ITI Directory
इलेक्ट्रीशियन आईटीआई करने के फायदे
भारत में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसमें कई ट्रेड्स होते हैं, लेकिन इलेक्ट्रीशियन ट्रेड सबसे अधिक लोकप्रिय और करियर-उन्मुख ट्रेड्स में से एक माना जाता है। यह ट्रेड विद्यार्थियों को न केवल तकनीकी जानकारी देता है, बल्कि उन्हें व्यावसायिक रूप से सक्षम भी बनाता है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि इलेक्ट्रीशियन ट्रेड से आईटीआई करने के क्या-क्या लाभ हैं और यह कैसे एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।
1. जल्दी नौकरी मिलने की संभावनाइलेक्ट्रीशियन ट्रेड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोर्स पूरा करने के तुरंत बाद रोजगार के अवसर मिलने लगते हैं। इस ट्रेड में कुशल श्रमिकों की हमेशा मांग बनी रहती है, चाहे वह सरकारी क्षेत्र हो या निजी। कई बार ITI पूरा करते ही कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से छात्र को नौकरी मिल जाती है।
2. अच्छी सैलरी की संभावनाएँइलेक्ट्रीशियन ट्रेड से जुड़े प्रोफेशनल्स को अन्य ट्रेड्स की तुलना में शुरू से ही बेहतर वेतन पैकेज मिलता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो कम समय में अच्छा वेतन कमाना चाहते हैं। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, वैसे-वैसे सैलरी भी बढ़ती जाती है।
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शुरुआती वेतन ₹10,000 से ₹15,000 के बीच हो सकता है
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अनुभवी इलेक्ट्रीशियन ₹25,000 से ₹40,000 या इससे अधिक तक कमा सकते हैं
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विदेशों में काम करने पर सैलरी इससे कई गुना अधिक हो सकती है
आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन कोर्स करने का खर्च सामान्यतः बहुत ही कम होता है। सरकारी आईटीआई में फीस नाममात्र की होती है और कई बार छात्रवृत्ति भी मिल जाती है। प्राइवेट संस्थानों में भी यह कोर्स अन्य प्रोफेशनल कोर्स की तुलना में कम खर्चीला होता है। इसका अर्थ यह है कि कम आय वाले परिवारों के छात्र भी इस कोर्स को आसानी से कर सकते हैं।
4. सरकारी भर्तियों में अवसरइलेक्ट्रीशियन ट्रेड करने वाले छात्रों के लिए समय-समय पर विभिन्न सरकारी विभागों में भर्तियाँ निकलती रहती हैं। उदाहरणस्वरूप:
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रेलवे में टेक्नीशियन पद
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बिजली विभाग में लाइनमैन, वायरमैन या हेल्पर
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सेना, नौसेना और वायुसेना में तकनीकी पद
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सरकारी अस्पतालों, स्कूलों, पंचायत कार्यालयों में तकनीकी स्टाफ
सरकारी नौकरियों में चयन हेतु छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं जिसमें इलेक्ट्रीशियन ट्रेड का तकनीकी ज्ञान काम आता है।
5. प्राइवेट क्षेत्र में भरपूर नौकरियाँअगर छात्र सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा नहीं करना चाहता तो निजी क्षेत्र में भी अपार संभावनाएँ हैं। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियाँ, निर्माण क्षेत्र, रियल एस्टेट, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिकल सर्विस प्रोवाइडर्स, और यहाँ तक कि होम इलेक्ट्रिकल सर्विस प्लेटफॉर्म जैसे UrbanClap (अब Urban Company) इत्यादि में बड़ी संख्या में कुशल इलेक्ट्रीशियन की माँग होती है।
6. स्वरोजगार के लिए बेहतरीन विकल्पइलेक्ट्रीशियन ट्रेड से आईटीआई करने के बाद छात्र खुद का व्यवसाय भी शुरू कर सकता है। जैसे:
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घरों और ऑफिसों में वायरिंग और इलेक्ट्रिकल रिपेयरिंग का कार्य
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इलेक्ट्रिक दुकानों की स्थापना
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ठेके पर इलेक्ट्रिकल प्रोजेक्ट लेना
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इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस सर्विस की शुरुआत
इस प्रकार यह कोर्स केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।
7. थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल ज्ञानइलेक्ट्रीशियन ट्रेड में केवल थ्योरी पढ़ाई नहीं जाती, बल्कि छात्रों को पूरी तरह से व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जाता है। इस ट्रेड में छात्र निम्नलिखित कार्यों में दक्ष बनते हैं:
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वायरिंग सिस्टम को समझना और स्थापित करना
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सर्किट डायग्राम को पढ़ना और लागू करना
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घरेलू और औद्योगिक उपकरणों की मरम्मत करना
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सुरक्षा मानकों के अनुसार कार्य करना
प्रैक्टिकल नॉलेज से छात्रों में आत्मविश्वास आता है और वे इंडस्ट्री की आवश्यकताओं के अनुसार काम करने योग्य बनते हैं।
8. कोर्स की अवधि और योग्यताइलेक्ट्रीशियन ट्रेड आमतौर पर 2 वर्ष का होता है, जिसमें 4 सेमेस्टर शामिल होते हैं। इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए न्यूनतम योग्यता 10वीं पास होना आवश्यक है। कई राज्यों में मेरिट के आधार पर प्रवेश होता है, जबकि कुछ संस्थान प्रवेश परीक्षा लेते हैं।
9. भविष्य में उच्च शिक्षा के विकल्पआईटीआई इलेक्ट्रीशियन कोर्स के बाद छात्र आगे की पढ़ाई भी कर सकते हैं:
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एनसीवीटी सर्टिफिकेट के आधार पर छात्र अप्रेंटिसशिप कर सकते हैं
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डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में लेटरल एंट्री मिल सकती है
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बी.वोक. (B.Voc) जैसे व्यावसायिक कोर्स भी एक विकल्प है
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प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, RRB, PSU) में तकनीकी पदों के लिए पात्रता होती है
इलेक्ट्रिकल क्षेत्र हर साल तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत में शहरीकरण, स्मार्ट सिटी मिशन, और औद्योगीकरण के कारण हर जगह इलेक्ट्रिकल तकनीशियनों की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्मार्ट होम्स, और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भी इलेक्ट्रीशियन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है।
निष्कर्षइलेक्ट्रीशियन ट्रेड से आईटीआई करना उन युवाओं के लिए एक शानदार विकल्प है जो तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। कम लागत, अधिक रोजगार के अवसर, बेहतर सैलरी और स्वरोजगार की संभावना इसे और भी आकर्षक बनाती है।
यदि आप भी जल्दी और स्थायी रोजगार की तलाश में हैं, तो इलेक्ट्रीशियन ट्रेड आपके लिए सही निर्णय साबित हो सकता है।
अपने इंटरव्यू में स्टूडेंट्स और जॉब सीकर्स कभी न बोलें ये शब्द
हमारे देश में भी आजकल जॉब मार्केट में काफी ज्यादा कॉम्पीटिशन है और एक वेकेंसी के लिए भी कई बार बड़ी संख्या में जॉब सीकर कैंडिडेट्स इंटरव्यू देने के लिए आते हैं. ऐसे में अक्सर स्टूडेंट्स और जॉब सीकर्स कंफ्यूज़ हो जाते हैं कि कैसे वे अपने इंटरव्यू में सफलता हासिल करें? बेशक इंटरव्यू देते समय आपका बातचीत करने का लहजा ही आपको कोई जॉब दिलवा सकता है. यह भी सच है कि, अधिकांश मामलों में इंटरव्यूअर्स कैंडिडेट्स के CV, रिज्यूम और पोर्टफोलियोज देखकर कैंडिडेट्स के बारे में पहले से ही अपनी धारणा बना लेते हैं. इस आधार पर ही वे कैंडिडेट के व्यक्तित्व का मूल्यांकन करते हैं और यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि क्या कैंडिडेट्स द्वारा अपने रिज्यूम या CV में किये गए दावे वास्तव में सच हैं? आपको इंटरव्यू में ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो आपके रिज्यूम या CV में प्रस्तुत आपके दावों और पहचान को सही साबित करें. इसलिये, यहां कुछ ऐसे शब्दों की सूची दी जा रही है जिनका उपयोग स्टूडेंट्स और जॉब सीकर कैंडिडेट्स को इंटरव्यू के दौरान कभी नहीं करना चाहिए:
- नकारात्मक शब्द - ‘नफरत’
नफरत एक बड़ी ही बलशाली नकारात्मक भावना है और अधिकांश लोग ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले लोगों से दूर भागते हैं. जब आप किसी व्यक्ति से पहली बार और खासकर किसी जॉब इंटरव्यू के दौरान मिलते हैं तो ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचें. इंटरव्यू के दौरान, इंटरव्यूअर आपकी ताकत, आपके व्यक्तित्व के सकारात्मक पहलूओं और कठिन परिस्थितियों को हल करने की आपकी काबलियत के बारे में सुनना और जानना चाहते हैं. अगर आप नफरत जैसे किसी शब्द का इस्तेमाल करेंगे तो इससे इंटरव्यूअर पर आपका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और वे आपको ‘हाई-रिस्क कैंडिडेट’ मानेंगे.
- असल में/ वास्तव में नहीं हैं पेशेवर शब्द
असल में और वास्तव में जैसे शब्द अक्सर बोले जाने वाले शब्द होते हैं. ये हमारी रोजाना बोली जाने वाली भाषा के अंग बन चुके हैं. लेकिन इन शब्दों का इस्तेमाल पेशेवर बातचीत जैसे इंटरव्यू के दौरान कभी नहीं करना चाहिये. आपको शायद अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करते समय किसी भी वाक्य की शुरूआत में इन शब्दों का इस्तेमाल करना बहुत अच्छा लगे लेकिन अपनी इस तीव्र इच्छा को रोकने की कोशिश करें. ‘हम्म या उह’ जैसे ज्यादा बोले जाने वाले अन्य शब्दों का इस्तेमाल करने से भी बचें क्योंकि ये शब्द अस्पष्टता बढ़ाते हैं और इंटरव्यूअर के दिमाग पर आपका बुरा प्रभाव पड़ता है. किसी भी प्रश्न का जवाब देते समय अगर आपको यह न पता हो कि इस प्रश्न का क्या जवाब दें?... तो कुछ समय अवश्य लें लेकिन पूरक शब्दों का इस्तेमाल करने से बचें.
