
- हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर: Stenographer, Catering Assistant
आईटीआई की मान्यता कैसी होती है?
आईटीआई कोर्स NCVT (National Council for Vocational Training) या SCVT (State Council for Vocational Training) से मान्यता प्राप्त होते हैं। NCVT से प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पूरे भारत में मान्यता मिलती है, जबकि SCVT प्रमाणपत्र राज्य स्तर पर मान्य होते हैं।
निष्कर्ष
आईटीआई कोर्स एक ऐसा विकल्प है जो छात्रों को कम समय और कम खर्च में तकनीकी रूप से दक्ष बनाता है। इस कोर्स के माध्यम से छात्र न केवल रोजगार प्राप्त कर सकते हैं बल्कि स्वरोजगार के भी कई अवसर प्राप्त होते हैं।
ऊपर दिए गए सवालों और उनके विस्तृत उत्तरों से आपको आईटीआई से जुड़े मूलभूत पहलुओं की सही जानकारी मिल गई होगी। यदि आप एक स्थायी और तकनीकी करियर की दिशा में बढ़ना चाहते हैं, तो आईटीआई आपके लिए एक बेहतरीन शुरुआत हो सकती है।
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भारत में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसमें कई ट्रेड्स होते हैं, लेकिन इलेक्ट्रीशियन ट्रेड सबसे अधिक लोकप्रिय और करियर-उन्मुख ट्रेड्स में से एक माना जाता है। यह ट्रेड विद्यार्थियों को न केवल तकनीकी जानकारी देता है, बल्कि उन्हें व्यावसायिक रूप से सक्षम भी बनाता है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि इलेक्ट्रीशियन ट्रेड से आईटीआई करने के क्या-क्या लाभ हैं और यह कैसे एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।
1. जल्दी नौकरी मिलने की संभावनाइलेक्ट्रीशियन ट्रेड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोर्स पूरा करने के तुरंत बाद रोजगार के अवसर मिलने लगते हैं। इस ट्रेड में कुशल श्रमिकों की हमेशा मांग बनी रहती है, चाहे वह सरकारी क्षेत्र हो या निजी। कई बार ITI पूरा करते ही कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से छात्र को नौकरी मिल जाती है।
2. अच्छी सैलरी की संभावनाएँइलेक्ट्रीशियन ट्रेड से जुड़े प्रोफेशनल्स को अन्य ट्रेड्स की तुलना में शुरू से ही बेहतर वेतन पैकेज मिलता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो कम समय में अच्छा वेतन कमाना चाहते हैं। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, वैसे-वैसे सैलरी भी बढ़ती जाती है।
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शुरुआती वेतन ₹10,000 से ₹15,000 के बीच हो सकता है
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अनुभवी इलेक्ट्रीशियन ₹25,000 से ₹40,000 या इससे अधिक तक कमा सकते हैं
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विदेशों में काम करने पर सैलरी इससे कई गुना अधिक हो सकती है
आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन कोर्स करने का खर्च सामान्यतः बहुत ही कम होता है। सरकारी आईटीआई में फीस नाममात्र की होती है और कई बार छात्रवृत्ति भी मिल जाती है। प्राइवेट संस्थानों में भी यह कोर्स अन्य प्रोफेशनल कोर्स की तुलना में कम खर्चीला होता है। इसका अर्थ यह है कि कम आय वाले परिवारों के छात्र भी इस कोर्स को आसानी से कर सकते हैं।
4. सरकारी भर्तियों में अवसरइलेक्ट्रीशियन ट्रेड करने वाले छात्रों के लिए समय-समय पर विभिन्न सरकारी विभागों में भर्तियाँ निकलती रहती हैं। उदाहरणस्वरूप:
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रेलवे में टेक्नीशियन पद
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बिजली विभाग में लाइनमैन, वायरमैन या हेल्पर
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सेना, नौसेना और वायुसेना में तकनीकी पद
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सरकारी अस्पतालों, स्कूलों, पंचायत कार्यालयों में तकनीकी स्टाफ
सरकारी नौकरियों में चयन हेतु छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं जिसमें इलेक्ट्रीशियन ट्रेड का तकनीकी ज्ञान काम आता है।
5. प्राइवेट क्षेत्र में भरपूर नौकरियाँअगर छात्र सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा नहीं करना चाहता तो निजी क्षेत्र में भी अपार संभावनाएँ हैं। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियाँ, निर्माण क्षेत्र, रियल एस्टेट, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिकल सर्विस प्रोवाइडर्स, और यहाँ तक कि होम इलेक्ट्रिकल सर्विस प्लेटफॉर्म जैसे UrbanClap (अब Urban Company) इत्यादि में बड़ी संख्या में कुशल इलेक्ट्रीशियन की माँग होती है।
6. स्वरोजगार के लिए बेहतरीन विकल्पइलेक्ट्रीशियन ट्रेड से आईटीआई करने के बाद छात्र खुद का व्यवसाय भी शुरू कर सकता है। जैसे:
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घरों और ऑफिसों में वायरिंग और इलेक्ट्रिकल रिपेयरिंग का कार्य
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इलेक्ट्रिक दुकानों की स्थापना
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ठेके पर इलेक्ट्रिकल प्रोजेक्ट लेना
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इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस सर्विस की शुरुआत
इस प्रकार यह कोर्स केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।
7. थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल ज्ञानइलेक्ट्रीशियन ट्रेड में केवल थ्योरी पढ़ाई नहीं जाती, बल्कि छात्रों को पूरी तरह से व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जाता है। इस ट्रेड में छात्र निम्नलिखित कार्यों में दक्ष बनते हैं:
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वायरिंग सिस्टम को समझना और स्थापित करना
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सर्किट डायग्राम को पढ़ना और लागू करना
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घरेलू और औद्योगिक उपकरणों की मरम्मत करना
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सुरक्षा मानकों के अनुसार कार्य करना
प्रैक्टिकल नॉलेज से छात्रों में आत्मविश्वास आता है और वे इंडस्ट्री की आवश्यकताओं के अनुसार काम करने योग्य बनते हैं।
8. कोर्स की अवधि और योग्यताइलेक्ट्रीशियन ट्रेड आमतौर पर 2 वर्ष का होता है, जिसमें 4 सेमेस्टर शामिल होते हैं। इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए न्यूनतम योग्यता 10वीं पास होना आवश्यक है। कई राज्यों में मेरिट के आधार पर प्रवेश होता है, जबकि कुछ संस्थान प्रवेश परीक्षा लेते हैं।
9. भविष्य में उच्च शिक्षा के विकल्पआईटीआई इलेक्ट्रीशियन कोर्स के बाद छात्र आगे की पढ़ाई भी कर सकते हैं:
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एनसीवीटी सर्टिफिकेट के आधार पर छात्र अप्रेंटिसशिप कर सकते हैं
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डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में लेटरल एंट्री मिल सकती है
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बी.वोक. (B.Voc) जैसे व्यावसायिक कोर्स भी एक विकल्प है
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प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, RRB, PSU) में तकनीकी पदों के लिए पात्रता होती है
इलेक्ट्रिकल क्षेत्र हर साल तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत में शहरीकरण, स्मार्ट सिटी मिशन, और औद्योगीकरण के कारण हर जगह इलेक्ट्रिकल तकनीशियनों की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्मार्ट होम्स, और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भी इलेक्ट्रीशियन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है।
निष्कर्षइलेक्ट्रीशियन ट्रेड से आईटीआई करना उन युवाओं के लिए एक शानदार विकल्प है जो तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। कम लागत, अधिक रोजगार के अवसर, बेहतर सैलरी और स्वरोजगार की संभावना इसे और भी आकर्षक बनाती है।
यदि आप भी जल्दी और स्थायी रोजगार की तलाश में हैं, तो इलेक्ट्रीशियन ट्रेड आपके लिए सही निर्णय साबित हो सकता है।
अपने इंटरव्यू में स्टूडेंट्स और जॉब सीकर्स कभी न बोलें ये शब्द
हमारे देश में भी आजकल जॉब मार्केट में काफी ज्यादा कॉम्पीटिशन है और एक वेकेंसी के लिए भी कई बार बड़ी संख्या में जॉब सीकर कैंडिडेट्स इंटरव्यू देने के लिए आते हैं. ऐसे में अक्सर स्टूडेंट्स और जॉब सीकर्स कंफ्यूज़ हो जाते हैं कि कैसे वे अपने इंटरव्यू में सफलता हासिल करें? बेशक इंटरव्यू देते समय आपका बातचीत करने का लहजा ही आपको कोई जॉब दिलवा सकता है. यह भी सच है कि, अधिकांश मामलों में इंटरव्यूअर्स कैंडिडेट्स के CV, रिज्यूम और पोर्टफोलियोज देखकर कैंडिडेट्स के बारे में पहले से ही अपनी धारणा बना लेते हैं. इस आधार पर ही वे कैंडिडेट के व्यक्तित्व का मूल्यांकन करते हैं और यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि क्या कैंडिडेट्स द्वारा अपने रिज्यूम या CV में किये गए दावे वास्तव में सच हैं? आपको इंटरव्यू में ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो आपके रिज्यूम या CV में प्रस्तुत आपके दावों और पहचान को सही साबित करें. इसलिये, यहां कुछ ऐसे शब्दों की सूची दी जा रही है जिनका उपयोग स्टूडेंट्स और जॉब सीकर कैंडिडेट्स को इंटरव्यू के दौरान कभी नहीं करना चाहिए:
- नकारात्मक शब्द - ‘नफरत’
नफरत एक बड़ी ही बलशाली नकारात्मक भावना है और अधिकांश लोग ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले लोगों से दूर भागते हैं. जब आप किसी व्यक्ति से पहली बार और खासकर किसी जॉब इंटरव्यू के दौरान मिलते हैं तो ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचें. इंटरव्यू के दौरान, इंटरव्यूअर आपकी ताकत, आपके व्यक्तित्व के सकारात्मक पहलूओं और कठिन परिस्थितियों को हल करने की आपकी काबलियत के बारे में सुनना और जानना चाहते हैं. अगर आप नफरत जैसे किसी शब्द का इस्तेमाल करेंगे तो इससे इंटरव्यूअर पर आपका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और वे आपको ‘हाई-रिस्क कैंडिडेट’ मानेंगे.
- असल में/ वास्तव में नहीं हैं पेशेवर शब्द
असल में और वास्तव में जैसे शब्द अक्सर बोले जाने वाले शब्द होते हैं. ये हमारी रोजाना बोली जाने वाली भाषा के अंग बन चुके हैं. लेकिन इन शब्दों का इस्तेमाल पेशेवर बातचीत जैसे इंटरव्यू के दौरान कभी नहीं करना चाहिये. आपको शायद अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करते समय किसी भी वाक्य की शुरूआत में इन शब्दों का इस्तेमाल करना बहुत अच्छा लगे लेकिन अपनी इस तीव्र इच्छा को रोकने की कोशिश करें. ‘हम्म या उह’ जैसे ज्यादा बोले जाने वाले अन्य शब्दों का इस्तेमाल करने से भी बचें क्योंकि ये शब्द अस्पष्टता बढ़ाते हैं और इंटरव्यूअर के दिमाग पर आपका बुरा प्रभाव पड़ता है. किसी भी प्रश्न का जवाब देते समय अगर आपको यह न पता हो कि इस प्रश्न का क्या जवाब दें?... तो कुछ समय अवश्य लें लेकिन पूरक शब्दों का इस्तेमाल करने से बचें.
- अवश्य’ भी है एक अस्पष्ट शब्द
हमारी रोज़ की अनौपचारिक बातचीत में ‘अवश्य’ या जरुर अधिकांशतः बोला जाने वाला शब्द है. इस शब्द का इतना अधिक इस्तेमाल किया जाता है कि आजकल तकरीबन ‘हां’ कहने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल समानार्थक के तौर पर होने लगा है. लेकिन ध्यान देने वाली बात तो यह है कि जब आप ‘अवश्य’ शब्द बोलें तो तकरीबन इस शब्द का अस्पष्ट उत्तर ही मिल पाता है. इसलिये, किसी पेशेवर जगह पर इस शब्द का इस्तेमाल कई बार स्पीकर में आत्म-विश्वास की कमी भी बताता है. किसी पेशेवर जगह पर ऐसे शब्दों को बोलने से बचें जिनके अर्थ स्पष्ट न हों क्योंकि कई बार ये शब्द आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक असर डाल देते हैं.
- ‘स्टफ’ शब्द को भी न करें इस्तेमाल
हम आजकल कई ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने के अभ्यस्त हो गये हैं लेकिन हम यह समझ ही नहीं पाते हैं कि किसी विशेष परिवेश में उन शब्दों का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए. इसलिये, किसी इंटरव्यूअर से बातचीत करते समय यह हो सकता है कि ये शब्द आपकी जुबान पर आने लगें. हमेशा यह याद रखें कि इंटरव्यूअर आपके द्वारा बोले गए प्रत्येक शब्द पर पूरा ध्यान देते हैं. उदाहरण के लिए, ‘स्टफ’ शब्द को लें. यह बार-बार बोला जाने वाला शब्द है जिसे हम तकरीबन किसी भी चीज़ के बारे में बात करते हुए इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इंटरव्यू में इस तरह के किसी भी शब्द का इस्तेमाल करने से आपका नेगेटिव असर पड़ेगा क्योंकि इस तरह के शब्द अक्सर एक अनौपचारिक रवैया इंगित करते हैं. इनके इस्तेमाल से कैंडिडेट के व्यक्तित्व में गंभीरता की कमी प्रतीत होती है जो कोई भी एम्प्लॉयर अपने किसी भावी कैंडिडेट में नहीं देखना चाहता है.