- अवश्य’ भी है एक अस्पष्ट शब्द
हमारी रोज़ की अनौपचारिक बातचीत में ‘अवश्य’ या जरुर अधिकांशतः बोला जाने वाला शब्द है. इस शब्द का इतना अधिक इस्तेमाल किया जाता है कि आजकल तकरीबन ‘हां’ कहने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल समानार्थक के तौर पर होने लगा है. लेकिन ध्यान देने वाली बात तो यह है कि जब आप ‘अवश्य’ शब्द बोलें तो तकरीबन इस शब्द का अस्पष्ट उत्तर ही मिल पाता है. इसलिये, किसी पेशेवर जगह पर इस शब्द का इस्तेमाल कई बार स्पीकर में आत्म-विश्वास की कमी भी बताता है. किसी पेशेवर जगह पर ऐसे शब्दों को बोलने से बचें जिनके अर्थ स्पष्ट न हों क्योंकि कई बार ये शब्द आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक असर डाल देते हैं.
- ‘स्टफ’ शब्द को भी न करें इस्तेमाल
हम आजकल कई ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने के अभ्यस्त हो गये हैं लेकिन हम यह समझ ही नहीं पाते हैं कि किसी विशेष परिवेश में उन शब्दों का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए. इसलिये, किसी इंटरव्यूअर से बातचीत करते समय यह हो सकता है कि ये शब्द आपकी जुबान पर आने लगें. हमेशा यह याद रखें कि इंटरव्यूअर आपके द्वारा बोले गए प्रत्येक शब्द पर पूरा ध्यान देते हैं. उदाहरण के लिए, ‘स्टफ’ शब्द को लें. यह बार-बार बोला जाने वाला शब्द है जिसे हम तकरीबन किसी भी चीज़ के बारे में बात करते हुए इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इंटरव्यू में इस तरह के किसी भी शब्द का इस्तेमाल करने से आपका नेगेटिव असर पड़ेगा क्योंकि इस तरह के शब्द अक्सर एक अनौपचारिक रवैया इंगित करते हैं. इनके इस्तेमाल से कैंडिडेट के व्यक्तित्व में गंभीरता की कमी प्रतीत होती है जो कोई भी एम्प्लॉयर अपने किसी भावी कैंडिडेट में नहीं देखना चाहता है.
- कसम लेने वाले शब्द भी दर्शाते हैं आपमें भरोसे की कमी
उक्त शब्द अपने में ही स्पष्ट हैं लेकिन जैसेकि हमने ऊपर चर्चा की है, कई शब्द हमारी रोजाना की बातचीत का हिस्सा बन गये हैं और हम बिना सोचे-समझे उन शब्दों का इस्तेमाल करते रहते हैं. पिछले कुछ वर्षों की तुलना में जॉब इंटरव्यू शायद कुछ हद तक अनौपचारिक हो गए हैं लेकिन इसका यह भी मतलब नहीं है कि आप इंटरव्यूअर के साथ अनौपचारिक बातचीत कर सकते हैं. आपको अपने इंटरव्यूअर के साथ बातचीत करते समय कुछ हद तक प्रोफेशनलिज्म बनाये रखना होगा और जिसका अर्थ है कि आप अपनी बातचीत में किसी भी कीमत पर गाली/ कसम लेने वाले शब्दों का इस्तमाल करने से बचें. दरअसल, कसम लेने वाले शब्द भी आपमें भरोसे की कमी दर्शाते हैं और कोई भी कंपनी अपने वर्क कल्चर या कार्य शैली में भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने को मंजूर नहीं करती है. अगर आप इंटरव्यू में ही ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर डालें तो वह कंपनी शायद ही आपको काम पर रखे.
- जो भी हो’ बोलने से बचें
जब हम अपने दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत करते हैं तो एक और बहुत ज्यादा बोला जाने वाला शब्द ‘जो भी हो/ चाहे जो हो’ है. आम परिस्थितियों में, इस शब्द का इस्तेमाल करना ठीक है लेकिन किसी पेशेवर परिवेश में ऐसा कदापि न करें. अपनी बातचीत में इस शब्द का इस्तेमाल करने का अर्थ है कि आपने हार मान ली है. अगर आप इंटरव्यूअर के सामने यह शब्द इस्तेमाल करते हैं तो आप उन पर अपनी नकारात्मक इमेज छोड़ते हैं. अक्सर एम्प्लॉयर्स ऐसे एम्प्लाइज की तलाश में रहते हैं जो उपाय करने में कुशल होते हैं और ऐसे एम्प्लॉइज को नज़रंदाज़ करते हैं जो जरा-सी मुसीबत आने पर घबरा कर पीछे हट जाते हैं. आशा है कि आपके लिए ये टिप्स मददगार साबित होंगे और आप अपने अगले इंटरव्यू में इनका पूरा ध्यान रखेंगे ताकि आप गलती से भी उक्त शब्दों का इस्तेमाल अपने इंटरव्यू के दौरान न करें.
फर्स्ट इम्प्रेशन, मस्त इम्प्रेशन
किसी शख्स से पहली मुलाकात होने पर उसके बाहरी व्यक्तित्व और आचरण से ही आमतौर पर फर्स्ट इम्प्रेशन बन जाता है, जो अक्सर लास्ट इम्प्रेशन भी साबित होता है। फर्स्ट इम्प्रेशन को जबर्दस्त बनाना चाहते हैं तो पर्सनैलिटी डिवेलपमेंट के इन टिप्स पर गौर करें। पूरी जानकारी दे रहे हैं
लोग आमतौर पर अपनी पर्सनैलिटी की अहमियत को नजरअंदाज कर देते हैं और बैठे-बिठाए इंटरव्यू और दूसरे तमाम मौकों पर दूसरों के सामने अपनी छवि मटियामेट कर बैठते हैं। इसका खमियाजा जीवन की छोटी-बड़ी असफलताओं के रूप में सामने आता है। हालांकि ऐसे लोग कभी यह नहीं जान पाते कि उनके बारे में लोगों के बीच निगेटिव इम्प्रेशन कैसे बन गया। ऐसे ही कुछ उदाहरणों पर गौर करते हैं :
- इंटरव्यू रूम में प्रवेश करता एक शख्स जिस की सुर्ख लाल रंग की शर्ट के ऊपरी दोनों बटन खुले हैं। सनग्लास बालों में अटका हुआ है। लंबे बाल किसी फिल्मी हीरो के स्टाइल में जेल लगाकर सेट किए गए हैं। रेज्यूमे मांगे जाने पर जींस की जेब से एक तुड़ा-मुड़ा कागज इंटरव्यूअर की ओर बढ़ा देता है। इस इंटरव्यू का रिजल्ट क्या होगा, इस बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं।
- कॉलेज का पहला दिन। क्लास में लेट होने के बावजूद एक स्टूडेंट अंदर आने के लिए टीचर से इजाजत लेने की जरूरत महसूस नहीं करता। कॉपी-कलम तक हाथ में नहीं। टीचर के पूछने पर उद्दंडता के साथ जवाब देता है। क्या साल भर टीचर ऐसे स्टूडेंट के बारे में अपने विचार बदल सकेगा? इस मामले में किसी न किसी रूप में खमियाजा स्टूडेंट को ही भुगतना पडे़गा।
- ऑफिस में सहकर्मियों खासतौर पर महिलाओं के साथ हंसी-ठिठोली में वक्त बिताना। काम के समय मोबाइल पर बातचीत। कभी भी समय पर काम पूरा नहीं करना। हमेशा नए बहाने। ऐसे में तरक्की तो दूर की बात है, क्या बॉस ऐसे शख्स को लंबे समय तक रखेगा?
- एयरपोर्ट पर या ट्रेन में गलत और उलटी-सीधी अंग्रेजी में बातचीत कर झूठा रौब जमाते हुए जबर्दस्ती बाकी सहयात्रियों को आकर्षित करने की कोशिश। ऐसे चेप टाइप के इंसान से सामने वाला जल्द पीछा छुड़ाने की कोशिश क्यों नहीं करेगा?