- कसम लेने वाले शब्द भी दर्शाते हैं आपमें भरोसे की कमी
उक्त शब्द अपने में ही स्पष्ट हैं लेकिन जैसेकि हमने ऊपर चर्चा की है, कई शब्द हमारी रोजाना की बातचीत का हिस्सा बन गये हैं और हम बिना सोचे-समझे उन शब्दों का इस्तेमाल करते रहते हैं. पिछले कुछ वर्षों की तुलना में जॉब इंटरव्यू शायद कुछ हद तक अनौपचारिक हो गए हैं लेकिन इसका यह भी मतलब नहीं है कि आप इंटरव्यूअर के साथ अनौपचारिक बातचीत कर सकते हैं. आपको अपने इंटरव्यूअर के साथ बातचीत करते समय कुछ हद तक प्रोफेशनलिज्म बनाये रखना होगा और जिसका अर्थ है कि आप अपनी बातचीत में किसी भी कीमत पर गाली/ कसम लेने वाले शब्दों का इस्तमाल करने से बचें. दरअसल, कसम लेने वाले शब्द भी आपमें भरोसे की कमी दर्शाते हैं और कोई भी कंपनी अपने वर्क कल्चर या कार्य शैली में भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने को मंजूर नहीं करती है. अगर आप इंटरव्यू में ही ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर डालें तो वह कंपनी शायद ही आपको काम पर रखे.
- जो भी हो’ बोलने से बचें
जब हम अपने दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत करते हैं तो एक और बहुत ज्यादा बोला जाने वाला शब्द ‘जो भी हो/ चाहे जो हो’ है. आम परिस्थितियों में, इस शब्द का इस्तेमाल करना ठीक है लेकिन किसी पेशेवर परिवेश में ऐसा कदापि न करें. अपनी बातचीत में इस शब्द का इस्तेमाल करने का अर्थ है कि आपने हार मान ली है. अगर आप इंटरव्यूअर के सामने यह शब्द इस्तेमाल करते हैं तो आप उन पर अपनी नकारात्मक इमेज छोड़ते हैं. अक्सर एम्प्लॉयर्स ऐसे एम्प्लाइज की तलाश में रहते हैं जो उपाय करने में कुशल होते हैं और ऐसे एम्प्लॉइज को नज़रंदाज़ करते हैं जो जरा-सी मुसीबत आने पर घबरा कर पीछे हट जाते हैं. आशा है कि आपके लिए ये टिप्स मददगार साबित होंगे और आप अपने अगले इंटरव्यू में इनका पूरा ध्यान रखेंगे ताकि आप गलती से भी उक्त शब्दों का इस्तेमाल अपने इंटरव्यू के दौरान न करें.
फर्स्ट इम्प्रेशन, मस्त इम्प्रेशन
किसी शख्स से पहली मुलाकात होने पर उसके बाहरी व्यक्तित्व और आचरण से ही आमतौर पर फर्स्ट इम्प्रेशन बन जाता है, जो अक्सर लास्ट इम्प्रेशन भी साबित होता है। फर्स्ट इम्प्रेशन को जबर्दस्त बनाना चाहते हैं तो पर्सनैलिटी डिवेलपमेंट के इन टिप्स पर गौर करें। पूरी जानकारी दे रहे हैं
लोग आमतौर पर अपनी पर्सनैलिटी की अहमियत को नजरअंदाज कर देते हैं और बैठे-बिठाए इंटरव्यू और दूसरे तमाम मौकों पर दूसरों के सामने अपनी छवि मटियामेट कर बैठते हैं। इसका खमियाजा जीवन की छोटी-बड़ी असफलताओं के रूप में सामने आता है। हालांकि ऐसे लोग कभी यह नहीं जान पाते कि उनके बारे में लोगों के बीच निगेटिव इम्प्रेशन कैसे बन गया। ऐसे ही कुछ उदाहरणों पर गौर करते हैं :
- इंटरव्यू रूम में प्रवेश करता एक शख्स जिस की सुर्ख लाल रंग की शर्ट के ऊपरी दोनों बटन खुले हैं। सनग्लास बालों में अटका हुआ है। लंबे बाल किसी फिल्मी हीरो के स्टाइल में जेल लगाकर सेट किए गए हैं। रेज्यूमे मांगे जाने पर जींस की जेब से एक तुड़ा-मुड़ा कागज इंटरव्यूअर की ओर बढ़ा देता है। इस इंटरव्यू का रिजल्ट क्या होगा, इस बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं।
- कॉलेज का पहला दिन। क्लास में लेट होने के बावजूद एक स्टूडेंट अंदर आने के लिए टीचर से इजाजत लेने की जरूरत महसूस नहीं करता। कॉपी-कलम तक हाथ में नहीं। टीचर के पूछने पर उद्दंडता के साथ जवाब देता है। क्या साल भर टीचर ऐसे स्टूडेंट के बारे में अपने विचार बदल सकेगा? इस मामले में किसी न किसी रूप में खमियाजा स्टूडेंट को ही भुगतना पडे़गा।
- ऑफिस में सहकर्मियों खासतौर पर महिलाओं के साथ हंसी-ठिठोली में वक्त बिताना। काम के समय मोबाइल पर बातचीत। कभी भी समय पर काम पूरा नहीं करना। हमेशा नए बहाने। ऐसे में तरक्की तो दूर की बात है, क्या बॉस ऐसे शख्स को लंबे समय तक रखेगा?
- एयरपोर्ट पर या ट्रेन में गलत और उलटी-सीधी अंग्रेजी में बातचीत कर झूठा रौब जमाते हुए जबर्दस्ती बाकी सहयात्रियों को आकर्षित करने की कोशिश। ऐसे चेप टाइप के इंसान से सामने वाला जल्द पीछा छुड़ाने की कोशिश क्यों नहीं करेगा?
- दोस्तों के बीच बात-बात पर बड़बोलापन प्रदर्शित करना। सिर्फ अपने मुंह मियां-मिट्ठू बनते हुए अहमियत जताने की हर समय कोशिश। पीठ पीछे ऐसे शख्स के बारे में क्या बातें की जाती होंगी, यह कल्पना करना मुश्किल नहीं होना चाहिए।
जब इस तरह के टॉपिक पर बात छेड़ी जाती है, तो न जाने कितने ऐसे कैरेक्टर अपने इर्द-गिर्द के लोगों के बीच से निकलकर अचानक आंखों के सामने आ जाते हैं। ऐसा भी नहीं कि ऐसे लोग कम अक्ल होते हैं या जीवन में कामयाब नहीं हो सकते, पर अपनी इन्हीं आदतों और गलतियों की वजह से ये जाने-अनजाने अक्सर जिंदगी के गोल्डन चांस गवां बैठते हैं। यहीं बात होती है पर्सनैलिटी डिवेलपमेंट या पर्सनैलिटी ग्रूमिंग की जरूरत की। ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जिनमें भारी-भरकम डिग्रियां होने के बावजूद लोग कॉमन सेंस के महत्व से अनजान होते हैं। मैनर्स या तमीज नाम की चिड़िया के बारे में जानते तक नहीं।
क्या है पर्सनैलिटी ग्रूमिंग
इसमें सबसे पहला हिस्सा है सॉफ्ट स्किल डिवेलपमेंट का। इसके तहत उठने-बैठने का सलीका, बातचीत करने, खुद को आकर्षक ढंग से पेश करने, सटीक शब्दों के चयन, दूसरों से सम्मान लेने और देने आदि पर आधारित बेहद छोटी-छोटी आदतें शामिल हैं।
- मैं कर सकता हूं, यह दृष्टिकोण अपनी सोच में विकसित करना।
- आत्मविश्वास बढ़ाना और अपनी छवि (सेल्फ इमेज) में निखार लाना।
- कम्यूनिकेशन स्किल्स में सुधार।
- खुद को अच्छी तरह से पेश कर पाने की योग्यता।
पुरुषों के लिए ऑफिस के मुताबिक पर्सनल ग्रूमिंग टिप्स
- जींस और टी-शर्ट जैसी इन्फॉर्मल ड्रेस ऑफिस में न पहनें। फॉर्मल शर्ट और ट्राउजर्स और पॉलिश किए हुए लेदर शूज ही पहनें।
- बिखरे या फिल्मी अंदाज के बालों के स्टाइल से खराब इम्प्रेशन पड़ता है।
- शो-ऑफ करने के इरादे से इस्तेमाल की जाने वाली चीजों से परहेज करें। इनमें सोने की मोटी चेन, हाथों में ढेर सी अंगूठियां, महंगे मोबाइल और कार की चाबियां उंगलियों पर नचाना जैसी हरकतों का जिक्र किया जा सकता है।
महिलाओं के लिए ऑफिस के मुताबिक पर्सनल ग्रूमिंग टिप्स
- ऑफिस या वर्कप्लेस पर परफ्यूम, सेंट या किसी तेज सुगंध का इस्तेमाल करने से बचें।
- आंखों को बहुत चुभने वाले गहरे रंगों का इस्तेमाल नेल पॉलिश में न करें। ऑफिस में प्रफेशनल लुक में नजर आने के लिए यह जरूरी है।
- चाल सामान्य रखें। मटकने/बलखाकर चलने जैसी कोशिश शोभा नहीं देती।
- इसी तरह हेयर स्टाइल भी सादगीपूर्ण रखें। चेहरे और आंखों पर बाल न आएं। अटपटे से हेयर कलर का प्रयोग न करें। सुगंधित हेयर स्प्रे या जेल से भी बचें।
- ऑफिस में मेकअप हल्का और चेहरे की जरूरत के मुताबिक होना चाहिए। जैसे ज्यादा मेकअप खराब इम्प्रेशनदेता है, वैसे ही मेकअप न करना भी उतना ही खराब लग सकता है।
- ऑफिस में कम-से-कम और हल्की जूलरी पहनें। आवाज करने वाले या ज्यादा चमक-दमक वाले आभूषणों का इस्तेमाल न करें।
कम्यूनिकेशन संबंधी टिप्स
- बहुत तेजी से बोलने से सुनने वाला व्यक्ति जल्द ही आपकी बातों में दिलचस्पी लेना बंद कर देता है और कंफ्यूज भी महसूस करने लगता है इसलिए सामान्य गति से बातचीत करना प्रभावी कहा जा सकता है।
- ज्यादा बोलने की प्रवृति भी आमतौर पर घातक साबित होती है। छोटे-छोटे वार्तालाप को ध्यान से सुना और समझा जाता है। थोथा चना बाजे घना कहावत इसी संदर्भ में कही जाती है।
- शब्दों के चयन में हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। खासतौर से किसके सामने बात की जा रही है, इसका ध्यान रखकर ही शब्द इस्तेमाल करें। स्लैंग, संक्षिप्त शब्दों या चालू शब्दों के प्रयोग से बचने की कोशिश करें।
- निगेटिव बॉडी लैंग्वेज और पोस्चर्स (पैर हिलाना, हाथों को नचा-नचाकर बात करना या नाक खुजलाना आदि) से सुनने वाला असहजता महसूस करता है इसलिए सहज होकर विचारों को रखें।
- जब सामने वाला शख्स बात कर रहा हो, तो बीच में उसकी बातों को नहीं काटना चाहिए। धैर्य से सुनें और समझें। जब उसकी बात खत्म हो जाए तो अपना प्रश्न रखें।
- बातचीत के दौरान अपने विचारों को भी जरूर रखें, नहीं तो बातचीत इकतरफा हो जाएगी।
- लूज टॉक्स (किसी के बारे में कोई अनर्गल या आपत्तिजनक बातें) करने की प्रवृति नुकसानदेह होती है।
- बातचीत के दौरान ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बचें जिनके अर्थ के बारे में आप निश्चित नहीं हैं।
मोबाइल मैनर्स
- किसी से बात करते समय अगर मोबाइल बजे, तो तभी फोन अटेंड करें, जब बहुत जरूरी हो, वह भी सामने वाले की इजाजत लेकर। नहीं तो बाद में बात करें।
- मीटिंग/पिक्चर हॉल/कंसर्ट/सेमिनार या किसी और फंक्शन में मोबाइल साइलेंट मोड पर रखें या स्विच ऑफ कर दें।
- किसी से बिना पूछे मोबाइल से फोटो नहीं खींचें।
- धीमी आवाज में बात करें और मोबाइल स्पीकर का वॉल्यूम भी कम रखें, नहीं तो सब लोगों तक आवाज पहुंचती है।
- रिंग टोन सादगीपूर्ण हो और इसे कम-से-कम वॉल्यूम पर रखें।
सामान्य शिष्टाचार
- अपने से बड़ों से मिलते समय सही ढंग से अभिवादन करें। आई कॉन्टैक्ट बनाए रखें। नमस्कार कर रहे हैं तो सिर झुकाते हुए दोनों हाथ जोड़ें। चरण स्पर्श में भी घुटनों तक हाथ लगाने का तरीका ठीक नहीं।
- हाथ मिलाते समय गर्मजोशी का परिचय दें। ढीले-ढाले तरीके से हाथ न मिलाएं।
- पब्लिक प्लेस या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अगर साथ वाली सीट पर महिला बैठी हैं तो एक निश्चित दूरी बनाकर बैठें।
- महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को पहले आगे आने का मौका दें।
- किसी से मदद मांगते वक्त बेहद सॉफ्ट आवाज में आग्रह करें। बाद में धन्यवाद करना न भूलें।
- खांसते/छींकते/हिचकी के समय मुंह पर रुमाल या हाथ रखें और बाद में एक्सक्यूज मी कहें।
- पैर पटककर या जूतों/सैंडलों की आवाज करते हुए लोगों का ध्यान आकर्षित करते हुए नहीं चलें।
- किसी की ओर उंगली का इशारा करते हुए बात न करें। इसी तरह किसी को लगातार देखने या घूरने की प्रवृति से बचें।
कैसी हो बॉडी लैंग्वेज
इसमें कोई शक नहीं कि क्यूनिकेशन और खुद को प्रेजेंट करते हुए बॉडी लैंग्वेज का काफी महत्व है। अब देखते हैं बॉडी लैंग्वेज से जुड़ी कुछ बातें :
- हाथ और पैरों को क्रॉस करके न बैठें: बैठते समय खासतौर पर किसी इंटरव्यू के समय ध्यान रखें कि हाथों और पैरों को क्रॉस न करें। इससे आपके डिफेंसिव होने का संकेत मिलता है।
- आई कॉन्टैक्ट बनाकर बात करें: बातचीत में इधर-उधर न देखते हुए सीधे सामने वाले व्यक्ति से आई टु आई कॉन्टैक्ट बनाकर बात करें। इससे आपके आत्मविश्वास का पता चलता है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि आप लगातार घूरें और सामने वाले के लिए असहजता की स्थिति हो जाए।
- कंधों को आगे उचकाते हुए बात नहीं: ऐसा करने से पता चलता है कि आप तनाव में हैं। कंधों को पीछे की तरफ रखते हुए रिलैक्स होकर बात करें या इंटरव्यू फेस करें।
- सर हिलाकर हामी भरें: सुनने के क्रम में वक्ता को यह अहसास दिलाने के लिए कि आप उसकी बातों को ध्यान से सुन रहे हैं, समय-समय पर सिर हिलाकर स्वीकृति या हामी का संकेत देते रहें लेकिन सिर हिलाने की अति नहीं होनी चाहिए।
- अधलेटी अवस्था में नहीं बैठें: किसी से बातचीत करते हुए सीधे होकर रिलैक्स मुद्रा में बैठें।
- मुस्कान और हंसी: बातचीत के दौरान मजाक या हंसी की बात पर हल्की मुस्कान आपके चेहरे पर होने से आपके मैत्रीपूर्ण रवैये की झलक सामने वाले व्यक्ति को मिलती है।
- चेहरे पर बार-बार हाथ नहीं: इससे आपकी नर्वसनेस का पता चलता है और सामने वाले व्यक्ति का ध्यान भी बंटता है।
- अपने एक्शंस में धीमापन लाएं: चाल में धीमापन लाने से आप खुद को ज्यादा आश्वस्त महसूस कर सकते हैं।
- बैठे-बैठे हाथ-पैर न हिलाएं: इससे आपकी नर्वसनेस का पता चलता है। अपने शरीर के मूवमेंट्स पर नियंत्रण रखें।
अपने एटिट्यूड को पहचानें
- पता करें कि आप असर्टिव (तर्क के आधार पर अपनी बातें धैर्यपूर्वक मनवाने की प्रवृति) हैं, अग्रेसिव (धमकाने वाले अंदाज में ऊंचा बोलकर मनवाने की प्रवृति) हैं या समिसिव (दूसरों की बातों को बिना किसी प्रतिरोध मान लेने की प्रवृति)। खुद को असर्टिव बनाने की कोशिश करें। बाकी दोनों प्रवृतियों से नुकसान होने के चांस ज्यादा हो सकते हैं।
लीडरशिप क्वॉलिटी
नौकरियों के इंटरव्यू में ऐसी क्वालिटी वाले युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है जिनमें लीडरशिप क्वालिटी हो। चयन प्रक्रिया में बस इतना ही देखा जाता है कि प्रत्याशी बाकी लोगों पर हावी होने, उनकी बातों को नजरअंदाज करने, उन्हें बोलने का मौका न देते हुए लगातार सिर्फ दिखाने के लिए बोलने का प्रयास तो नहीं कर रहा है। इस दौरान संक्षिप्त लेकिन तथ्यपूर्ण और बाकी प्रत्याशियों के मत का सम्मान करते हुए विचार रखने वालों पर सहसा ही रोजगारदाताओं की नजर जाती है।
स्ट्रेस मैनेजमेंट
रोजमर्रा के जीवन में भी तनाव के क्षण जाने-अनजाने आते-जाते रहते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि ऐसे आवेश और तनाव पर कितनी जल्दी काबू पाया जा सकता है जिससे इसका असर बाद वाले कार्यकलापों पर नहीं पड़े। आइए बात करते हैं ऐसे ही कुछ टिप्स पर :
- बहस या हॉट डिस्कशन के वक्त खुद पर नियंत्रण रखें और आवेश में न आएं।
- बाद में एक गिलास ठंडा पानी पिएं और रिलैक्स होकर बैठ जाएं। कोशिश करें कि उस वक्त कुछ नहीं सोचें।
- 10 मिनट के लिए खुली हवा में टहलकर आएं।
- चाय-सिगरेट से तनाव दूर नहीं होगा बल्कि और बढ़ भी सकता है।
- पॉजिटिव सोच रखते हुए अपने बाकी कामों को अंजाम देने की कोशिश करें।
पॉजिटिव इमेज बिल्डिंग
- आपके चेहरे पर सौम्यता और मुस्कान होने से किसी को भी अंदाजा हो जाएगा कि आप फ्रेंडली हैं।
- ऑफिस या घर कहीं भी हर बात में इनकार करने या टालने की प्रवृति बार-बार दिखाने से आपकी इमेज काम से भागने वाले व्यक्ति की बन जाएगी। यह निगेटिव इमेज होगी।
- खुद आगे बढ़कर किसी की मदद करने की आदत विकसित करना आपकी इमेज और कॉन्फिडेंस को बढ़ाने में मददगार होंगे।
- झूठ बोलने या बड़बोलेपन से भी इमेज को नुकसान होगा।
- अपने से जूनियर या होटलों वगैरह में वेटर्स के साथ बदतमीजी से बात करने से आपके दोस्तों के बीच आपके प्रति गलत संदेश जाएगा। विश्वास करें कि सम्मानपूर्वक बात करने से आपकी इज्जत बढ़ेगी, घटेगी नहीं।
मिथ्स और फैक्ट्स
मिथ: महंगे और ब्रैंडेड कपडे़, मोबाइल या मोटरसाइकल या कार होने से ही पर्सनैलिटी बनती है।
फैक्ट: इससे भले ही दूर से कुछ समय के लिए कोई आकर्षित हो जाए लेकिन आपके खराब मैनर्स और दिमागी दिवालियापन की पोल खुलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। तब ये सब महंगी चीजें बेकार साबित हो जाएंगी।
मिथ: अंग्रेजी के बिना पर्सनैलिटी बना पाना मुमकिन नहीं है।
फैक्ट: अगर आप हिंदी में भी विनम्रता के साथ नपे-तुले शब्दों में बात करेंगे तो यकीन मानिए इससे भी सामने वाले के ऊपर आपकी पॉजिटिव छाप ही पड़ेगी।
मिथ: पर्सनैलिटी ग्रूमिंग जैसी बातें इंटरव्यू तक ही ठीक हैं।
फैक्ट: अगर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उद्दंड हैं और बेसिक मैनर्स से भी कोसों दूर हैं तो इंटरव्यू के दौरान भी आपकी पोल खुलने की पूरी आशंका होगी।
मिथ: लड़कियों से दोस्ती करने के लिए शो-ऑफ ही एकमात्र शॉर्टकट है।
फैक्ट: यह आपके लिए शॉर्टकट नहीं, बल्कि शॉर्ट सर्किट साबित हो सकता है और आपकी इमेज हमेशा के लिए चालू किस्म की बन सकती है। आप जो भी हैं, बस उतनी ही सचाई से खुद को एक दोस्त के रूप में पेश करें।
अक्सर पूछे जाने वाले कुछ सवाल
इंटरव्यू में कैसे कपड़े पहनने चाहिए?
गर्मियों में लाइट कलर की फुल शर्ट और डार्क ट्राउजर्स पहन सकते हैं। कपडे़ बहुत ढीले या टाइट भी नहीं होने चाहिए। सर्दियों में टाई और ब्लेजर पहना जा सकता है। मांगे हुए या नए कपडे़ कतई न पहनें। इससे आपको फिटिंग की वजह से असुविधा हो सकती है। युवतियां या महिलाएं लाइट कलर के सूट या साड़ी पहन सकती हैं। लाइट मेकअप काफी होगा।
सर्टिफिकेट कैसे पेश किए जाने चाहिए?
आपके सभी ओरिजिनल सर्टिफिकेट लैमिनेटेड होने चाहिए। इन्हें ऐसे फोल्डर में रखें, जिसमें ट्रांसपैरंट प्लास्टिक के पन्ने हों जिनमें आप इन्हें एक साथ रख सकते हैं। यही फाइल आप सामने पेश कर सकते हैं।
कमियों के बारे में पूछे जाने पर क्या जवाब देना चाहिए?
कोई कमी नहीं है...ऐसा जवाब घातक हो सकता है। बेहतर होगा कि अपनी ऐसी कमियों पर बात करें जिनसे ऑफिस का काम प्रभावित नहीं होता हो। इनमें कामचोरी, आलस्य, झूठ बोलना, समय का पाबंद न होना, देर से उठना आदि पर चर्चा करने से बचें। मूवीज देखना, खाना नहीं बना पाना, सिगरेट पीना आदि कमियों को बता सकते हैं।
पिछली नौकरी छोड़ने की वजह क्या बताई जानी चाहिए?