- दोस्तों के बीच बात-बात पर बड़बोलापन प्रदर्शित करना। सिर्फ अपने मुंह मियां-मिट्ठू बनते हुए अहमियत जताने की हर समय कोशिश। पीठ पीछे ऐसे शख्स के बारे में क्या बातें की जाती होंगी, यह कल्पना करना मुश्किल नहीं होना चाहिए।
जब इस तरह के टॉपिक पर बात छेड़ी जाती है, तो न जाने कितने ऐसे कैरेक्टर अपने इर्द-गिर्द के लोगों के बीच से निकलकर अचानक आंखों के सामने आ जाते हैं। ऐसा भी नहीं कि ऐसे लोग कम अक्ल होते हैं या जीवन में कामयाब नहीं हो सकते, पर अपनी इन्हीं आदतों और गलतियों की वजह से ये जाने-अनजाने अक्सर जिंदगी के गोल्डन चांस गवां बैठते हैं। यहीं बात होती है पर्सनैलिटी डिवेलपमेंट या पर्सनैलिटी ग्रूमिंग की जरूरत की। ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जिनमें भारी-भरकम डिग्रियां होने के बावजूद लोग कॉमन सेंस के महत्व से अनजान होते हैं। मैनर्स या तमीज नाम की चिड़िया के बारे में जानते तक नहीं।
क्या है पर्सनैलिटी ग्रूमिंग
इसमें सबसे पहला हिस्सा है सॉफ्ट स्किल डिवेलपमेंट का। इसके तहत उठने-बैठने का सलीका, बातचीत करने, खुद को आकर्षक ढंग से पेश करने, सटीक शब्दों के चयन, दूसरों से सम्मान लेने और देने आदि पर आधारित बेहद छोटी-छोटी आदतें शामिल हैं।
- मैं कर सकता हूं, यह दृष्टिकोण अपनी सोच में विकसित करना।
- आत्मविश्वास बढ़ाना और अपनी छवि (सेल्फ इमेज) में निखार लाना।
- कम्यूनिकेशन स्किल्स में सुधार।
- खुद को अच्छी तरह से पेश कर पाने की योग्यता।
पुरुषों के लिए ऑफिस के मुताबिक पर्सनल ग्रूमिंग टिप्स
- जींस और टी-शर्ट जैसी इन्फॉर्मल ड्रेस ऑफिस में न पहनें। फॉर्मल शर्ट और ट्राउजर्स और पॉलिश किए हुए लेदर शूज ही पहनें।
- बिखरे या फिल्मी अंदाज के बालों के स्टाइल से खराब इम्प्रेशन पड़ता है।
- शो-ऑफ करने के इरादे से इस्तेमाल की जाने वाली चीजों से परहेज करें। इनमें सोने की मोटी चेन, हाथों में ढेर सी अंगूठियां, महंगे मोबाइल और कार की चाबियां उंगलियों पर नचाना जैसी हरकतों का जिक्र किया जा सकता है।
महिलाओं के लिए ऑफिस के मुताबिक पर्सनल ग्रूमिंग टिप्स
- ऑफिस या वर्कप्लेस पर परफ्यूम, सेंट या किसी तेज सुगंध का इस्तेमाल करने से बचें।
- आंखों को बहुत चुभने वाले गहरे रंगों का इस्तेमाल नेल पॉलिश में न करें। ऑफिस में प्रफेशनल लुक में नजर आने के लिए यह जरूरी है।
- चाल सामान्य रखें। मटकने/बलखाकर चलने जैसी कोशिश शोभा नहीं देती।
- इसी तरह हेयर स्टाइल भी सादगीपूर्ण रखें। चेहरे और आंखों पर बाल न आएं। अटपटे से हेयर कलर का प्रयोग न करें। सुगंधित हेयर स्प्रे या जेल से भी बचें।
- ऑफिस में मेकअप हल्का और चेहरे की जरूरत के मुताबिक होना चाहिए। जैसे ज्यादा मेकअप खराब इम्प्रेशनदेता है, वैसे ही मेकअप न करना भी उतना ही खराब लग सकता है।
- ऑफिस में कम-से-कम और हल्की जूलरी पहनें। आवाज करने वाले या ज्यादा चमक-दमक वाले आभूषणों का इस्तेमाल न करें।
कम्यूनिकेशन संबंधी टिप्स
- बहुत तेजी से बोलने से सुनने वाला व्यक्ति जल्द ही आपकी बातों में दिलचस्पी लेना बंद कर देता है और कंफ्यूज भी महसूस करने लगता है इसलिए सामान्य गति से बातचीत करना प्रभावी कहा जा सकता है।
- ज्यादा बोलने की प्रवृति भी आमतौर पर घातक साबित होती है। छोटे-छोटे वार्तालाप को ध्यान से सुना और समझा जाता है। थोथा चना बाजे घना कहावत इसी संदर्भ में कही जाती है।
- शब्दों के चयन में हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। खासतौर से किसके सामने बात की जा रही है, इसका ध्यान रखकर ही शब्द इस्तेमाल करें। स्लैंग, संक्षिप्त शब्दों या चालू शब्दों के प्रयोग से बचने की कोशिश करें।
- निगेटिव बॉडी लैंग्वेज और पोस्चर्स (पैर हिलाना, हाथों को नचा-नचाकर बात करना या नाक खुजलाना आदि) से सुनने वाला असहजता महसूस करता है इसलिए सहज होकर विचारों को रखें।
- जब सामने वाला शख्स बात कर रहा हो, तो बीच में उसकी बातों को नहीं काटना चाहिए। धैर्य से सुनें और समझें। जब उसकी बात खत्म हो जाए तो अपना प्रश्न रखें।
- बातचीत के दौरान अपने विचारों को भी जरूर रखें, नहीं तो बातचीत इकतरफा हो जाएगी।
- लूज टॉक्स (किसी के बारे में कोई अनर्गल या आपत्तिजनक बातें) करने की प्रवृति नुकसानदेह होती है।
- बातचीत के दौरान ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बचें जिनके अर्थ के बारे में आप निश्चित नहीं हैं।
मोबाइल मैनर्स
- किसी से बात करते समय अगर मोबाइल बजे, तो तभी फोन अटेंड करें, जब बहुत जरूरी हो, वह भी सामने वाले की इजाजत लेकर। नहीं तो बाद में बात करें।
- मीटिंग/पिक्चर हॉल/कंसर्ट/सेमिनार या किसी और फंक्शन में मोबाइल साइलेंट मोड पर रखें या स्विच ऑफ कर दें।
- किसी से बिना पूछे मोबाइल से फोटो नहीं खींचें।
- धीमी आवाज में बात करें और मोबाइल स्पीकर का वॉल्यूम भी कम रखें, नहीं तो सब लोगों तक आवाज पहुंचती है।
- रिंग टोन सादगीपूर्ण हो और इसे कम-से-कम वॉल्यूम पर रखें।
सामान्य शिष्टाचार
- अपने से बड़ों से मिलते समय सही ढंग से अभिवादन करें। आई कॉन्टैक्ट बनाए रखें। नमस्कार कर रहे हैं तो सिर झुकाते हुए दोनों हाथ जोड़ें। चरण स्पर्श में भी घुटनों तक हाथ लगाने का तरीका ठीक नहीं।
- हाथ मिलाते समय गर्मजोशी का परिचय दें। ढीले-ढाले तरीके से हाथ न मिलाएं।
- पब्लिक प्लेस या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अगर साथ वाली सीट पर महिला बैठी हैं तो एक निश्चित दूरी बनाकर बैठें।
- महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को पहले आगे आने का मौका दें।
- किसी से मदद मांगते वक्त बेहद सॉफ्ट आवाज में आग्रह करें। बाद में धन्यवाद करना न भूलें।
- खांसते/छींकते/हिचकी के समय मुंह पर रुमाल या हाथ रखें और बाद में एक्सक्यूज मी कहें।
- पैर पटककर या जूतों/सैंडलों की आवाज करते हुए लोगों का ध्यान आकर्षित करते हुए नहीं चलें।
- किसी की ओर उंगली का इशारा करते हुए बात न करें। इसी तरह किसी को लगातार देखने या घूरने की प्रवृति से बचें।
कैसी हो बॉडी लैंग्वेज
इसमें कोई शक नहीं कि क्यूनिकेशन और खुद को प्रेजेंट करते हुए बॉडी लैंग्वेज का काफी महत्व है। अब देखते हैं बॉडी लैंग्वेज से जुड़ी कुछ बातें :
- हाथ और पैरों को क्रॉस करके न बैठें: बैठते समय खासतौर पर किसी इंटरव्यू के समय ध्यान रखें कि हाथों और पैरों को क्रॉस न करें। इससे आपके डिफेंसिव होने का संकेत मिलता है।
- आई कॉन्टैक्ट बनाकर बात करें: बातचीत में इधर-उधर न देखते हुए सीधे सामने वाले व्यक्ति से आई टु आई कॉन्टैक्ट बनाकर बात करें। इससे आपके आत्मविश्वास का पता चलता है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि आप लगातार घूरें और सामने वाले के लिए असहजता की स्थिति हो जाए।
- कंधों को आगे उचकाते हुए बात नहीं: ऐसा करने से पता चलता है कि आप तनाव में हैं। कंधों को पीछे की तरफ रखते हुए रिलैक्स होकर बात करें या इंटरव्यू फेस करें।
- सर हिलाकर हामी भरें: सुनने के क्रम में वक्ता को यह अहसास दिलाने के लिए कि आप उसकी बातों को ध्यान से सुन रहे हैं, समय-समय पर सिर हिलाकर स्वीकृति या हामी का संकेत देते रहें लेकिन सिर हिलाने की अति नहीं होनी चाहिए।
- अधलेटी अवस्था में नहीं बैठें: किसी से बातचीत करते हुए सीधे होकर रिलैक्स मुद्रा में बैठें।
- मुस्कान और हंसी: बातचीत के दौरान मजाक या हंसी की बात पर हल्की मुस्कान आपके चेहरे पर होने से आपके मैत्रीपूर्ण रवैये की झलक सामने वाले व्यक्ति को मिलती है।