किसी भी सूरत में पिछली कंपनी की बुराई नहीं करें। नौकरी बदलने को आगे की तरक्की और नई कंपनी के ग्रोथ ग्राफ से जोड़कर बता सकते हैं।
यदि इंटरव्यू में इस सवाल का सही जवाब दे दिया तो, फिर जॉब तय..पूजा
आपने कभी सोचा है कि जब हम किसी से बात कर रहे होते हैं, तो हर तरह की बात करने में माहिर व्यक्ति से भी जब अपने बारे में कुछ बताने को कहा जाता है, तो उसे सोचने के लिए एक मिनट का समय लग जाता है। अगर कोई तुरंत बता भी देता है, तो खुद के बारे में एक मिनट से ज्यादा नहीं बोल पाता। इंटरव्यू के दौरान भी सबसे ज्यादा परेशानी आसान से लगने वाले इसी सवाल से होती है कि अपने बारे में कुछ बताइए? हालांकि कुछ बातों का ध्यान रखें तो आप न सिर्फ इस सवाल का सही जवाब दे सकते हैं, बल्कि अपने जवाब से इंटरव्यू लेने वाले पर अलग छाप भी छोड़ सकते हैं।
जब आप इंटरव्यू के लिए कहीं जाते हैं, तो इंटरव्यू लेने वाले की तरफ से पहला सवाल अक्सर यही दागा जाता है कि अपने बारे में कुछ बताइए। अगर इंटरव्यू लेने वाले ने यही बात आपका नाम लेकर पूछा है कि, Puja tell me something about yourself तो जाहिर सी बात है कि आपको ये नहीं कहना है कि Sir my name is Puja, क्योंकि वो पहले ही आपका नाम जान चुका है। इस बात को ध्यान रखें, वरना लगेगा कि आप जवाब रट कर आए हैं। इस दोहराव से बचकर आप अपना प्रभाव एक स्मार्ट कैंडीडेट के तौर पर छोड़ सकते हैं।
उसके बाद आपको बताना है कि आपके शहर का नाम क्या है। आप या तो कह सकते हैं 'I belong to Delhi' या I live in Delhi', लेकिन I belong to ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। उसके बाद आपके जवाब की तीसरी लाइन होगी, जो उस नौकरी की जरूरत के हिसाब से आपकी सबसे बड़ी शैक्षणिक योग्यता के बारे में होगी। जैसे 'I have PG in... ' या 'I am BTech या I am MBA', या कोई भी जो सबसे बड़ी डिग्री आपके पास हो, उसे और किस इंस्टीट्यूट से किस वर्ष में आपने ये डिग्री पूरी की है, उसके बारे में बताना चाहिए। जैसे— 'Sir I have in MBA from Symbioses College Pune'। सबसे बड़ी डिग्री सबसे पहले बताने की इसलिए जरूरत है क्योंकि आपको नौकरी उसी के आधार पर मिलने वाली है और वैसे भी ग्रेजुएशन से पहले की पढ़ाई, जब तक कोई अंडरग्रेजुएट डिप्लोमा नहीं है, या उस जॉब की शर्त नहीं है, उसको बताने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
अगर आप फ्रेशर हैं, या अगर आपने कोई डिप्लोमा या स्किल कोर्स किया है, तो उसका भी अपनी सबसे बड़ी शैक्षणिक योग्यता के साथ उल्लेख जरूर करें। इसके बाद बारी आती है आपकी दक्षताओं और अनुभव की। अगर आप फ्रेशर नहीं हैं, तो आपके पास एक्सपीरियंस लैटर और अन्य जरूरी कागजात होने चाहिए और आप उनके बारे में इंटरव्यू में भी बताएं। अपनी दक्षताएं जो आपने अपने रेज्यूमे में लिखी हैं, उन सभी को बताने की जरूरत नहीं है। आप एक या दो का जिक्र कर सकते हैं, जैसे I am quite good in Computer and PR skills। अनुभव के बारे में बताने के लिए आप कह सकते हैं—' I am carrying in experience of three years।'
उसके बाद आप अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताएंगे। क्योंकि आप शुरुआती परिचय में आप परिवार के बारे में नहीं बताएंगे तो बाद में ये सवाल आपसे पूछा जाएगा, इसलिए इसका पहले सवाल के जवाब में ही उल्लेख कर दें। आप इसे इस तरह से कह सकते हैं- So far my family background is...' या फिर ' in my family there are three members...' या फिर 'If I talk about my family we are three members, my parents and me. इस तीनों में से किसी भी वाक्य से आप अपने परिवार के बारे में बताना शुरू कर सकते हैं। अपने परिवार के बारे में थोड़ा बताना हमेशा ही ठीक रहता है।
अंत में अपनी हॉबीज यानी रुचियों के बारे में भी बताना चाहिए, चूंकि आपकी ये व्यक्तिगत रुचियां हैं, इसलिए आपके बोलने की टोन धीमा और दोस्ताना ही रखें। आप कह सकते हैं.. 'I have couple of hobbies...' या फिर 'My hobbies are...' या फिर 'I like to do....' या फिर 'If I talk about my hobbies...'। इन चारों वाक्यों में से जो भी आपको अच्छा लगा, उससे शुरू करके आप अपनी हॉबीज के बारे में बता सकते हैं। ध्यान रखें, इसे संक्षेप में बताएं, हां कोई हॉबी ऐसी हो जो आपकी नौकरी से जुड़ी हो तो थोड़ा विस्तार से बता सकते हैं।
इस तरह से आप अपने बारे में ज्यादातर बातें बता चुके होते हैं, अब अपने जवाब का अच्छा सा अंत भी करना जरूरी होता है, उसके लिए बेहतरीन लाइन होती है... 'its all about me Sir'। ध्यान रहे बार-बार सर या मेम कहना भी अच्छी छाप नहीं छोड़ता है। जवाब की शुरुआत में एक बार और जवाब की आखिरी लाइन में सर या मेम कहना ही अच्छा रहता है। अपनी टोन कूल रखें, चेहरे पर मुस्कराहट बनाए रखें और आई कॉन्टेक्ट बिगड़े नहीं, इसका ध्यान रखें, आत्मविश्वास बनाए रखें।
इस तरह 'Tell me about yourself' वाले सवाल के जवाब को क्रम से कई हिस्से में बांट लें। पहले नाम, फिर शहर, फिर सबसे बड़ी शैक्षणिक योग्यता, फिर और कोई स्किल या कोर्स, फिर अनुभव, इसके बाद पारिवारिक पृष्ठभूमि, उसके बाद अपनी रुचियों के बारे में संक्षिप्त में बताएं। अगर आपने बिलकुल ठीक से इसे फॉलो किया और आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया तो आपका जबर्दस्त इम्प्रेशन पड़ेगा। इस तरह से आपका जवाब या परिचय कुछ-कुछ ऐसा होगा-
Sir/Mam, I am Puja . I belong to Delhi. I have in MBA from Symbiosis College, Pune in 2012.along wth it I have Completed Diploma in Aviation from Franklin Institute in 2009. I am Carrying in experience of so and so(जो भी आपका हो). I think I am quite good in Computer and PR Skills, My Previous boss used to say it. If I talk about my famly we are three members, my parents and me. My father s a retired police Inspector and mother s home maker. I would like to mention some of my hobbies like playing chess and visiting new places. its all about me sir.
कहते हैं कि फर्स्ट इंप्रेशन इज लास्ट इंप्रेशन और इंटरव्यू का पहला सवाल ही आपको ये इंप्रेशन बनाने का मौका दे देता है बशर्ते कि आप पूरे विश्वास के साथ बिना चूके सारी जानकारियां शॉर्ट में दे दें। बेस्ट ऑफ लक...!
क्या दिलाए इंटरव्यू में कामयाबी
कहने को तो हर किसी का कपड़े पहनने, उठने-बैठने का अपना तौर-तरीका होता है, लेकिन कुछ मैनर्सऔर एटिकेट्स उन्हें दूसरों से अलग और बेहतर बनाते हैं। ऐसा मुमकिन होता है मैनर्स को लेकर उनकी समझ और काम करने की नफासत से। इमेज कंसल्टेंट जसप्रीत कौर से बातचीत के आधार पर ड्रेसिंग, डाइनिंग और कम्यूनिकेशन के मैनर्स बता रही हैं
- एक मल्टिनैशनल कंपनी का ऑफिस। मैनेजर की पोस्ट के लिए इंटरव्यू हो रहे हैं। नेहा अंदर आती हैं और बड़े अदब के साथ इंटरव्यू बोर्ड के मेंबर्स को हलो बोलती हैं। बोर्ड मेंबर्स की निगाह उन पर पड़ती है तो कुछ पल के लिए ठहर जाती है। नेहा की पर्सनैलिटी उन्हें प्रभावित करती है। इसके बाद फॉर्मल इंटरव्यू शुरू होता है। इंटरव्यू अच्छा होता है, हालांकि नेहा को लगता है कि एक-दो सवालों का जवाब वह और बेहतर दे सकती थीं। फिर भी नेहा का सिलेक्शन हो जाता है। वजह, बोर्ड मेंबर्स को नेहा की पर्सनैलिटी (ड्रेसिंग सेंस, बैठने का तरीका, बातचीत करने का सलीका आदि) काफी पसंद आते हैं। हालांकि नेहा को लुक के मामले में औसत ही कहा जाएगा। फिर भी अपने मैनर्स और सलीकों से वह जहां जाती हैं, दूसरों पर छा जाती हैं।
दूसरी ओर मोहित हैं, जोकि काफी गुड लुकिंग हैं। अच्छे पैसे वाले घर से हैं, लेकिन न कपड़े पहनने का शऊर है, न ही बातचीत का सलीका। ऐसे में अक्सर लोग मोहित से दूरी बनाना ही पसंद करते हैं।
दरअसल, जब हम किसी से मिलते हैं तो पहले इंप्रेशन से ही हमारी इमेज सामनेवाले पर बनती है। इस इमेज को बनाने में हमारे पहनने, उठने-बैठने, बोलने और बॉडी लैंग्वेज आदि का काफी रोल होता है। इसके अलावा, आप फोन पर कैसे बात करते हैं, डायनिंग टेबल पर या रेस्तरां में नॉर्मली आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, लिफ्ट का इस्तेमाल या किसी के साथ चल रहे हों तो गेट खोलने जैसी बातों में किस चीजों का ध्यान रखन चाहिए, ये काफी अहम होते हैं। चलिए जानते हैं इन्हीं सब चीजों से संबंधित मैनर्स और तौर-तरीकों के बारे में।
फायदे हैं तमाम
-सही मैनर्स से आप दूसरों का दिल जीत पाते हैं
-दूसरों पर आपका फर्स्ट इंप्रेशन पॉजिटिव बनता है
-करियर में आगे बढ़ने में मदद मिलती है
-अपना स्टेटस बेहतर करने में मदद मिलती है
- मैनर्स फॉलो कर कई बार आप खुद को परेशानी से बचा लेते हैं तो कई बार आसपास के लोगों को
स्टाइल में रहने का...
-हमेशा मौके के मुताबिक कपड़े पहनें, मसलन देखें कि आप फॉर्मल, कैजुअल या सेलिब्रेशन कौन-से मौके पर शिरकत कर रहे हैं। ड्रेस ऐसी हो, जो आपकी स्ट्रेंग्थ को उभारे और कमजोरी को छुपाए।
- ड्रेस के मामले में हमेशा क्वांटिटी से ज्यादा क्वॉलिटी पर जोर दें। कोशिश करें कि अच्छे ब्रैंड के कपड़े खरीदें।
- सेलिब्रेशन या कैजुअल मौकों पर तो आप अपनी पसंद के मुताबिक कुछ भी पहन सकते हैं, लेकिन फेस्टिवल के मौकों पर महिलाओं के लिए साड़ी-सूट और पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा सबसे बेहतर है।
- किसी भी सेलिब्रेशन या फेस्टिवल में इतना हेवी न पहनें कि आप जरी या जूलरी की दुकान लगने लगें। अगर ड्रेस हेवी है तो मेकअप लाइट रखें। मैचिंग के चक्कर में दोनों को हेवी न करें। अगर लाइट ड्रेस है तो मेकअप थोड़ा हेवी करके फेस्टिव लुक बनाएं।
कॉर्पोरेट या फॉर्मल ड्रेसिंग
पुरुष और महिला, सभी को अपनी बॉडी शेप और कलर के मुताबिक ड्रेस चुननी चाहिए। कैजुअल या फेस्टिव मौकों पर हमें कुछ भी पहनने की छूट होती है, वहीं फॉर्मल ड्रेसिंग के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- फॉर्मल ड्रेसिंग में शर्ट बहुत अहम है। पूरी बाजू की प्लेन कॉटन शर्ट पहनना बेहतर रहता है। सिल्क की शर्ट पार्टी के मौकों पर पहन सकते हैं। सेमी-फॉर्मल मौकों पर सिल्क, कॉटन या वूलन भी पहन सकते हैं। ये फैब्रिक रिच लुक देते हैं, जबकि सिंथेटिक, पॉलिस्टर आदि क्लासी नहीं लगते। स्ट्राइप वाली शर्ट स्पोर्टी लुक देती है, तो डॉट वाला प्रिंट यूथफुल फील देता है। ब्लैक शर्ट फॉर्मल कतई नहीं है।
- पेंट की लंबाई इतनी हो कि नीचे से सॉक्स नजर न आएं। आधे शूज को कवर करनेवाली लंबाई सही है।
- कोट पहन रहे हैं तो उसके नीचे से शर्ट के करीब आधा इंच कफ दिखने चाहिए।
- टाई पहनें। टाई की लंबाई बेल्ट का बकल जहां शुरू होता है, उससे थोड़ा नीचे तक होनी चाहिए। इससे कम या ज्यादा लंबाई वाली टाई न पहनें।
- किसी भी पैंट या ट्राउजर में लूप्स हैं तो बेल्ट जरूर पहनें। फॉर्मल बेल्ट 1.5 इंच से ज्यादा मोटी न हो। बेल्ट का कलर और टेक्स्चर शूज से मैच करता होना चाहिए। आप ब्राउन, ब्लैक या ब्रिगैंडी कलर बेल्ट यूज कर सकते हैं।