- चेहरे पर बार-बार हाथ नहीं: इससे आपकी नर्वसनेस का पता चलता है और सामने वाले व्यक्ति का ध्यान भी बंटता है।
- अपने एक्शंस में धीमापन लाएं: चाल में धीमापन लाने से आप खुद को ज्यादा आश्वस्त महसूस कर सकते हैं।
- बैठे-बैठे हाथ-पैर न हिलाएं: इससे आपकी नर्वसनेस का पता चलता है। अपने शरीर के मूवमेंट्स पर नियंत्रण रखें।
अपने एटिट्यूड को पहचानें
- पता करें कि आप असर्टिव (तर्क के आधार पर अपनी बातें धैर्यपूर्वक मनवाने की प्रवृति) हैं, अग्रेसिव (धमकाने वाले अंदाज में ऊंचा बोलकर मनवाने की प्रवृति) हैं या समिसिव (दूसरों की बातों को बिना किसी प्रतिरोध मान लेने की प्रवृति)। खुद को असर्टिव बनाने की कोशिश करें। बाकी दोनों प्रवृतियों से नुकसान होने के चांस ज्यादा हो सकते हैं।
लीडरशिप क्वॉलिटी
नौकरियों के इंटरव्यू में ऐसी क्वालिटी वाले युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है जिनमें लीडरशिप क्वालिटी हो। चयन प्रक्रिया में बस इतना ही देखा जाता है कि प्रत्याशी बाकी लोगों पर हावी होने, उनकी बातों को नजरअंदाज करने, उन्हें बोलने का मौका न देते हुए लगातार सिर्फ दिखाने के लिए बोलने का प्रयास तो नहीं कर रहा है। इस दौरान संक्षिप्त लेकिन तथ्यपूर्ण और बाकी प्रत्याशियों के मत का सम्मान करते हुए विचार रखने वालों पर सहसा ही रोजगारदाताओं की नजर जाती है।
स्ट्रेस मैनेजमेंट
रोजमर्रा के जीवन में भी तनाव के क्षण जाने-अनजाने आते-जाते रहते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि ऐसे आवेश और तनाव पर कितनी जल्दी काबू पाया जा सकता है जिससे इसका असर बाद वाले कार्यकलापों पर नहीं पड़े। आइए बात करते हैं ऐसे ही कुछ टिप्स पर :
- बहस या हॉट डिस्कशन के वक्त खुद पर नियंत्रण रखें और आवेश में न आएं।
- बाद में एक गिलास ठंडा पानी पिएं और रिलैक्स होकर बैठ जाएं। कोशिश करें कि उस वक्त कुछ नहीं सोचें।
- 10 मिनट के लिए खुली हवा में टहलकर आएं।
- चाय-सिगरेट से तनाव दूर नहीं होगा बल्कि और बढ़ भी सकता है।
- पॉजिटिव सोच रखते हुए अपने बाकी कामों को अंजाम देने की कोशिश करें।
पॉजिटिव इमेज बिल्डिंग
- आपके चेहरे पर सौम्यता और मुस्कान होने से किसी को भी अंदाजा हो जाएगा कि आप फ्रेंडली हैं।
- ऑफिस या घर कहीं भी हर बात में इनकार करने या टालने की प्रवृति बार-बार दिखाने से आपकी इमेज काम से भागने वाले व्यक्ति की बन जाएगी। यह निगेटिव इमेज होगी।
- खुद आगे बढ़कर किसी की मदद करने की आदत विकसित करना आपकी इमेज और कॉन्फिडेंस को बढ़ाने में मददगार होंगे।
- झूठ बोलने या बड़बोलेपन से भी इमेज को नुकसान होगा।
- अपने से जूनियर या होटलों वगैरह में वेटर्स के साथ बदतमीजी से बात करने से आपके दोस्तों के बीच आपके प्रति गलत संदेश जाएगा। विश्वास करें कि सम्मानपूर्वक बात करने से आपकी इज्जत बढ़ेगी, घटेगी नहीं।
मिथ्स और फैक्ट्स
मिथ: महंगे और ब्रैंडेड कपडे़, मोबाइल या मोटरसाइकल या कार होने से ही पर्सनैलिटी बनती है।
फैक्ट: इससे भले ही दूर से कुछ समय के लिए कोई आकर्षित हो जाए लेकिन आपके खराब मैनर्स और दिमागी दिवालियापन की पोल खुलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। तब ये सब महंगी चीजें बेकार साबित हो जाएंगी।
मिथ: अंग्रेजी के बिना पर्सनैलिटी बना पाना मुमकिन नहीं है।
फैक्ट: अगर आप हिंदी में भी विनम्रता के साथ नपे-तुले शब्दों में बात करेंगे तो यकीन मानिए इससे भी सामने वाले के ऊपर आपकी पॉजिटिव छाप ही पड़ेगी।
मिथ: पर्सनैलिटी ग्रूमिंग जैसी बातें इंटरव्यू तक ही ठीक हैं।
फैक्ट: अगर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उद्दंड हैं और बेसिक मैनर्स से भी कोसों दूर हैं तो इंटरव्यू के दौरान भी आपकी पोल खुलने की पूरी आशंका होगी।
मिथ: लड़कियों से दोस्ती करने के लिए शो-ऑफ ही एकमात्र शॉर्टकट है।
फैक्ट: यह आपके लिए शॉर्टकट नहीं, बल्कि शॉर्ट सर्किट साबित हो सकता है और आपकी इमेज हमेशा के लिए चालू किस्म की बन सकती है। आप जो भी हैं, बस उतनी ही सचाई से खुद को एक दोस्त के रूप में पेश करें।
अक्सर पूछे जाने वाले कुछ सवाल
इंटरव्यू में कैसे कपड़े पहनने चाहिए?
गर्मियों में लाइट कलर की फुल शर्ट और डार्क ट्राउजर्स पहन सकते हैं। कपडे़ बहुत ढीले या टाइट भी नहीं होने चाहिए। सर्दियों में टाई और ब्लेजर पहना जा सकता है। मांगे हुए या नए कपडे़ कतई न पहनें। इससे आपको फिटिंग की वजह से असुविधा हो सकती है। युवतियां या महिलाएं लाइट कलर के सूट या साड़ी पहन सकती हैं। लाइट मेकअप काफी होगा।
सर्टिफिकेट कैसे पेश किए जाने चाहिए?
आपके सभी ओरिजिनल सर्टिफिकेट लैमिनेटेड होने चाहिए। इन्हें ऐसे फोल्डर में रखें, जिसमें ट्रांसपैरंट प्लास्टिक के पन्ने हों जिनमें आप इन्हें एक साथ रख सकते हैं। यही फाइल आप सामने पेश कर सकते हैं।
कमियों के बारे में पूछे जाने पर क्या जवाब देना चाहिए?
कोई कमी नहीं है...ऐसा जवाब घातक हो सकता है। बेहतर होगा कि अपनी ऐसी कमियों पर बात करें जिनसे ऑफिस का काम प्रभावित नहीं होता हो। इनमें कामचोरी, आलस्य, झूठ बोलना, समय का पाबंद न होना, देर से उठना आदि पर चर्चा करने से बचें। मूवीज देखना, खाना नहीं बना पाना, सिगरेट पीना आदि कमियों को बता सकते हैं।
पिछली नौकरी छोड़ने की वजह क्या बताई जानी चाहिए?
किसी भी सूरत में पिछली कंपनी की बुराई नहीं करें। नौकरी बदलने को आगे की तरक्की और नई कंपनी के ग्रोथ ग्राफ से जोड़कर बता सकते हैं।
यदि इंटरव्यू में इस सवाल का सही जवाब दे दिया तो, फिर जॉब तय..पूजा
आपने कभी सोचा है कि जब हम किसी से बात कर रहे होते हैं, तो हर तरह की बात करने में माहिर व्यक्ति से भी जब अपने बारे में कुछ बताने को कहा जाता है, तो उसे सोचने के लिए एक मिनट का समय लग जाता है। अगर कोई तुरंत बता भी देता है, तो खुद के बारे में एक मिनट से ज्यादा नहीं बोल पाता। इंटरव्यू के दौरान भी सबसे ज्यादा परेशानी आसान से लगने वाले इसी सवाल से होती है कि अपने बारे में कुछ बताइए? हालांकि कुछ बातों का ध्यान रखें तो आप न सिर्फ इस सवाल का सही जवाब दे सकते हैं, बल्कि अपने जवाब से इंटरव्यू लेने वाले पर अलग छाप भी छोड़ सकते हैं।
जब आप इंटरव्यू के लिए कहीं जाते हैं, तो इंटरव्यू लेने वाले की तरफ से पहला सवाल अक्सर यही दागा जाता है कि अपने बारे में कुछ बताइए। अगर इंटरव्यू लेने वाले ने यही बात आपका नाम लेकर पूछा है कि, Puja tell me something about yourself तो जाहिर सी बात है कि आपको ये नहीं कहना है कि Sir my name is Puja, क्योंकि वो पहले ही आपका नाम जान चुका है। इस बात को ध्यान रखें, वरना लगेगा कि आप जवाब रट कर आए हैं। इस दोहराव से बचकर आप अपना प्रभाव एक स्मार्ट कैंडीडेट के तौर पर छोड़ सकते हैं।
उसके बाद आपको बताना है कि आपके शहर का नाम क्या है। आप या तो कह सकते हैं 'I belong to Delhi' या I live in Delhi', लेकिन I belong to ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। उसके बाद आपके जवाब की तीसरी लाइन होगी, जो उस नौकरी की जरूरत के हिसाब से आपकी सबसे बड़ी शैक्षणिक योग्यता के बारे में होगी। जैसे 'I have PG in... ' या 'I am BTech या I am MBA', या कोई भी जो सबसे बड़ी डिग्री आपके पास हो, उसे और किस इंस्टीट्यूट से किस वर्ष में आपने ये डिग्री पूरी की है, उसके बारे में बताना चाहिए। जैसे— 'Sir I have in MBA from Symbioses College Pune'। सबसे बड़ी डिग्री सबसे पहले बताने की इसलिए जरूरत है क्योंकि आपको नौकरी उसी के आधार पर मिलने वाली है और वैसे भी ग्रेजुएशन से पहले की पढ़ाई, जब तक कोई अंडरग्रेजुएट डिप्लोमा नहीं है, या उस जॉब की शर्त नहीं है, उसको बताने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
अगर आप फ्रेशर हैं, या अगर आपने कोई डिप्लोमा या स्किल कोर्स किया है, तो उसका भी अपनी सबसे बड़ी शैक्षणिक योग्यता के साथ उल्लेख जरूर करें। इसके बाद बारी आती है आपकी दक्षताओं और अनुभव की। अगर आप फ्रेशर नहीं हैं, तो आपके पास एक्सपीरियंस लैटर और अन्य जरूरी कागजात होने चाहिए और आप उनके बारे में इंटरव्यू में भी बताएं। अपनी दक्षताएं जो आपने अपने रेज्यूमे में लिखी हैं, उन सभी को बताने की जरूरत नहीं है। आप एक या दो का जिक्र कर सकते हैं, जैसे I am quite good in Computer and PR skills। अनुभव के बारे में बताने के लिए आप कह सकते हैं—' I am carrying in experience of three years।'
उसके बाद आप अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताएंगे। क्योंकि आप शुरुआती परिचय में आप परिवार के बारे में नहीं बताएंगे तो बाद में ये सवाल आपसे पूछा जाएगा, इसलिए इसका पहले सवाल के जवाब में ही उल्लेख कर दें। आप इसे इस तरह से कह सकते हैं- So far my family background is...' या फिर ' in my family there are three members...' या फिर 'If I talk about my family we are three members, my parents and me. इस तीनों में से किसी भी वाक्य से आप अपने परिवार के बारे में बताना शुरू कर सकते हैं। अपने परिवार के बारे में थोड़ा बताना हमेशा ही ठीक रहता है।
अंत में अपनी हॉबीज यानी रुचियों के बारे में भी बताना चाहिए, चूंकि आपकी ये व्यक्तिगत रुचियां हैं, इसलिए आपके बोलने की टोन धीमा और दोस्ताना ही रखें। आप कह सकते हैं.. 'I have couple of hobbies...' या फिर 'My hobbies are...' या फिर 'I like to do....' या फिर 'If I talk about my hobbies...'। इन चारों वाक्यों में से जो भी आपको अच्छा लगा, उससे शुरू करके आप अपनी हॉबीज के बारे में बता सकते हैं। ध्यान रखें, इसे संक्षेप में बताएं, हां कोई हॉबी ऐसी हो जो आपकी नौकरी से जुड़ी हो तो थोड़ा विस्तार से बता सकते हैं।
इस तरह से आप अपने बारे में ज्यादातर बातें बता चुके होते हैं, अब अपने जवाब का अच्छा सा अंत भी करना जरूरी होता है, उसके लिए बेहतरीन लाइन होती है... 'its all about me Sir'। ध्यान रहे बार-बार सर या मेम कहना भी अच्छी छाप नहीं छोड़ता है। जवाब की शुरुआत में एक बार और जवाब की आखिरी लाइन में सर या मेम कहना ही अच्छा रहता है। अपनी टोन कूल रखें, चेहरे पर मुस्कराहट बनाए रखें और आई कॉन्टेक्ट बिगड़े नहीं, इसका ध्यान रखें, आत्मविश्वास बनाए रखें।
इस तरह 'Tell me about yourself' वाले सवाल के जवाब को क्रम से कई हिस्से में बांट लें। पहले नाम, फिर शहर, फिर सबसे बड़ी शैक्षणिक योग्यता, फिर और कोई स्किल या कोर्स, फिर अनुभव, इसके बाद पारिवारिक पृष्ठभूमि, उसके बाद अपनी रुचियों के बारे में संक्षिप्त में बताएं। अगर आपने बिलकुल ठीक से इसे फॉलो किया और आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया तो आपका जबर्दस्त इम्प्रेशन पड़ेगा। इस तरह से आपका जवाब या परिचय कुछ-कुछ ऐसा होगा-
Sir/Mam, I am Puja . I belong to Delhi. I have in MBA from Symbiosis College, Pune in 2012.along wth it I have Completed Diploma in Aviation from Franklin Institute in 2009. I am Carrying in experience of so and so(जो भी आपका हो). I think I am quite good in Computer and PR Skills, My Previous boss used to say it. If I talk about my famly we are three members, my parents and me. My father s a retired police Inspector and mother s home maker. I would like to mention some of my hobbies like playing chess and visiting new places. its all about me sir.
कहते हैं कि फर्स्ट इंप्रेशन इज लास्ट इंप्रेशन और इंटरव्यू का पहला सवाल ही आपको ये इंप्रेशन बनाने का मौका दे देता है बशर्ते कि आप पूरे विश्वास के साथ बिना चूके सारी जानकारियां शॉर्ट में दे दें। बेस्ट ऑफ लक...!
क्या दिलाए इंटरव्यू में कामयाबी
कहने को तो हर किसी का कपड़े पहनने, उठने-बैठने का अपना तौर-तरीका होता है, लेकिन कुछ मैनर्सऔर एटिकेट्स उन्हें दूसरों से अलग और बेहतर बनाते हैं। ऐसा मुमकिन होता है मैनर्स को लेकर उनकी समझ और काम करने की नफासत से। इमेज कंसल्टेंट जसप्रीत कौर से बातचीत के आधार पर ड्रेसिंग, डाइनिंग और कम्यूनिकेशन के मैनर्स बता रही हैं
- एक मल्टिनैशनल कंपनी का ऑफिस। मैनेजर की पोस्ट के लिए इंटरव्यू हो रहे हैं। नेहा अंदर आती हैं और बड़े अदब के साथ इंटरव्यू बोर्ड के मेंबर्स को हलो बोलती हैं। बोर्ड मेंबर्स की निगाह उन पर पड़ती है तो कुछ पल के लिए ठहर जाती है। नेहा की पर्सनैलिटी उन्हें प्रभावित करती है। इसके बाद फॉर्मल इंटरव्यू शुरू होता है। इंटरव्यू अच्छा होता है, हालांकि नेहा को लगता है कि एक-दो सवालों का जवाब वह और बेहतर दे सकती थीं। फिर भी नेहा का सिलेक्शन हो जाता है। वजह, बोर्ड मेंबर्स को नेहा की पर्सनैलिटी (ड्रेसिंग सेंस, बैठने का तरीका, बातचीत करने का सलीका आदि) काफी पसंद आते हैं। हालांकि नेहा को लुक के मामले में औसत ही कहा जाएगा। फिर भी अपने मैनर्स और सलीकों से वह जहां जाती हैं, दूसरों पर छा जाती हैं।
दूसरी ओर मोहित हैं, जोकि काफी गुड लुकिंग हैं। अच्छे पैसे वाले घर से हैं, लेकिन न कपड़े पहनने का शऊर है, न ही बातचीत का सलीका। ऐसे में अक्सर लोग मोहित से दूरी बनाना ही पसंद करते हैं।
दरअसल, जब हम किसी से मिलते हैं तो पहले इंप्रेशन से ही हमारी इमेज सामनेवाले पर बनती है। इस इमेज को बनाने में हमारे पहनने, उठने-बैठने, बोलने और बॉडी लैंग्वेज आदि का काफी रोल होता है। इसके अलावा, आप फोन पर कैसे बात करते हैं, डायनिंग टेबल पर या रेस्तरां में नॉर्मली आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, लिफ्ट का इस्तेमाल या किसी के साथ चल रहे हों तो गेट खोलने जैसी बातों में किस चीजों का ध्यान रखन चाहिए, ये काफी अहम होते हैं। चलिए जानते हैं इन्हीं सब चीजों से संबंधित मैनर्स और तौर-तरीकों के बारे में।
फायदे हैं तमाम
-सही मैनर्स से आप दूसरों का दिल जीत पाते हैं
-दूसरों पर आपका फर्स्ट इंप्रेशन पॉजिटिव बनता है
-करियर में आगे बढ़ने में मदद मिलती है
-अपना स्टेटस बेहतर करने में मदद मिलती है
- मैनर्स फॉलो कर कई बार आप खुद को परेशानी से बचा लेते हैं तो कई बार आसपास के लोगों को
स्टाइल में रहने का...
-हमेशा मौके के मुताबिक कपड़े पहनें, मसलन देखें कि आप फॉर्मल, कैजुअल या सेलिब्रेशन कौन-से मौके पर शिरकत कर रहे हैं। ड्रेस ऐसी हो, जो आपकी स्ट्रेंग्थ को उभारे और कमजोरी को छुपाए।
- ड्रेस के मामले में हमेशा क्वांटिटी से ज्यादा क्वॉलिटी पर जोर दें। कोशिश करें कि अच्छे ब्रैंड के कपड़े खरीदें।
- सेलिब्रेशन या कैजुअल मौकों पर तो आप अपनी पसंद के मुताबिक कुछ भी पहन सकते हैं, लेकिन फेस्टिवल के मौकों पर महिलाओं के लिए साड़ी-सूट और पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा सबसे बेहतर है।
- किसी भी सेलिब्रेशन या फेस्टिवल में इतना हेवी न पहनें कि आप जरी या जूलरी की दुकान लगने लगें। अगर ड्रेस हेवी है तो मेकअप लाइट रखें। मैचिंग के चक्कर में दोनों को हेवी न करें। अगर लाइट ड्रेस है तो मेकअप थोड़ा हेवी करके फेस्टिव लुक बनाएं।
कॉर्पोरेट या फॉर्मल ड्रेसिंग