- सॉक्स मिड लेंथ वाली होनी चाहिए। वाइट सॉक्स स्पोर्ट्स सॉक्स होती हैं, इसलिए इन्हें ऑफिस में न पहनें। ब्लैक सॉक्स पहन सकते हैं, बल्कि ब्लैक ट्राउजर के साथ ब्लैक कलर के सॉक्स ही पहनना चाहिए। सॉक्स शूज और ट्राउजर से मैचिंग होना चाहिए। सॉक्स साफ हों और उनसे बदबू नहीं आनी चाहिए।
- लेस वाले शूज फॉर्मल होते हैं। इसे लेकर कन्फ्यूज न हों।
- नेहरू जैकेट को भी फॉर्मल ड्रेस के तौर पर पहन सकते हैं। जैकेट में एक, दो या तीन कितने भी बटन हों, बैठते हुए बटन खुले रखें। अगर 3 बटन हैं तो आप ऊपर के दो या एक या फिर बीच वाला बटन बंद रख सकते हैं, लेकिन हर हालात में आखिर वाला बटन खुला रहेगा।
- फॉर्मल ड्रेसिंग में घड़ी भी काफी अहम है। वाइट या ऑफ वाइट डायल की गोल्डन, सिल्वर या लेदर स्ट्रैप वाली घड़ी पहनें। राइटिंग पेन आपके बिजनेस लुक को पूरा करता है।
- सारे मेटल एसेसरीज़ जैसे कि बेल्ट का बकल, घड़ी, कफलिंक्स और पेन मैचिंग यानी एक ही कलर के होने चाहिए।
- ऑफिस में डेनिम तभी पहनना चाहिए, अगर कंपनी पॉलिसी इसकी इजाजत देती हो। अगर डेनिम पहन रहे हैं तो वह स्ट्रेट फिट या लाइट बुक कट होनी चाहिए। टेपर्ड (चिपकी हुई) न पहनें, न ही बैगी (बेहद ढीली-ढाली) पहनें।
महिलाओं के लिए
- अपनी बॉडी शेप और स्किन टोन के मुताबिक कपड़ों का चयन करें। अगर ऑफिस की बात करें तो ड्रेसिंग में अपनी पोजिशन का भी ख्याल रखें, मसलन अगर आप सीनियर हैं तो गर्ल या बॉय लुक वाले कपड़ों से बचें। डार्क कलर से अथॉरिटी झलकती है तो लाइट कलर से आप ज्यादा अप्रोचेबल लगती हैं।
- ध्यान रखें कि ऑफिस या फॉर्मल मौकों पर स्किन शो न करें। जितना ज्यादा स्किन शो होगा, उतनी ही आपकी अथॉरिटी कम होती जाएगी। कपड़े ट्रांसपैरंट न हों और अंदर से इनरवेयर न नजर आएं। ड्रेस बहुत टाइट भी न हो।
- फॉर्मल ड्रेसिंग में शर्ट, ट्राउजर्स या स्कर्ट के अलावा साड़ी को भी दुनिया भर में फॉर्मल ड्रेस के तौर पर स्वीकार किया जाता है। स्कर्ट की लंबाई घुटनों तक होनी चाहिए। इससे लंबी या छोटी स्कर्ट फॉर्मल मौकों के लिए नहीं है। किसी फॉर्मल मौके पर साड़ी भी पहन सकती हैं। लेकिन साड़ी को ढंग से पिन-अप करके पहनें। ऐसे मौकों पर स्किनी या कलरफुल जींस न पहनें।
- फॉर्मल ड्रेस के साथ बैलीज़ या पीप शूज़ पहनें। सैंडल्स या स्लीपऑन्स बिल्कुल न पहनें। शूज में 1-3 इंच की हील हो। लाइट कलर के कपड़ों के साथ लाइट कलर के शूज पहनें और डार्क कलर कपड़ों के साथ डार्क कलर शूज। वाइट सैंडल सिर्फ साड़ी या सूट के साथ सही लगते हैं।
मेकअप और एसेसरीज
- हेयरकट चेहरे की शेप के मुताबिक हो। मसलन लंबे फेस पर ऐसा हेयरकट हो, जो आपके फेस को कम लंबा दिखाए। इसी तरह गोल फेस पर लंबा दिखानेवाला हेयरकट अच्छा लगता है। बहरहाल, स्टाइल या कट जो भी, बाल हमेशा संवरे होने चाहिए। बिखरे और उड़ते बाल खराब लगते हैं। बालों में जेल लगा सकते हैं, पर दिन में तेल लगाकर न रखें। गीले बालों में ऑफिस न जाएं। महिलाएं इस बात का खास ख्याल रखें क्योंकि उनके बाल सूखने में टाइम लगता है।
- पुरुष हमेशा अच्छी तरह शेव बनाकर रखें और महिलाएं आइब्रोज़ और अपर लिप्स को अच्छी तरह थ्रेडिंग कराके रखें। ध्यान रखें, दाढ़ी और मूंछ महिलाओं के लिए नहीं, पुरुषों के लिए हैं।
- जूलरी ऐसी हो जो आपकी पूरी पर्सनैलिटी को हाइलाइट करे, न कि सारा ध्यान उसी पर जाकर टिक जाए, यानी आप क्लासी दिखें, चमक-दमक क्वीन नहीं। हेवी जूलरी के बजाय डायमंड या पर्ल्स या स्टोन्स की हल्की जूलरी पहनें।
- आपके मुंह या शरीर से बदबू नहीं आनी चाहिए। अगर मुंह से बदबू आती है तो डॉक्टर से मिलें और ऐसी चीजें (लहसुन, प्याज, मूली आदि) न खाएं जिन्हें खाने से मुंह से बदबू आती हो। साथ ही, माउथ फ्रेशनर रेग्युलर तौर पर यूज करें।
- परफ्यूम या डियो जरूर लगाएं। डियो कम देर टिकता है, जबकि परफ्यूम लंबे समय तक काम करता है। डियो या परफ्यूम कपड़ों के बजाय शरीर पर लगाना चाहिए और इसके 3 स्प्रे काफी हैं। दिन में हल्की सुगंध और रात के फंक्शन के लिए हेवी परफ्यूम यूज करें। डेली वेयर के तौर पर यूज होनेवाले परफ्यूम 4000-6000 रुपये तक में मिल जाते हैं।
- हल्का मेकअप करें। इसके बिना आपका लुक अधूरा है। मेकअप में पहले सनस्क्रीन, फिर मॉश्चराइजर लगाएं। इसके बाद स्किन से मैचिंग फाउंडेशन लगाएं। अच्छी तरह ब्लेंड (मिलाना) कर लें। मस्कारा लगाएं। ऑफिस में रेड/मरून लिपिस्टिक के बजाय पिंक, पीच जैसे पेस्टल शेड यूज करें। लिपस्टिक खराब नहीं भी हुई है तो भी एक साल से ज्यादा यूज न करें।
- बेहतर है कि नाखून अच्छी तरह शेप में हों और साफ हों। अगर ऑफिस में नेल पेंट लगाना चाहते हैं तो न्यूड या ट्रांसपैरंट्स नेट पेंट लगाना बेहतर है।
- पर्स भी शरीर के साइज के मुताबिक यूज करें तो बेहतर है। यानी अगर आप दुबली-पतली और छोटी हैं तो बहुत बड़े साइज का पर्स अच्छा नहीं लगेगा। इसी तरह लंबी या मोटी महिलाओं पर बहुत छोटा पर्स नहीं फबेगा।
कम्यूनिकेशन
- फोन पर बात करने का भी सलीका है। कभी भी जोर से चिल्ला-चिल्ला कर बात न करें। किसी को भी फोन करें तो पहले अपना नाम, फिर कंपनी का नाम या जिस भी पहचान से वह पहचान बताएं, उसका जिक्र स्माइल के साथ करें। स्माइल के साथ बात करेंगे तो फोन के दूसरी ओर मौजूद शख्स को आपकी आवाज से यह महसूस हो जाएगा, बेशक वह आपको देख न पा रहा हो।
- ऑफिस या सर्वजनिक जगहों पर फोन साइलंट मोड पर हो तो बेहतर है। रिंगटोन का वॉल्यूम कम रखें और धूम-धड़ाके वाले फिल्मी गानों को रिंगटोन बनाने से परहेज करें। किसी के कॉल को 20 सेकंड से ज्यादा होल्ड न करें। अगर बीच में दूसरी कॉल अटेंड करना जरूरी है तो पहले वाली को सॉरी बोलकर काट दें। दूसरी कॉल अटेंड करके पहले वाले शख्स को दोबारा फोन मिलाएं।
- आस-पास लोग हैं तो कोशिश करें कि अपनी मदर टंग में बात न करें। अगर करना ही चाहते हैं तो बाहर जाकर बात करें।
- जब किसी से मिलें तो विजिटिंग कार्ड दोनों हाथों में थामकर सामनेवाली की आंखों में आंखें डालकर दें। इससे आपका कॉन्फिडेंस दिखता है और ऑनर भी। इसी तरह विजिटिंग कार्ड रिसीव भी दोनों हाथों से करना चाहिए। एक बार कार्ड लेकर उस पर निगाह जरूर डालें।
- ऑफिस की ईमेल्स लिखते हुए प्लीज और थैंक्यू यूज करें। शुरुआत डियर से करें। ऑफिशल मेल्स की सब्जेक्ट लाइन शॉर्ट और क्रिस्प होनी चाहिए। ऑफिस के मेल रेड कलर में न लिखें, न ही कैप्स ऑन करके लिखें। नीचे अपना नाम जरूर लिखें।
- अगर किसी इन्विटेशन के नीचे RSVR लिखा है तो इसका मतलब है कि अपनी मौजूदगी या गैर-मौजूदगी को कन्फर्म करें यानी आप प्रोग्राम में आएंगे या नहीं, यह पहले से बता दें।
डाइनिंग
- अगर किसी रेस्तरां में बैठे हैं तो वेटर को बुलाने के लिए उसकी तरफ देखें। एक बार आई कॉन्टैक्ट होने के बाद उस उंगली से इशारा करके बुलाएं। जब वह करीब आ जाए तो नेम प्लेट पर उसका नाम पढ़ें और उसके नाम से बुलाएं। नेम प्लेट नहीं है तो वेटर का नाम पूछें और फिर बुलाएं।
- कटलरी और गिलासों की पहचान कर लें। मसलन कौन-सा स्पून या फोर्क किस काम का है, यह जान लें। मेन कोर्स के लिए बड़े स्पून और फोर्क यूज होते हैं, जबकि स्टार्टर, सलाद और डेजर्ट के लिए छोटे।
- रेड वाइन का गिलास थोड़ा बड़ा और गोल होता है, जबकि वाइट वाइन का पतला और लंबा। सबसे बड़ा गिलास पानी का होता है।
- अगर आप शराब नहीं पीते तो भी गिलास में डालने और सबसे साथ चीयर्स करना चाहिए। इसके बाद बेशक आप न पिएं।
- नैपकिन को खोलकर गोद में बिछा लें। गले में न लगाएं।
- मुंह खोलकर या मुंह से आवाज करके न खाएं। अगर स्पून नीचे गिर गया है तो उसे यूज न करें और न ही खुद उठाएं। खुद सर्व करने या प्लेट समेटने के बजाय यह काम वेटर को करने दें।
- कोई नमक मांगे तो साथ में मिर्च भी दें। दोनों को साथ देना मैनर्स में आता है। रोटी या सब्जी पहले अपने राइट साइज वाले को बढ़ाएं।
- अगर मुंह गंदा हो गया है तो नैपकिन को तिकोना करके पहले और दूसरी उंगली के बीच फंसा लें और उस कोने से मुंह को साफ करें। पूरा चेहरा या नाक कभी नैपकिन से साफ न करें।
- अगर घर में किसी को खाने पर इन्वाइट किया है तो प्लेट्स उठाते वक्त सारी प्लेट्स का बचा खाना एक में डालकर सारे प्लेट्स एक के ऊपर एक रखकर उठाने की कोशिश न करें। एक बार में एक प्लेट उठाएं और अंदर रखकर आएं।
लिफ्ट और एस्क्लेटर
- लिफ्ट में चढ़ते हुए पहले अंदरवालों को बाहर निकलने दें, फिर अंदर जाएं। अंदर जाकर बीच में या आगे की तरफ खड़े न हों, चाहे आपको पहले ही क्यों न उतरना हो। पीछे के कोने में जाएं, दूसरा कोई आए तो उसे दूसरे कोने में जाना चाहिए। इसी तरह चारों कोनों के भरने के बाद बीच की जगह पर लोगों को खड़ा होना चाहिए।
- एस्क्लेटर पर चढ़ने के बाद उसे सीढ़ियों की तरह यूज न करें यानी एक जगह खड़े होने के बाद वहीं खड़े रहें। सीढ़ियों की तरह ऊपर चढ़ते न जाएं। इससे आगे खड़े लोगों को असुविधा होती है। यही करना है तो सीढ़ियां यूज करें।
कुछ और खास बातें
- किसी से भी मिलते हुए अपनी बॉडी लैंग्वेज का ख्याल रखें। आपका अपने शब्दों पर कंट्रोल हो सकता है, बॉडी लैंग्वेज पर नहीं। बॉडी लैंग्वेज बहुत-सी बातों को बिना कहे ही बता देती है। आप किसी से कहना नहीं चाहते कि उसकी वजह से आपके काम में दखल हो रहा है तो पहले आप बार-बार घड़ी देखेंगे। अगर वह नहीं समझा तो फिर आप खड़े हो जाएंगे। फिर दरवाजे की तरफ बढ़ने लगेंगे। इससे आपके बिना बोले भी सामनेवाला समझ जाएगा कि आप लेट हो रहे हैं और अब उसे एंटरटेन नहीं कर सकेंगे। ऐसा करते हुए सामनेवाले को आपकी बॉडी लैंग्वेज से अकड़ूपन या बेरुखी नजर नहीं आनी चाहिए।
- सोशल एटिकेट्स की बात करें तो वहां जेंडर काफी मायने रखता है यानी महिलाओं को तवज्जो या प्राथमिकता देनी चाहिए लेकिन बिजनस एटिकेट्स में सीनियॉरिटी ज्यादा मायने रखती है। वहां जेंडर से कोई सरोकार नहीं होता। जो सीनियर है, उसे ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
- अपने फैमिली वालों या दोस्तों के अलावा किसी के भी साथ कैजुअल नहीं होना चाहिए। एक फुट तक पर्सनल स्पेस होता है। अजनबियों या फॉर्मल रिलेशनशिप वालों के इससे ज्यादा करीब जाने की कोशिश न करें।
- अगर आप किसी गेट से बाहर या अंदर हो रहे हैं और दूसरे लोगों के साथ हैं तो सबसे लिए लिए गेट खोलकर खड़े होने की जरूरत नहीं है। लाइन में जो आगे है, वह दूसरे के लिए खोलेगा, उससे पीछे वाला अपने पीछेवाले के लिए गेट खोलकर रखेगा, जब तक कि वह उसे पकड़ न ले।
- किसी महिला के लिए घर, ऑफिस या कार का दरवाजा खोलना या उसे सीट ऑफर करना भी मैनर्स में आता है। इसके अलावा बुजुर्गों के लिए भी गेट खोलें और सीट ऑफर करें।
- और आखिर में, अगर आप दूसरों से इज्जत चाहते हैं तो आपको उन्हें इज्जत बख्शनी होगी। फिर चाहे, भाषा हो या बॉडी लैंग्वेज... आपको इन पर संयम रखना होगा।पाइए संडे
भूलकर भी नहीं पूछने चाहिए इंटरव्यू में ये सवाल
इंटरव्यू के समय आपको कुछ चीजों का खास ख्याल रखना पड़ता है. जैसे आपने कैसे कपड़े पहने हैं, आप खुद को किस तरह से प्रेजेंट कर रहे हैं, आपका व्यवहार इंटरव्यू के समय कैसा है. इंटरव्यू का मतलब सिर्फ यह नहीं होता कि आप इंटरव्यूअर के सवालों का जवाब ही देते रहें. इंटरव्यूअर अपेक्षा करता है कि आप भी उससे कुछ सवाल पूछे. ऐसा करने से इंटरव्यूअर को लगता है कि नौकरी के लिए आप भी इच्छुक हैं.