पुरुष और महिला, सभी को अपनी बॉडी शेप और कलर के मुताबिक ड्रेस चुननी चाहिए। कैजुअल या फेस्टिव मौकों पर हमें कुछ भी पहनने की छूट होती है, वहीं फॉर्मल ड्रेसिंग के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- फॉर्मल ड्रेसिंग में शर्ट बहुत अहम है। पूरी बाजू की प्लेन कॉटन शर्ट पहनना बेहतर रहता है। सिल्क की शर्ट पार्टी के मौकों पर पहन सकते हैं। सेमी-फॉर्मल मौकों पर सिल्क, कॉटन या वूलन भी पहन सकते हैं। ये फैब्रिक रिच लुक देते हैं, जबकि सिंथेटिक, पॉलिस्टर आदि क्लासी नहीं लगते। स्ट्राइप वाली शर्ट स्पोर्टी लुक देती है, तो डॉट वाला प्रिंट यूथफुल फील देता है। ब्लैक शर्ट फॉर्मल कतई नहीं है।
- पेंट की लंबाई इतनी हो कि नीचे से सॉक्स नजर न आएं। आधे शूज को कवर करनेवाली लंबाई सही है।
- कोट पहन रहे हैं तो उसके नीचे से शर्ट के करीब आधा इंच कफ दिखने चाहिए।
- टाई पहनें। टाई की लंबाई बेल्ट का बकल जहां शुरू होता है, उससे थोड़ा नीचे तक होनी चाहिए। इससे कम या ज्यादा लंबाई वाली टाई न पहनें।
- किसी भी पैंट या ट्राउजर में लूप्स हैं तो बेल्ट जरूर पहनें। फॉर्मल बेल्ट 1.5 इंच से ज्यादा मोटी न हो। बेल्ट का कलर और टेक्स्चर शूज से मैच करता होना चाहिए। आप ब्राउन, ब्लैक या ब्रिगैंडी कलर बेल्ट यूज कर सकते हैं।
- सॉक्स मिड लेंथ वाली होनी चाहिए। वाइट सॉक्स स्पोर्ट्स सॉक्स होती हैं, इसलिए इन्हें ऑफिस में न पहनें। ब्लैक सॉक्स पहन सकते हैं, बल्कि ब्लैक ट्राउजर के साथ ब्लैक कलर के सॉक्स ही पहनना चाहिए। सॉक्स शूज और ट्राउजर से मैचिंग होना चाहिए। सॉक्स साफ हों और उनसे बदबू नहीं आनी चाहिए।
- लेस वाले शूज फॉर्मल होते हैं। इसे लेकर कन्फ्यूज न हों।
- नेहरू जैकेट को भी फॉर्मल ड्रेस के तौर पर पहन सकते हैं। जैकेट में एक, दो या तीन कितने भी बटन हों, बैठते हुए बटन खुले रखें। अगर 3 बटन हैं तो आप ऊपर के दो या एक या फिर बीच वाला बटन बंद रख सकते हैं, लेकिन हर हालात में आखिर वाला बटन खुला रहेगा।
- फॉर्मल ड्रेसिंग में घड़ी भी काफी अहम है। वाइट या ऑफ वाइट डायल की गोल्डन, सिल्वर या लेदर स्ट्रैप वाली घड़ी पहनें। राइटिंग पेन आपके बिजनेस लुक को पूरा करता है।
- सारे मेटल एसेसरीज़ जैसे कि बेल्ट का बकल, घड़ी, कफलिंक्स और पेन मैचिंग यानी एक ही कलर के होने चाहिए।
- ऑफिस में डेनिम तभी पहनना चाहिए, अगर कंपनी पॉलिसी इसकी इजाजत देती हो। अगर डेनिम पहन रहे हैं तो वह स्ट्रेट फिट या लाइट बुक कट होनी चाहिए। टेपर्ड (चिपकी हुई) न पहनें, न ही बैगी (बेहद ढीली-ढाली) पहनें।
महिलाओं के लिए
- अपनी बॉडी शेप और स्किन टोन के मुताबिक कपड़ों का चयन करें। अगर ऑफिस की बात करें तो ड्रेसिंग में अपनी पोजिशन का भी ख्याल रखें, मसलन अगर आप सीनियर हैं तो गर्ल या बॉय लुक वाले कपड़ों से बचें। डार्क कलर से अथॉरिटी झलकती है तो लाइट कलर से आप ज्यादा अप्रोचेबल लगती हैं।
- ध्यान रखें कि ऑफिस या फॉर्मल मौकों पर स्किन शो न करें। जितना ज्यादा स्किन शो होगा, उतनी ही आपकी अथॉरिटी कम होती जाएगी। कपड़े ट्रांसपैरंट न हों और अंदर से इनरवेयर न नजर आएं। ड्रेस बहुत टाइट भी न हो।
- फॉर्मल ड्रेसिंग में शर्ट, ट्राउजर्स या स्कर्ट के अलावा साड़ी को भी दुनिया भर में फॉर्मल ड्रेस के तौर पर स्वीकार किया जाता है। स्कर्ट की लंबाई घुटनों तक होनी चाहिए। इससे लंबी या छोटी स्कर्ट फॉर्मल मौकों के लिए नहीं है। किसी फॉर्मल मौके पर साड़ी भी पहन सकती हैं। लेकिन साड़ी को ढंग से पिन-अप करके पहनें। ऐसे मौकों पर स्किनी या कलरफुल जींस न पहनें।
- फॉर्मल ड्रेस के साथ बैलीज़ या पीप शूज़ पहनें। सैंडल्स या स्लीपऑन्स बिल्कुल न पहनें। शूज में 1-3 इंच की हील हो। लाइट कलर के कपड़ों के साथ लाइट कलर के शूज पहनें और डार्क कलर कपड़ों के साथ डार्क कलर शूज। वाइट सैंडल सिर्फ साड़ी या सूट के साथ सही लगते हैं।
मेकअप और एसेसरीज
- हेयरकट चेहरे की शेप के मुताबिक हो। मसलन लंबे फेस पर ऐसा हेयरकट हो, जो आपके फेस को कम लंबा दिखाए। इसी तरह गोल फेस पर लंबा दिखानेवाला हेयरकट अच्छा लगता है। बहरहाल, स्टाइल या कट जो भी, बाल हमेशा संवरे होने चाहिए। बिखरे और उड़ते बाल खराब लगते हैं। बालों में जेल लगा सकते हैं, पर दिन में तेल लगाकर न रखें। गीले बालों में ऑफिस न जाएं। महिलाएं इस बात का खास ख्याल रखें क्योंकि उनके बाल सूखने में टाइम लगता है।
- पुरुष हमेशा अच्छी तरह शेव बनाकर रखें और महिलाएं आइब्रोज़ और अपर लिप्स को अच्छी तरह थ्रेडिंग कराके रखें। ध्यान रखें, दाढ़ी और मूंछ महिलाओं के लिए नहीं, पुरुषों के लिए हैं।
- जूलरी ऐसी हो जो आपकी पूरी पर्सनैलिटी को हाइलाइट करे, न कि सारा ध्यान उसी पर जाकर टिक जाए, यानी आप क्लासी दिखें, चमक-दमक क्वीन नहीं। हेवी जूलरी के बजाय डायमंड या पर्ल्स या स्टोन्स की हल्की जूलरी पहनें।
- आपके मुंह या शरीर से बदबू नहीं आनी चाहिए। अगर मुंह से बदबू आती है तो डॉक्टर से मिलें और ऐसी चीजें (लहसुन, प्याज, मूली आदि) न खाएं जिन्हें खाने से मुंह से बदबू आती हो। साथ ही, माउथ फ्रेशनर रेग्युलर तौर पर यूज करें।
- परफ्यूम या डियो जरूर लगाएं। डियो कम देर टिकता है, जबकि परफ्यूम लंबे समय तक काम करता है। डियो या परफ्यूम कपड़ों के बजाय शरीर पर लगाना चाहिए और इसके 3 स्प्रे काफी हैं। दिन में हल्की सुगंध और रात के फंक्शन के लिए हेवी परफ्यूम यूज करें। डेली वेयर के तौर पर यूज होनेवाले परफ्यूम 4000-6000 रुपये तक में मिल जाते हैं।
- हल्का मेकअप करें। इसके बिना आपका लुक अधूरा है। मेकअप में पहले सनस्क्रीन, फिर मॉश्चराइजर लगाएं। इसके बाद स्किन से मैचिंग फाउंडेशन लगाएं। अच्छी तरह ब्लेंड (मिलाना) कर लें। मस्कारा लगाएं। ऑफिस में रेड/मरून लिपिस्टिक के बजाय पिंक, पीच जैसे पेस्टल शेड यूज करें। लिपस्टिक खराब नहीं भी हुई है तो भी एक साल से ज्यादा यूज न करें।
- बेहतर है कि नाखून अच्छी तरह शेप में हों और साफ हों। अगर ऑफिस में नेल पेंट लगाना चाहते हैं तो न्यूड या ट्रांसपैरंट्स नेट पेंट लगाना बेहतर है।
- पर्स भी शरीर के साइज के मुताबिक यूज करें तो बेहतर है। यानी अगर आप दुबली-पतली और छोटी हैं तो बहुत बड़े साइज का पर्स अच्छा नहीं लगेगा। इसी तरह लंबी या मोटी महिलाओं पर बहुत छोटा पर्स नहीं फबेगा।
कम्यूनिकेशन
- फोन पर बात करने का भी सलीका है। कभी भी जोर से चिल्ला-चिल्ला कर बात न करें। किसी को भी फोन करें तो पहले अपना नाम, फिर कंपनी का नाम या जिस भी पहचान से वह पहचान बताएं, उसका जिक्र स्माइल के साथ करें। स्माइल के साथ बात करेंगे तो फोन के दूसरी ओर मौजूद शख्स को आपकी आवाज से यह महसूस हो जाएगा, बेशक वह आपको देख न पा रहा हो।
- ऑफिस या सर्वजनिक जगहों पर फोन साइलंट मोड पर हो तो बेहतर है। रिंगटोन का वॉल्यूम कम रखें और धूम-धड़ाके वाले फिल्मी गानों को रिंगटोन बनाने से परहेज करें। किसी के कॉल को 20 सेकंड से ज्यादा होल्ड न करें। अगर बीच में दूसरी कॉल अटेंड करना जरूरी है तो पहले वाली को सॉरी बोलकर काट दें। दूसरी कॉल अटेंड करके पहले वाले शख्स को दोबारा फोन मिलाएं।
- आस-पास लोग हैं तो कोशिश करें कि अपनी मदर टंग में बात न करें। अगर करना ही चाहते हैं तो बाहर जाकर बात करें।
- जब किसी से मिलें तो विजिटिंग कार्ड दोनों हाथों में थामकर सामनेवाली की आंखों में आंखें डालकर दें। इससे आपका कॉन्फिडेंस दिखता है और ऑनर भी। इसी तरह विजिटिंग कार्ड रिसीव भी दोनों हाथों से करना चाहिए। एक बार कार्ड लेकर उस पर निगाह जरूर डालें।
- ऑफिस की ईमेल्स लिखते हुए प्लीज और थैंक्यू यूज करें। शुरुआत डियर से करें। ऑफिशल मेल्स की सब्जेक्ट लाइन शॉर्ट और क्रिस्प होनी चाहिए। ऑफिस के मेल रेड कलर में न लिखें, न ही कैप्स ऑन करके लिखें। नीचे अपना नाम जरूर लिखें।
- अगर किसी इन्विटेशन के नीचे RSVR लिखा है तो इसका मतलब है कि अपनी मौजूदगी या गैर-मौजूदगी को कन्फर्म करें यानी आप प्रोग्राम में आएंगे या नहीं, यह पहले से बता दें।
डाइनिंग
- अगर किसी रेस्तरां में बैठे हैं तो वेटर को बुलाने के लिए उसकी तरफ देखें। एक बार आई कॉन्टैक्ट होने के बाद उस उंगली से इशारा करके बुलाएं। जब वह करीब आ जाए तो नेम प्लेट पर उसका नाम पढ़ें और उसके नाम से बुलाएं। नेम प्लेट नहीं है तो वेटर का नाम पूछें और फिर बुलाएं।
- कटलरी और गिलासों की पहचान कर लें। मसलन कौन-सा स्पून या फोर्क किस काम का है, यह जान लें। मेन कोर्स के लिए बड़े स्पून और फोर्क यूज होते हैं, जबकि स्टार्टर, सलाद और डेजर्ट के लिए छोटे।
- रेड वाइन का गिलास थोड़ा बड़ा और गोल होता है, जबकि वाइट वाइन का पतला और लंबा। सबसे बड़ा गिलास पानी का होता है।
- अगर आप शराब नहीं पीते तो भी गिलास में डालने और सबसे साथ चीयर्स करना चाहिए। इसके बाद बेशक आप न पिएं।
- नैपकिन को खोलकर गोद में बिछा लें। गले में न लगाएं।
- मुंह खोलकर या मुंह से आवाज करके न खाएं। अगर स्पून नीचे गिर गया है तो उसे यूज न करें और न ही खुद उठाएं। खुद सर्व करने या प्लेट समेटने के बजाय यह काम वेटर को करने दें।
- कोई नमक मांगे तो साथ में मिर्च भी दें। दोनों को साथ देना मैनर्स में आता है। रोटी या सब्जी पहले अपने राइट साइज वाले को बढ़ाएं।
- अगर मुंह गंदा हो गया है तो नैपकिन को तिकोना करके पहले और दूसरी उंगली के बीच फंसा लें और उस कोने से मुंह को साफ करें। पूरा चेहरा या नाक कभी नैपकिन से साफ न करें।
- अगर घर में किसी को खाने पर इन्वाइट किया है तो प्लेट्स उठाते वक्त सारी प्लेट्स का बचा खाना एक में डालकर सारे प्लेट्स एक के ऊपर एक रखकर उठाने की कोशिश न करें। एक बार में एक प्लेट उठाएं और अंदर रखकर आएं।
लिफ्ट और एस्क्लेटर
- लिफ्ट में चढ़ते हुए पहले अंदरवालों को बाहर निकलने दें, फिर अंदर जाएं। अंदर जाकर बीच में या आगे की तरफ खड़े न हों, चाहे आपको पहले ही क्यों न उतरना हो। पीछे के कोने में जाएं, दूसरा कोई आए तो उसे दूसरे कोने में जाना चाहिए। इसी तरह चारों कोनों के भरने के बाद बीच की जगह पर लोगों को खड़ा होना चाहिए।
- एस्क्लेटर पर चढ़ने के बाद उसे सीढ़ियों की तरह यूज न करें यानी एक जगह खड़े होने के बाद वहीं खड़े रहें। सीढ़ियों की तरह ऊपर चढ़ते न जाएं। इससे आगे खड़े लोगों को असुविधा होती है। यही करना है तो सीढ़ियां यूज करें।
कुछ और खास बातें
- किसी से भी मिलते हुए अपनी बॉडी लैंग्वेज का ख्याल रखें। आपका अपने शब्दों पर कंट्रोल हो सकता है, बॉडी लैंग्वेज पर नहीं। बॉडी लैंग्वेज बहुत-सी बातों को बिना कहे ही बता देती है। आप किसी से कहना नहीं चाहते कि उसकी वजह से आपके काम में दखल हो रहा है तो पहले आप बार-बार घड़ी देखेंगे। अगर वह नहीं समझा तो फिर आप खड़े हो जाएंगे। फिर दरवाजे की तरफ बढ़ने लगेंगे। इससे आपके बिना बोले भी सामनेवाला समझ जाएगा कि आप लेट हो रहे हैं और अब उसे एंटरटेन नहीं कर सकेंगे। ऐसा करते हुए सामनेवाले को आपकी बॉडी लैंग्वेज से अकड़ूपन या बेरुखी नजर नहीं आनी चाहिए।
- सोशल एटिकेट्स की बात करें तो वहां जेंडर काफी मायने रखता है यानी महिलाओं को तवज्जो या प्राथमिकता देनी चाहिए लेकिन बिजनस एटिकेट्स में सीनियॉरिटी ज्यादा मायने रखती है। वहां जेंडर से कोई सरोकार नहीं होता। जो सीनियर है, उसे ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
- अपने फैमिली वालों या दोस्तों के अलावा किसी के भी साथ कैजुअल नहीं होना चाहिए। एक फुट तक पर्सनल स्पेस होता है। अजनबियों या फॉर्मल रिलेशनशिप वालों के इससे ज्यादा करीब जाने की कोशिश न करें।
- अगर आप किसी गेट से बाहर या अंदर हो रहे हैं और दूसरे लोगों के साथ हैं तो सबसे लिए लिए गेट खोलकर खड़े होने की जरूरत नहीं है। लाइन में जो आगे है, वह दूसरे के लिए खोलेगा, उससे पीछे वाला अपने पीछेवाले के लिए गेट खोलकर रखेगा, जब तक कि वह उसे पकड़ न ले।
- किसी महिला के लिए घर, ऑफिस या कार का दरवाजा खोलना या उसे सीट ऑफर करना भी मैनर्स में आता है। इसके अलावा बुजुर्गों के लिए भी गेट खोलें और सीट ऑफर करें।
- और आखिर में, अगर आप दूसरों से इज्जत चाहते हैं तो आपको उन्हें इज्जत बख्शनी होगी। फिर चाहे, भाषा हो या बॉडी लैंग्वेज... आपको इन पर संयम रखना होगा।पाइए संडे
भूलकर भी नहीं पूछने चाहिए इंटरव्यू में ये सवाल
इंटरव्यू के समय आपको कुछ चीजों का खास ख्याल रखना पड़ता है. जैसे आपने कैसे कपड़े पहने हैं, आप खुद को किस तरह से प्रेजेंट कर रहे हैं, आपका व्यवहार इंटरव्यू के समय कैसा है. इंटरव्यू का मतलब सिर्फ यह नहीं होता कि आप इंटरव्यूअर के सवालों का जवाब ही देते रहें. इंटरव्यूअर अपेक्षा करता है कि आप भी उससे कुछ सवाल पूछे. ऐसा करने से इंटरव्यूअर को लगता है कि नौकरी के लिए आप भी इच्छुक हैं.
लेकिन सवाल पूछते समय आपको कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए. हम आपको बताएंगे ऐसे कुछ सवाल जो भूल कर भी आपको नहीं पूछना चाहिए.
1. क्या शेड्यूल, जॉब डिट्ल्स और सैलरी बदलने की कोई संभावना है?
याद रखिए कि आप वहां नौकरी पाने गए हैं ना कि वहां के पैटर्न को बदलने.
2. अपने इंटरव्यूअर से यह ना पूछे कि आपने क्या किया है ? कहां से किया है ? और क्यों किया है ?
इंटरव्यू्र से निजी सवाल पूछने से बचे.
3. सैलरी कौन से तारीख को मिलती है ?
ऐसा पूछने की सोचिएगा भी मत. यह दिखाता है कि आप सिर्फ सैलरी में इंटरेस्टेड हैं. अगर आप टैलेंटेड हैं तो सैलरी अच्छी मिलेगी ही. पहले इंटरव्यूअर को परख लेने दीजिए कि आपमें कितनी प्रतिभा है. उसके बाद आपको कुछ परेशानी हो तो शांत तरीके से इंटरव्यूअर से बात करें.'
4. इंटरव्यू कैसा रहा ?
इस सवाल को जानने की इच्छा तो आप में बेशक होगी लेकिन इस सवाल को पूछकर आप अपनी नौकरी खतरे में डाल लेते हैं. अच्छा यही होगी कि इस सवाल को गलती से भी नहीं पूछे.
5. छुट्टी कौन से दिन मिलती है?
अगर आप इंटरव्यू देने गए हैं तो इसका मतलब है कि आपको जॉब चाहिए. आपको ऐसा इम्प्रेशन नहीं देना चाहिए कि आपको अभी से ब्रेक की तलाश है. 'कभी ऑफ के बारे में मत पूछिए . इससे लगता है कि आप काम से भागना चाहते हैं. आपको यदि ऑफिस में देर तक रुकना पड़े तो उससे भी हिचकिचाना नहीं चाहिए.'
6. मेरा प्रमोशन कब होगा ?
अभी तक आपको नौकरी भी नहीं मिली, तो आप प्रमोशन की बात कैसे कह सकते हैं.
7. क्या आप मेरी सोशल नेटवर्किंग प्रोफाइल मॉनिटर करेंगे ?
कुछ बातें ना कहने में ही भलाई होती है. हम समझ सकते हैं कि आपको अपनी सोशल सिक्योरिटी की चिंता है लेकिन यह प्रश्न ना पूछना ही ठीक रहेगा.
8. काम करने का समय क्या है ?
अगर आप यह जताना चाहते हैं कि आप काम करने से ज्यादा आराम करना चाहते हैं तो यह सवाल जरूर पूछें. अगर नहीं तो इस सवाल को कुछ समय तक बचा कर रखें.
9. कम्पटीशन कौन है ?
यह दिखाएगा कि आपमें जागरुकता की कमी है और आपने रिसर्च भी नहीं किया है. यह सवाल ना पूछे. अगर पहले रिसर्च नहीं किया है तो बाद में कर लें.
10. कोई सवाल ही ना पूछना...
सवाल ना पूछने की गलती भी ना करें. यह रुचि और समझ की कमी दिखाता है. ऐसा करने से इंटरव्यूअर को ऐसा लग सकता है कि आप किसी भी परिस्थिती से समझौता कर लेंगे.