लेकिन सवाल पूछते समय आपको कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए. हम आपको बताएंगे ऐसे कुछ सवाल जो भूल कर भी आपको नहीं पूछना चाहिए.
1. क्या शेड्यूल, जॉब डिट्ल्स और सैलरी बदलने की कोई संभावना है?
याद रखिए कि आप वहां नौकरी पाने गए हैं ना कि वहां के पैटर्न को बदलने.
2. अपने इंटरव्यूअर से यह ना पूछे कि आपने क्या किया है ? कहां से किया है ? और क्यों किया है ?
इंटरव्यू्र से निजी सवाल पूछने से बचे.
3. सैलरी कौन से तारीख को मिलती है ?
ऐसा पूछने की सोचिएगा भी मत. यह दिखाता है कि आप सिर्फ सैलरी में इंटरेस्टेड हैं. अगर आप टैलेंटेड हैं तो सैलरी अच्छी मिलेगी ही. पहले इंटरव्यूअर को परख लेने दीजिए कि आपमें कितनी प्रतिभा है. उसके बाद आपको कुछ परेशानी हो तो शांत तरीके से इंटरव्यूअर से बात करें.'
4. इंटरव्यू कैसा रहा ?
इस सवाल को जानने की इच्छा तो आप में बेशक होगी लेकिन इस सवाल को पूछकर आप अपनी नौकरी खतरे में डाल लेते हैं. अच्छा यही होगी कि इस सवाल को गलती से भी नहीं पूछे.
5. छुट्टी कौन से दिन मिलती है?
अगर आप इंटरव्यू देने गए हैं तो इसका मतलब है कि आपको जॉब चाहिए. आपको ऐसा इम्प्रेशन नहीं देना चाहिए कि आपको अभी से ब्रेक की तलाश है. 'कभी ऑफ के बारे में मत पूछिए . इससे लगता है कि आप काम से भागना चाहते हैं. आपको यदि ऑफिस में देर तक रुकना पड़े तो उससे भी हिचकिचाना नहीं चाहिए.'
6. मेरा प्रमोशन कब होगा ?
अभी तक आपको नौकरी भी नहीं मिली, तो आप प्रमोशन की बात कैसे कह सकते हैं.
7. क्या आप मेरी सोशल नेटवर्किंग प्रोफाइल मॉनिटर करेंगे ?
कुछ बातें ना कहने में ही भलाई होती है. हम समझ सकते हैं कि आपको अपनी सोशल सिक्योरिटी की चिंता है लेकिन यह प्रश्न ना पूछना ही ठीक रहेगा.
8. काम करने का समय क्या है ?
अगर आप यह जताना चाहते हैं कि आप काम करने से ज्यादा आराम करना चाहते हैं तो यह सवाल जरूर पूछें. अगर नहीं तो इस सवाल को कुछ समय तक बचा कर रखें.
9. कम्पटीशन कौन है ?
यह दिखाएगा कि आपमें जागरुकता की कमी है और आपने रिसर्च भी नहीं किया है. यह सवाल ना पूछे. अगर पहले रिसर्च नहीं किया है तो बाद में कर लें.
10. कोई सवाल ही ना पूछना...
सवाल ना पूछने की गलती भी ना करें. यह रुचि और समझ की कमी दिखाता है. ऐसा करने से इंटरव्यूअर को ऐसा लग सकता है कि आप किसी भी परिस्थिती से समझौता कर लेंगे.
मजेदार सवाल जवाब - एक सीख देती मजेदार और रोचक इंटरव्यू
हम जिंदगी में सफलता पाने के लिए कई बार वो करते हैं जो हम सही ढंग से नहीं कर सकते। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम “दुनिया क्या कहेगी?” इस बारे में सोचते हुए जिंदगी निकाल देते हैं। लेकिन इसके स्थान पर अगर हम वो काम करें जो हम कर सकते हैं तो हम जल्द ही सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस सोच से भी आगे की सोच को जाहिर करता हुआ एक मजेदार सवाल जवाब इंटरव्यू हम आपके लिए लेकर आये हैं। आइये आनंद लेते हैं इस मजेदार सवाल जवाब का :-
मजेदार सवाल जवाब - एक रोचक इंटरव्यू
इंटरव्यूवर :- अपने बारे में बताएं।
कैंडिडेट :- मैं रामेश्वर कुलकर्णी हूँ। मैंने बबनराव ढोले पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से टेलीकम्यूनिकेशन में इंजीनियरिंग की है।
इंटरव्यूवर :- बबनराव ढोले पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी? मैंने इस कॉलेज का नाम पहले कभी नहीं सुना!
कैंडिडेट :- पता था मुझे सर! आप ऐसा बोलोगे, मैंने खुद एडमिशन लेने से पहले इस कॉलेज के बारे में कभी नहीं सुना था।
हुआ क्या कि – वर्ल्ड कप होने की वजह से बारहवीं में मेरे नंबर कम आये। मुझे एक कॉलेज में पैसे देकर सीट मिल रही थी। पर मेरे पिता जी ने कहा ( मैं उन्हें “बाप” कहना पसंद करता हूँ ) :-
“मैं तुम्हारी पढ़ाई पर ज्यादा पैसे नहीं लगा सकता।“ (बाप ने असल में कहा था कि :- मैं तुम्हारे ऊपर पैसे बर्बाद नहीं करूँगा) इसलिए मुझे ये कॉलेज ज्वाइन करना पड़ा। साफ़ बताऊँ तो मुझे लगता है कि बबनराव ढोले पाटिल नाम क्षेत्रीय महाविद्यालय से सम्बंधित हो सकता है।
टरव्यूवर :- ठीक है, ठीक है। ऐसा लगता है कि इंजीनियरिंग खत्म करने में ही आपको 6 साल लग गए।
कैंडिडेट :- बात ऐसी है कि मैंने इसे 4 साल में ख़त्म करने की कोशिश की थी। पर क्या बताऊँ , ये क्रिकेट मैच, फुटबॉल वर्ल्ड कप और टेनिस टूर्नामेंट। एकाग्रता बनानी कितनी मुश्किल है सर। इसी वजह से तो मैं दूसरे और तीसरे साल में फेल हो गया। ऐसे मुझे कुल मिलाकर 4+2= 7 साल लग गए।
इंटरव्यूवर :- लेकिन 4+2 तो 6 होते हैं।
कैंडिडेट :- ऐसा क्या ? आप जानते हैं मैं हमेशा मैथ में गलती कर देता हूँ । लेकिन मैं इसे दिमाग में रखने की कोशिश करूँगा। 4+2 = 6 होता है, सही है, धन्यवाद। ये क्रिकेट मैच परीक्षाओं पर बहुत प्रभाव डालते हैं…..मेरे ख्याल से इन पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
इंटरव्यूवर :- जानकर अच्छा लगा, आप चाहते हैं कि क्रिकेट मैच पर प्रतिबंध लगना चाहिए।
कैंडिडेट :- नहीं, नहीं….मैं तो परीक्षाओं की बात कर रहा हूँ !!
इंटरव्यूवर:- ठीक है, जिंदगी में आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है ?
कैंडिडेट :- जाहिर सी बात है, मेरा इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करना। मेरी माँ ने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं इसे पूरा कर सकूँगा। जब मैं तीसरे साल फेल हुआ था, माँ कुछ रिश्तेदारों की मदद से BEST ( Bus corporation in Maharashtra ) में मेरे लिए नौकरी तलाश रही थीं।
इंटरव्यूवर:- क्या आपका उच्च शिक्षा प्राप्त करने का कोई विचार है।
कैंडिडेट :- हाहाहाहा…… क्या आप मजाक कर रहे हैं ? “निम्न” (Lower) स्तर की शिक्षा प्राप्त करना ही काफी दुखदायक रहा मेरे लिए।
इंटरव्यूवर:- चलो अब टेक्निकल बातें करते हैं। आप ने किस प्लेटफॉर्म(Level) पर काम किया है ?
कैंडिडेट :- ह्म्म्म्म, मैं SEEPZ में काम करता हूँ, इसलिए आप कह सकते हैं की इस समय मैं अँधेरी प्लेटफॉर्म(rly.stn.) पर काम कर रहा हूँ। पहले मैं वाशी सेंटर पर था। इसलिए तब वाशी मेरा प्लेटफार्म था। जैसा कि आप देख सकते हैं की मुझे अलग-अलग प्लेटफार्म का अनुभव है! (वाशी और अँधेरी मुंबई में जगहों के नाम हैं)
इंटरव्यूवर:- और आप कौन सी भाषा(comp. Language) इस्तेमाल करते थे ?
कैंडिडेट :- मराठी हिंदी, अंग्रेजी। वैसे मैं जर्मनी, फ्रेंच, रुसी और भी कई भाषाओ में चुप रह सकता हूँ।
इंटरव्यूवर:- VB से VC बेहतर क्यों है ??
कैंडिडेट :- ये तो कॉमन सेन्स की बात है सर :- C हमेशा B के बाद आता है। इसलिए VB से VC बड़ा है। मैंने सुना है की जल्दी ही एक नई भाषा VD भी आ रही है।
इंटरव्यूवर:- क्या आप असेम्बली लैंग्वेज(Assembly Language) के बारे में कुछ जानते हैं ?
कैंडिडेट :- मैंने इसके बारे में सुना तो नहीं है। लेकिन जहाँ तक मेरा अंदाजा है ये वो लैंग्वेज है जो हमारे MP और MLA असेम्बली में प्रयोग करते हैं।
इंटरव्यूवर:- आपका जनरल प्रोजेक्ट का क्या अनुभव है ?
कैंडिडेट :- प्रोजेक्ट के बारे में मेरा अनुभव इतना है कि :- ज्यादातर वो पाइपलाइन में ही मिलते हैं।
इंटरव्यूवर:- क्या आप अपनी मौजूदा नौकरी के बारे में बता सकते हैं ?
कैंडिडेट :- जरूर, इस समय मैं बाटा इन्फो टेक(BIL – Bata info tech) में काम कर रहा हूँ। BIL ज्वाइन करते समय मैं बेंच(Bench) पर था। BIL ज्वाइन करने से पहले मुझे लगा था की बेंच(Bench) Windows की तरह कोई दूसरा सॉफ्टवेयर है।
इंटरव्यूवर:- क्या तुम्हारे पास कोई प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का अनुभव है ?
कैंडिडेट :- नहीं, पर मुझे लगता है की ये ज्यादा मुश्किल नहीं होना चाहिए। मुझे Word और Excel आता है। मैं बहुत सी बातें कर सकता हूँ। मैं जानता हूँ की इंटरनेशनल फ़ोन कॉल कैसे करते हैं और स्पीकर कैसे इस्तेमाल करते हैं। और सबसे जरूरी बात मुझे कुछ शब्द ऐसे आते हैं जैसे - ‘Showstoppers ‘ , ‘hot fixes’, ‘SEI-CMM’, ‘quality’, ‘version control’, ‘deadlines’ , ‘Customer Satisfaction’ आदि। और मैं बहुत होशियारी से अपनी गलतियों के लिए दूसरों पर इल्जाम लगा सकता हूँ।
इंटरव्यूवर:- आपको हमारी कंपनी से क्या उम्मीदें हैं ?
कैंडिडेट :- ज्यादा कुछ नहीं
1. मुझे 40,000 मेरे हाथ में मिलने चाहिए।
2. मैं एक Live EJB प्रोजेक्ट पर काम करना चाहूँगा। लेकिन इसकी कोई समय सीमा नहीं होगी। मुझे लगता है कि इस तरह का दबाव टैलेंट पर गलत प्रभाव डालता है।
3. मैं समय के बदलाव में विश्वास रखता हूँ।
4. ड्रैस कोड मौलिक आज़ादी( basic freedom) के खिलाफ है इसलिए मै जीन्स और टी-शर्ट पहन कर आऊंगा।
5. शनिवार और रविवार को छुट्टी होनी चाहिए। मैं बुधवार को भी छुट्टी करने की सलाह दूंगा, ताकि ज्यादा काम करने से किसी को परेशानी ना हो जाये।
6. मैं साल में 3 बार 1-2 महीने के लिए काम के सिलसिले में विदेश जाना चाहूँगा। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जाने का मौका मिले तो और अच्छा होगा। लेकिन अगर देखा जाये तो चीन में ओलंपिक गेम्स होने वाले हैं। अगर आप मुझे उस दौरान वहां भेजेंगे तो मुझे कोई परेशानी नहीं है।
अब आप देख ही चुके हैं की मैं कितना संकोची हूँ और मुझे कुछ ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं। तो क्या मैं अपनी सिलेक्शन पक्की समझूँ।
इंटरव्यूवर:- हाहाहाहाहा….. हमारी कंपनी में दिलचस्पी दिखने के लिए धन्यवाद। आज तक मुझे कभी इतना मजा नहीं आया। INFOSYS में आपका स्वागत है।
उस आदमी को HRD of Infosys में नए बने सेक्शन “Stress management” में नौकरी दे दी गयी।
इंटरव्यू में सफल होने के लिए ऐसे करें तैयारी अवश्य मिलेगी सफलता
कर्इ लोग इंटरव्यू में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब नहीं हो पाते है, इस वजह से उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ता है। वहीं कई लोग इसके लिए अपनी तैयारी पूरी नहीं कर पाते हैं, और वे नौकरी से वंचित रह जाते हैं। लेकिन अगर आप इंटरव्यू के लिए जाने से पहले इन बातों का ध्यान रखेंगे तो अवश्य आप नौकरी पाने में कामयाब रहेंगे। ताे आइए जाने कैसे आप लाेग आसान तरीेके से इंटरव्यू में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
इंटरव्यू के लिए जाने से पूर्व कंपनी की वेबसाइट को अच्छी तरह से देखें। हो सकता हो आपको इंटरव्यू में कुछ ऐसी जानकारी काम आ जाए, जो कंपनी की बेसिक जानकारियों में से एक हो।
मौजूदा समय में अधिकतर कंपनियां लिंक्डइन प्रोफाइल का सहारा लेती है। इसके माध्यम से आप कंपनी से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
कंपनी की वेबसाइट और लिंक्डइन प्रोफाइल के अलावा आप सोशल मीडिया के माध्यम से भी कंपनी से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जैसे- फेसबुक, ट्विटर आदि।
यदि आप किसी कंपनी में इंटरव्यू के लिए जा रहे हैं, और आपका कोई परिचित वहां काम करता हो तो आप उनसे भी कंपनी के वातावरण और बैकग्राउंड सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इंटरव्यू में किसी भी कंपनी की प्राेफाइल का ध्यान हाेना अति आवश्यक है।
नौकरी क्यों मिलनी चाहिए का दें सही जवाब
अक्सर इंटरव्यू में यह सवाल पूछा जाता है कि आखिर आपको यह नौकरी क्यों मिलनी चाहिए... और इसका मतलब स्पष्ट है कि मैनेजमेंट आपसे दो बातें जानना चाहता है कि आप में दूसरों के मुकाबले क्या खास बात है तथा आप उनके संस्थान में क्यों आना चाहते हैं। यह सवाल सिर्फ आपसे ही नहीं पूछा जाता है, बल्कि आपके साथ इंटरव्यू के लिए आने वाले सभी उम्मीदवारों से पूछा जाता है और जिसका जवाब सबसे बेहतर होता है उसकी नौकरी पाने की संभावना भी बढ़ जाती है।
इस बात को जान लें कि किसी भी व्यक्ति को कंपनी में शामिल करते हुए एच.आर. मैनेजर बेहतर व्यक्ति के चयन को ले कर बहुत ज्यादा सतर्क होता है। ऐसे में यदि आप अपने बारे में ठीक से बताने में सफल होते हैं तो ही अपने लिए संभावना पैदा कर पाते
हैं। यह इतना साधारण सवाल भी नहीं है, जिसका आप कुछ भी जवाब दे देंगे, बल्कि इस सवाल का जवाब यदि बेहतर ढंग से दिया जाए,तो आप जॉब इंटरव्यू में सिलैक्ट हो सकते हैं।
1.पहचानें कि वे क्या चाहते हैं
किसी भी नई कंपनी में नौकरी के लिए अप्लाई करते हुए आपकी पहली कोशिश यही होनी चाहिए कि आप यह जान लें कि आपसे किस जिम्मेदारी को निभाने की उम्मीद की जा रही है। यदि आप उनके दिए ब्यौरे को ध्यान से पढेंगे तो जान जाएंगे कि उनकी मांग क्या है और उसके अनुरूप अपनी क्षमताओं को उनके सामने रख सकते हैं। अपने पद के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी के बाद उस कंपनी के बारे में भी आपकी जानकारी पुख्ता होनी चाहिए। कंपनी मार्किट में किस तरह की प्रतिष्ठा रखती है, यह तो हर कोई पता करता है, परंतु आपको जानना चाहिए कि उसके सामने चुनौतियां क्या हैं।
2. अपनी जरूरत न बताएं
नौकरी पाने की कोशिश करते हुए कभी भी मैनेजमेंट से यह न कहें कि आप ऊंचे पैकेज या घर के पास होने के कारण यह कंपनी ज्वाइन कर रहे हैं। ऐसे में नई जिम्मेदारी आपकी प्राथमिकता नजर नहीं आती है, तब लगता है कि आप अधिक सुविधाजनक जीवन की तलाश में इस नई नौकरी में आ रहे हैं और चुनौती उठाने से बचना चाहते हैं। याद रहे कि आप नौकरी मांग रहे हैं और इसलिए आपको यह बताना चाहिए कि आपके इस कंपनी में आने से क्या बदलाव आएगा और आप किस तरह अपनी तरफ से नई चीजें जोड़ेंगे। यह बताने की कोशिश करें कि आप कंपनी के लिए ज्यादा फायदेमंद होंगे।
3. खूबियों का जिक्र
इंटरव्यू के दौरान यह बताएं कि आपने अपनी पिछली कंपनी में किस तरह का प्रदर्शन किया है और वहां किन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के साथ आप जुड़े रहे हैं और नई कंपनी के लिए किस तरह महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। उन्हें बताएं कि किस तरह आप चीजों को आगे ले जाने में यकीन रखते हैं, जब आप इस तरह खुद को उनके सामने प्रस्तुत करेंगे तो आपके चयन की संभावना बढ़ जाएगी।
4. अपना उत्साह दिखाएं
इंटरव्यू में गुपचुप रहने की अपेक्षा अपना उत्साह दिखाएं कि आप इस नई कंपनी में आने के लिए उत्सुक हैं और उत्साहित भी आपकी डिग्रियों से भी ज्यादा आपकी बातचीत ही आपके चयन का मुख्य आधार बनेगी। कंपनी आपको क्यों चुनें, इस प्रश्न का उत्तर देते हुए आपका उत्साह भी झलकना चाहिए।
5. सीधे तुलना न करें
बहुत सारे उम्मीदवार इस सवाल के जवाब में अपनी तुलना दूसरे उम्मीदवारों से करने लगते हैं, जब आप दूसरे उम्मीदवारों कोजानते भी नहीं हैं, तो उनके मुकाबले खुद को स्मार्ट और भरोसेमंद बताना जंचता नहीं है। इसकी अपेक्षा आप उनसे यह कह सकते हैं कि आप अपना काम बहुत ईमानदारीऔर यकीन के साथ करते हैं। दूसरों के मुकाबले खुद को खड़ा मत करें, सिर्फ अपनी खूबियों पर ही ध्यान दें।
6.घिसे-पिटे शब्दों से बचें
जब भी आप यह कहते हैं कि आपको नौकरी इसलिए मिलनी चाहिए, क्योंकि आप कड़ी मेहनत करते हैं या भरोसेमंद हैं या फिर टीम में अच्छी तरह काम करना जानते हैं तो याद रखें कि यह बात तो कोई भी कह सकता है। आप उन्हें कुछ रोचक आइडियाज दें।
संक्षेप में रखें बात
जब भी आपसे यह सवाल होगा कि कंपनी आपको क्यों रखे, तो आप अनुभव, योग्यता, खूबियों,ट्रेनिंग और शिक्षा के बारे में बताएंगे। इन सभी के बारे में आप संक्षेप में अपनी बात रखें, परंतु इन चीजों के बारे में तो सभी उम्मीदवार बताएंगे तो यह सोच कर रखें कि आप इस सवाल के जवाब में क्या अलग जवाब दे सकते हैं। आपमें ऐसी क्या बात है जो आपको दूसरों के मुकाबले अलग खड़ा करती है। याद रहे कि जो पूछा गया है जानकारी उसी पर फोकस रखें। यदि आप इधर-उधर ले जाने की कोशिश करेंगे तो यह आपके खिलाफ जाएगा।
नौकरी लेते समय न दें झूठी जानकारी
जल्द नौकरी हासिल करने या अत्यधिक महत्वाकांक्षा के चलते उम्मीदवार नौकरी मांगने के दौरान कई बार योग्यता संबंधी ऐसी जानकारी दे देते हैं, जो उनके पास होती ही नहीं। हकीकत सामने आने पर वे जॉब से तो वंचित हो ही जाते हैं, उनके आगे की राह भी कठिन हो जाती है। इसी मुद्दे पर संजीव चन्द की रिपोर्ट
शाइन डॉट कॉम के एक सर्वे के अनुसार वर्तमान समय में ज्यादातर संस्थान अपने कर्मचारियों द्वारा दिए जाने वाले शिक्षा संबंधी प्रमाण-पत्रों में गड़बड़ियों की समस्या से जूझ रहे हैं। एक कंपनी छोड़ दूसरी ज्वाइन करने पर दोनों में दी गई जानकारी में भी काफी अंतर देखने को मिल रहा है। यह सही है कि कंपनियां जॉब देते समय उम्मीदवार के पिछले तीन-चार साल का अनुभव, शैक्षिक योग्यता और अंतिम 4-5 साल का पता खंगालती हैं, लेकिन ज्यादातर कंपनियां सीनियर पद पर किसी को ज्वाइन कराते वक्त लचीला रुख अपनाती हैं। वे उम्मीदवार के प्रोफाइल व पैकेज को ही आधार बनाती हैं। सर्वे बताते हैं कि भारत ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन और अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी ऐसे उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा है, जो बायोडाटा में अपनी उपलब्धियों, अनुभव और शैक्षिक योग्यताओं के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर लिखते हैं। बाद में वेरिफिकेशन के दौरान उनकी गलतियां उजागर होती हैं। इन नेगेटिव वेरिफिकेशन रिपोर्ट से न सिर्फ उनकी नौकरी जाती है, बल्कि इंडस्ट्री में उनकी प्रतिष्ठा भी धूमिल होती है।
झूठ ने मुश्किल किए हालात
ग्लोबलाइजेशन और जॉब मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते हर कंपनी चाहती है कि वह कुशल व प्रतिभाशाली कर्मचारियों को नियुक्त करे। देश में जितनी ज्यादा नौकरियां हैं, उससे कई गुना ज्यादा नौकरी ढूंढ़ने वाले लोग। हर साल देश में लगभग 23 लाख ग्रेजुएट पैदा होते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर को उनकी पढ़ाई और स्किल्स के मुताबिक नौकरी नहीं मिल पाती।
एचआर कंसल्टिंग मैन पावर की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय कंपनियों में 61 प्रतिशत पद खाली हैं। सबसे ज्यादा अवसर सेल्स, आईटी, अकाउंटिंग, फाइनेंस व ऑफिस सपोर्ट जैसे सेक्टरों में मौजूद हैं। इनमें सही टैलेंट नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि आवेदन के समय उम्मीदवार अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ा कर लिख रहे हैं या झूठी सूचनाएं दे रहे हैं।
रेज्यूमे में दें सही जानकारी
एक अच्छी नौकरी पाने की तलाश में जुटे उम्मीदवार कई बार अपने रेज्यूमे में भ्रामक सूचनाएं दे जाते हैं। इसके चलते उन्हें शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ता है। इसलिए यदि आप किसी नई नौकरी के लिए रेज्यूमे देने जा रहे हैं तो अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों और उपलब्धियों के बारे में बताने से पहले विशेष सावधानी बरतें। जॉब की जरूरत के हिसाब से अपनी स्किल्स मैच कराएं। एक-एक बिन्दु का स्पष्ट उल्लेख करें, दूसरों का सीवी कॉपी करने से पहले बचें।
कानूनी कार्रवाई का खतरा
32 वर्षीय रोहन (बदला नाम) पर फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर शिक्षक की नौकरी करते समय पकड़े जाने पर नौकरी से बर्खास्तगी और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस से बचने के लिए आजकल वह फरार है। यह एक उदाहरण भर हो सकता है, पर रोहन जैसे असंख्य लोग इस तरह का फर्जीवाड़ा करते हैं। रेज्यूमे में गलत जानकारी देकर अच्छी नौकरी तो हासिल की जा सकती है, लेकिन पकड़े जाने पर नौकरी जाने के साथ-साथ कार्रवाई का खतरा मंडराता रहता है।
गलती आपकी, नुकसान कंपनी का
गलत सूचना देकर नौकरी हासिल करने वाले कर्मचारियों की मंशा कंपनी को नुकसान पहुंचाने की बेशक न हो, लेकिन वह उसकी कार्यनीति और परंपरा को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है। गलत सूचना देकर नौकरी हासिल करने पर कंपनी को अपने प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले अयोग्य प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग में पैसा लगाना पड़ता है। इससे उनको भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कंपनी की सुरक्षा की दृष्टि से घातक
अपने बारे में गलत सूचना देने वाले किसी भी ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदार पद पर बैठाना कंपनी की सुरक्षा की दृष्टि से घातक हो सकता है। चूंकि कंपनियों को गोपनीय सूचनाएं या डेटा लीक होने का खतरा रहता है, इसलिए ज्यादातर कंपनियां किसी व्यक्ति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से पहले उसकी पूरी छानबीन कराती हैं। कोई कंपनी कभी नहीं चाहती कि ऐसे लोगों को अपने यहां जॉब दे, जिनकी बुनियाद ही झूठ के सहारे रखी गई हो।
हो रही है ऑनलाइन मॉनीटरिंग
आजकल कई ऐसे एप प्रचलन में हैं, जिनके जरिये उम्मीदवार अपनी योग्यता, अनुभव व अन्य विवरण ऑनलाइन भेज सकते हैं। इसके लिए आवेदनकर्ता और नियोक्ता दोनों का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। इस आईडी नंबर के जरिये वे उम्मीदवार का पूरा वेरिफिकेशन कर सकते हैं। यह एप जल्द ही सोशल मीडिया ‘डिजिटल टैलेंट पूल’ के जरिये लोगों को नौकरी पर रखे जाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका अदा करेंगे। कंपनियां भी एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं, जो सीवी का विश्लेषण करता है।
बेरोजगारी से पनप रही समस्या
एक सर्वे के मुताबिक भारत में जितनी नौकरियां पैदा हो रही हैं, उनमें से करीब 90 प्रतिशत के लिए खास स्किल्स की जरूरत पड़ती है। इसकी ट्रेनिंग स्कूल-कॉलेज अथवा इंस्टीट्यूट में नहीं मिल पा रही, लिहाजा बड़ी आबादी बेरोजगारी का दंश झेल रही है। जल्दी नौकरी पाने की चाहत में उम्मीदवार कई बार झूठी सूचनाएं देकर नौकरी हासिल करने की कोशिश करते हैं या अपने नकारात्मक पहलुओं को छिपाने का प्रयास करते हैं।
इन रूपों में होती है हेराफेरी
क्वालिफिकेशन
उम्मीदवार आवेदन के दौरान कई बार ऐसी शैक्षिक योग्यता का जिक्र कर बैठते हैं, जो उनके पास होती ही नहीं या गलत तरीके से हासिल की गई होती है। ज्यादातर संस्थानों में आवेदन के दौरान ऐसा देखने को मिलता है। बैकग्राउंड चेकिंग फम्र्स के जरिये ऐसे फ्रॉड को पकड़ा जाता है।
फर्जी डिग्री
देश में कई ऐसे संस्थान चल रहे हैं, जिनकी मान्यता नहीं है या उनके कोर्स को संबंधित अथॉरिटी से मान्यता प्राप्त नहीं है। वहां की डिग्री फर्जी डिग्री की श्रेणी में आती है। कई बार अज्ञानता में तो कई बार जान-बूझ कर उम्मीदवार इन डिग्रियों का इस्तेमाल करते हैं।
सेलरी पैकेज
एक कंपनी से दूसरी कंपनी ज्वाइन करने पर सबसे अहम फैक्टर सैलरी पैकेज होता है। मोटा पैकेज पाने की चाहत में उम्मीदवार या तो अपनी स्लिप से छेड़छाड़ करते हैं या फर्जी सेलरी स्लिप बनवाते हैं। एचआर डिपार्टमेंट की छानबीन में इस तरह के मामले पकड़ में आ जाते हैं।
एक्सपीरिएंस
उम्मीदवार एक्सपीरिएंस सर्टिफिकेट के रूप में अकसर किसी ऐसे संस्थान से 2-3 साल का अनुभव दर्शाते हैं, जो वर्तमान में बंद हो चुका होता है या उसकी पुष्टि नहीं हो पाती। कई बार वे अनुभव के साल बढ़ा-चढ़ा कर दिखाते हैं। वे मान कर चलते हैं कि उनका खेल पकड़ में नहीं आएगा, पर वेरिफिकेशन में इस खेल से पर्दा उठ जाता है।
मैरिटल स्टेटस
सैन्य अथवा कई ऐसे सेवा क्षेत्र हैं, जिनमें अविवाहित उम्मीदवारों से आवेदन मांगा जाता है। ऐसे नौकरी के लिए विवाहित उम्मीदवार अकसर अपनी पहचान छुपा लेते हैं। इस आधार पर वे कई साल नौकरी भी कर लेते हैं। बैकग्राउंड अथवा एड्रेस वेरिफिकेशन में इसका पता चलता है।
क्रिमिनल रिकॉर्ड
उम्मीदवारों पर नौकरी के लिए आवेदन देने से पूर्व यदि कोई आपराधिक मामला दर्ज हुआ है तो वे आवेदन में इसका उल्लेख नहीं करते। इस तरह की प्रवृत्ति वाले उम्मीदवारों को कोई भी अपने यहां नहीं रखना चाहता। हेल्थकेयर व फाइनेंशियल कंपनियां ऐसी पृष्ठभूमि की जांच करवाती हैं।
जल्द नौकरी पाने के लिए Resume बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
हम में से कई सारे एेसे लोग होते है जो अपनी मौजूदा नौकरी से परेशान रहते है। कई बार उन्हें बॉस या काम को लेकर कई सारी समस्या होती है, लेकिन ज्यादातर लोगों के नई नौकरी तलाश करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस वजह से भी ज्यादातर लोग नौकरी नहीं छोड़ नहीं पाते। एेसे में अगर आप भी अपनी मौजूदा नौकरी से परेशानी है और जॉब स्विच करने की सोच रहे है तो आइए जानते है कुछ एेसे टिप्स के बारे में जिन्हें फॉलो करके आप आसानी से नौकरी पा सकते है
नेटवर्किंग
दूसरी नौकरी पाने में जो चीज सबसे ज्यादा आपके काम आती है, वो है 'नेवर्किंग'. फील्ड में रह कर बनाए गए कॉन्टैक्ट्स जॉब चेंज करने में काफी मदद करते हैं। किस कंपनी में जॉब वैकेंसी और किसमें नहीं ये आपके कॉन्टैक्ट्स ही आपको बताते हैं. इसलिए भले ही आप ऊंचे से ऊंचे मुकाम तक क्यों न पहुंच जाएं, कभी भी लोगों से अपना संपर्क न तोड़ें।
इवेंट्स अटेंड करें
नई नौकरी पाने के लिए आपको अलग-अलग संस्थानों या फिर चैरिटी द्वारा आयोजित किए गए इवेंट्स में शामिल होना चाहिए। आपको इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए और हर मीटिंग में अपनी फील्ड से जुड़े कम से कम एक व्यक्ति से जरूर मिलना चाहिए। क्या पता कब कौन जॉब दिलाने में आपकी मदद कर दे
लिंक्डइन का उठाएं फायदा
लिंक्डइन पर अकाउंट बनाने का फायदा आपको आपकी मनपसंदीदा जॉब भी दिला सकता है। लिंक्डइन सही लोगों से जुड़ने का एक पावरफुल माध्यम है। यहां पर आप अपने टारगेट मार्केट (जिसमें आप नौकरी ढूंढ रहे हों) को सर्च कर सकते हैं। लिंक्डइन के हर एक सेक्शन में अगर आप सही जानकारी फिल करते हैं और अपनी सर्च में सही कीवर्ड्स का इस्तेमाल करते हैं तो इससे दूसरों को आपके बारे में बेहतर पता चल पाता है।
जॉब साइट्स पर बनाए रखें नजर
नई जॉब तलाश रहे लोगों को लिंकडिन या फिर किसी और अॉनलाइन जैसे जॉब पोर्टल्स पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए। साथ ही आपको समय-समय पर अपना सीवी भी अपडेट करते रहना चाहिए। इसके अलावा जॉब से जुड़े ई-मेल्स पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए। इससे नौकरी पाने में आपको आसानी होगी।
इंटरव्यू में पूछे जाने वाले ये 10 सबसे कठिन सवाल, ऐसे दें इनका जवाब...
आज के दौर में किसी जॉब के लिए लिखित परीक्षा से ज्यादा कठिन इंटरव्यू पास करना होता है। सरकारी विभाग हो या निजी क्षेत्र आज हर जगह इंटव्यू के बगैर कैंडिटेट को हायर किए जाना संभव नही होता है। खासकर बिजनेस के क्षेत्र में, क्योंकि इंटरव्यू के जरिए कैंडिटेड की कैपेसिटी से लेकर उससे जुड़ी बातों का आकलन कर लिया जाता है। इस दौरान चयनकर्ताओं के सवालों के जवाब में ही कैंडिटेड की एक सही तस्वीर सामने आ जाती है। जिससे कई बार लोग लास्ट में होने वाले इन इंटरव्यू के सवालों से एक अच्छी जॉब से हाथ धो बैठते हैं। सबसे खास बात तो यह है कि इस दौरान कुछ सवाल तो ऐसे हैं जो काफी सरल होते हैं और लगभग हर इंटरव्यू में पूछे जाते हैं, लेकिन इनका जवाब कठिन होता है। ऐसे में आइए जानें इंटरव्यू में पूछे जाने वाले ये 10 सवाल...
*दुनिया के मशहूर इंटरव्यूवर जेम्स रीड कहते हैं कि अक्सर निजी कंपनियां इंटरव्यू में दिमाग चेक करने से के लिए कैंडिडेट से यह सवाल जरूर पूछती हैं कि लंदन में कितनी ट्रैफिक लाइट्स हैं ? इसका मतलब होता है कि आप दुनिया दारी की चीजों से मतलब रखत हैं या फिर सीमित रहते हैं।
*ली बिगिंस की फाउंडर सीवी लाइबरी कहती हैं कि कैंडिडेट की रिलीवेंसी चेक करने के लिए यह पूछा जाता है कि आप बैटमैन और सुपरमैन के अंतर को कैसे पहचानेंगे ? आपको जितना पता है उसी के आधार पर जवाब दे बिना गुमराह करे।
*पेनी दे वाक का कहना है कि कैंडिडेट कितना क्रिएटिव है। ये चेक करने के लिए एक कागज का टुकड़ा देकर पूछ जाता है कि इस पेपर के टुकड़े का क्या कर सकते है ? इस दौरान आप जिस कंपनी में जिस काम के लिए अप्लाई कर रह हैं उसी को ध्यान में रखकर जवाब दें।
*करियर राइटर पौल मैकेजिन कुमिंस के मुताबिक कैंडिटेट कैसा जवाब दे सकता है। इसे चेक करने के लिए कई बार यह पूछा जाता है कि अगर आपको पेंसिल के आकार में किसी एक ब्लेंडर में डाल दिया जाए तो आप से बाहर निकलने की कोशिश करेंगे? इन सवालों में काफी सोच समझकर जवाब देने की जरूरत होती है।
*जेम्स रीड का कहना है कि यह सवाल भी अक्सर पूछा जाता है कि आपके दिमाग का रंग कैसा है ? यह सवाल कैंडिडेट का मूड चेक करने के लिए पूछा जाता है। इस दौरान बिना घबडा़ए और कुछ ज्यादा सोचे बगैर किसी अपने फेवरेट कलर का नाम ले लें।
*आप गार्डेन गेम्स के बारे में क्या सोचते हैं? यह सवाल कैंडिडेट कंपनी की ग्रोथ में किस तरह की भूमिका निभा सकता है यह जानने के लिए पूछा जाता है। ऐसे में कैंडिडेट को नर्वस होने की बजाय काफी पॉजिटिव वे जवाब देना चाहिए।
*कैंडिडेट की मेमोरी चेक करने लिए अक्सर यह पूछा जाता है कि क्या आप 7 बौनों के नाम बता सकते हैं?ऐसे में अगर आपकों इन 7 बौनों के नाम नहीें याद हैं तो आप उन्हें गलत बताने या टाइम वेस्ट करने की बजाय बता दीजिए की इनके नाम काफी लंबे थे। इसलिए आप भूल गए हैं।
*अगर आप किसी क्रिएटिव डिजाइन आदि के लिए अप्लाई कर रहे हैं तो अक्सर ही आपकी क्रिएटिविटी चेक करने के लिए पूछा जाता है कि आप कौन सा फल बनना चाहोगे ? इसके जवाब में आपको यह जाहिर करना होगा कि आपने यह फील्ड क्यों चुनी है।
*अगर आपकी जिंदगी की खबर बने तो आप उसकी हेड लाइन क्या देना चाहोगे ? यह भी एक अहम सवाल है। इसके पीछे आपकी पर्सनालिटी औक्र एटीट्यूड को आपके ही शब्दों को जानने का मकसद होता है। ऐसे में साफ है कि अपनी पर्सनालिटी के मुताबिक जवाब दे।
*कई बार यह भी कह दिया जाता है कि आप कोई एक स्टोरी सुनाए..इस दौरान आपके दिमाग में कई सारी स्टोरी घूमने लगती हैं। ऐसें में आप इस जगह पर अपने प्रोफेशन, करियर, लक्ष्य को देखते हुए बिना ज्यादा सोचे स्टोरी नरेट करें। कोई कॉमिक या डाकू मवाली वाली स्टोरी कतई न सुनाएं।