मजेदार सवाल जवाब - एक सीख देती मजेदार और रोचक इंटरव्यू
हम जिंदगी में सफलता पाने के लिए कई बार वो करते हैं जो हम सही ढंग से नहीं कर सकते। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम “दुनिया क्या कहेगी?” इस बारे में सोचते हुए जिंदगी निकाल देते हैं। लेकिन इसके स्थान पर अगर हम वो काम करें जो हम कर सकते हैं तो हम जल्द ही सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस सोच से भी आगे की सोच को जाहिर करता हुआ एक मजेदार सवाल जवाब इंटरव्यू हम आपके लिए लेकर आये हैं। आइये आनंद लेते हैं इस मजेदार सवाल जवाब का :-
मजेदार सवाल जवाब - एक रोचक इंटरव्यू
इंटरव्यूवर :- अपने बारे में बताएं।
कैंडिडेट :- मैं रामेश्वर कुलकर्णी हूँ। मैंने बबनराव ढोले पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से टेलीकम्यूनिकेशन में इंजीनियरिंग की है।
इंटरव्यूवर :- बबनराव ढोले पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी? मैंने इस कॉलेज का नाम पहले कभी नहीं सुना!
कैंडिडेट :- पता था मुझे सर! आप ऐसा बोलोगे, मैंने खुद एडमिशन लेने से पहले इस कॉलेज के बारे में कभी नहीं सुना था।
हुआ क्या कि – वर्ल्ड कप होने की वजह से बारहवीं में मेरे नंबर कम आये। मुझे एक कॉलेज में पैसे देकर सीट मिल रही थी। पर मेरे पिता जी ने कहा ( मैं उन्हें “बाप” कहना पसंद करता हूँ ) :-
“मैं तुम्हारी पढ़ाई पर ज्यादा पैसे नहीं लगा सकता।“ (बाप ने असल में कहा था कि :- मैं तुम्हारे ऊपर पैसे बर्बाद नहीं करूँगा) इसलिए मुझे ये कॉलेज ज्वाइन करना पड़ा। साफ़ बताऊँ तो मुझे लगता है कि बबनराव ढोले पाटिल नाम क्षेत्रीय महाविद्यालय से सम्बंधित हो सकता है।
टरव्यूवर :- ठीक है, ठीक है। ऐसा लगता है कि इंजीनियरिंग खत्म करने में ही आपको 6 साल लग गए।
कैंडिडेट :- बात ऐसी है कि मैंने इसे 4 साल में ख़त्म करने की कोशिश की थी। पर क्या बताऊँ , ये क्रिकेट मैच, फुटबॉल वर्ल्ड कप और टेनिस टूर्नामेंट। एकाग्रता बनानी कितनी मुश्किल है सर। इसी वजह से तो मैं दूसरे और तीसरे साल में फेल हो गया। ऐसे मुझे कुल मिलाकर 4+2= 7 साल लग गए।
इंटरव्यूवर :- लेकिन 4+2 तो 6 होते हैं।
कैंडिडेट :- ऐसा क्या ? आप जानते हैं मैं हमेशा मैथ में गलती कर देता हूँ । लेकिन मैं इसे दिमाग में रखने की कोशिश करूँगा। 4+2 = 6 होता है, सही है, धन्यवाद। ये क्रिकेट मैच परीक्षाओं पर बहुत प्रभाव डालते हैं…..मेरे ख्याल से इन पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
इंटरव्यूवर :- जानकर अच्छा लगा, आप चाहते हैं कि क्रिकेट मैच पर प्रतिबंध लगना चाहिए।
कैंडिडेट :- नहीं, नहीं….मैं तो परीक्षाओं की बात कर रहा हूँ !!
इंटरव्यूवर:- ठीक है, जिंदगी में आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है ?
कैंडिडेट :- जाहिर सी बात है, मेरा इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करना। मेरी माँ ने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं इसे पूरा कर सकूँगा। जब मैं तीसरे साल फेल हुआ था, माँ कुछ रिश्तेदारों की मदद से BEST ( Bus corporation in Maharashtra ) में मेरे लिए नौकरी तलाश रही थीं।
इंटरव्यूवर:- क्या आपका उच्च शिक्षा प्राप्त करने का कोई विचार है।
कैंडिडेट :- हाहाहाहा…… क्या आप मजाक कर रहे हैं ? “निम्न” (Lower) स्तर की शिक्षा प्राप्त करना ही काफी दुखदायक रहा मेरे लिए।
इंटरव्यूवर:- चलो अब टेक्निकल बातें करते हैं। आप ने किस प्लेटफॉर्म(Level) पर काम किया है ?
कैंडिडेट :- ह्म्म्म्म, मैं SEEPZ में काम करता हूँ, इसलिए आप कह सकते हैं की इस समय मैं अँधेरी प्लेटफॉर्म(rly.stn.) पर काम कर रहा हूँ। पहले मैं वाशी सेंटर पर था। इसलिए तब वाशी मेरा प्लेटफार्म था। जैसा कि आप देख सकते हैं की मुझे अलग-अलग प्लेटफार्म का अनुभव है! (वाशी और अँधेरी मुंबई में जगहों के नाम हैं)
इंटरव्यूवर:- और आप कौन सी भाषा(comp. Language) इस्तेमाल करते थे ?
कैंडिडेट :- मराठी हिंदी, अंग्रेजी। वैसे मैं जर्मनी, फ्रेंच, रुसी और भी कई भाषाओ में चुप रह सकता हूँ।
इंटरव्यूवर:- VB से VC बेहतर क्यों है ??
कैंडिडेट :- ये तो कॉमन सेन्स की बात है सर :- C हमेशा B के बाद आता है। इसलिए VB से VC बड़ा है। मैंने सुना है की जल्दी ही एक नई भाषा VD भी आ रही है।
इंटरव्यूवर:- क्या आप असेम्बली लैंग्वेज(Assembly Language) के बारे में कुछ जानते हैं ?
कैंडिडेट :- मैंने इसके बारे में सुना तो नहीं है। लेकिन जहाँ तक मेरा अंदाजा है ये वो लैंग्वेज है जो हमारे MP और MLA असेम्बली में प्रयोग करते हैं।
इंटरव्यूवर:- आपका जनरल प्रोजेक्ट का क्या अनुभव है ?
कैंडिडेट :- प्रोजेक्ट के बारे में मेरा अनुभव इतना है कि :- ज्यादातर वो पाइपलाइन में ही मिलते हैं।
इंटरव्यूवर:- क्या आप अपनी मौजूदा नौकरी के बारे में बता सकते हैं ?
कैंडिडेट :- जरूर, इस समय मैं बाटा इन्फो टेक(BIL – Bata info tech) में काम कर रहा हूँ। BIL ज्वाइन करते समय मैं बेंच(Bench) पर था। BIL ज्वाइन करने से पहले मुझे लगा था की बेंच(Bench) Windows की तरह कोई दूसरा सॉफ्टवेयर है।
इंटरव्यूवर:- क्या तुम्हारे पास कोई प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का अनुभव है ?
कैंडिडेट :- नहीं, पर मुझे लगता है की ये ज्यादा मुश्किल नहीं होना चाहिए। मुझे Word और Excel आता है। मैं बहुत सी बातें कर सकता हूँ। मैं जानता हूँ की इंटरनेशनल फ़ोन कॉल कैसे करते हैं और स्पीकर कैसे इस्तेमाल करते हैं। और सबसे जरूरी बात मुझे कुछ शब्द ऐसे आते हैं जैसे - ‘Showstoppers ‘ , ‘hot fixes’, ‘SEI-CMM’, ‘quality’, ‘version control’, ‘deadlines’ , ‘Customer Satisfaction’ आदि। और मैं बहुत होशियारी से अपनी गलतियों के लिए दूसरों पर इल्जाम लगा सकता हूँ।
इंटरव्यूवर:- आपको हमारी कंपनी से क्या उम्मीदें हैं ?
कैंडिडेट :- ज्यादा कुछ नहीं
1. मुझे 40,000 मेरे हाथ में मिलने चाहिए।
2. मैं एक Live EJB प्रोजेक्ट पर काम करना चाहूँगा। लेकिन इसकी कोई समय सीमा नहीं होगी। मुझे लगता है कि इस तरह का दबाव टैलेंट पर गलत प्रभाव डालता है।
3. मैं समय के बदलाव में विश्वास रखता हूँ।
4. ड्रैस कोड मौलिक आज़ादी( basic freedom) के खिलाफ है इसलिए मै जीन्स और टी-शर्ट पहन कर आऊंगा।
5. शनिवार और रविवार को छुट्टी होनी चाहिए। मैं बुधवार को भी छुट्टी करने की सलाह दूंगा, ताकि ज्यादा काम करने से किसी को परेशानी ना हो जाये।
6. मैं साल में 3 बार 1-2 महीने के लिए काम के सिलसिले में विदेश जाना चाहूँगा। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जाने का मौका मिले तो और अच्छा होगा। लेकिन अगर देखा जाये तो चीन में ओलंपिक गेम्स होने वाले हैं। अगर आप मुझे उस दौरान वहां भेजेंगे तो मुझे कोई परेशानी नहीं है।
अब आप देख ही चुके हैं की मैं कितना संकोची हूँ और मुझे कुछ ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं। तो क्या मैं अपनी सिलेक्शन पक्की समझूँ।
इंटरव्यूवर:- हाहाहाहाहा….. हमारी कंपनी में दिलचस्पी दिखने के लिए धन्यवाद। आज तक मुझे कभी इतना मजा नहीं आया। INFOSYS में आपका स्वागत है।
उस आदमी को HRD of Infosys में नए बने सेक्शन “Stress management” में नौकरी दे दी गयी।
इंटरव्यू में सफल होने के लिए ऐसे करें तैयारी अवश्य मिलेगी सफलता
कर्इ लोग इंटरव्यू में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब नहीं हो पाते है, इस वजह से उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ता है। वहीं कई लोग इसके लिए अपनी तैयारी पूरी नहीं कर पाते हैं, और वे नौकरी से वंचित रह जाते हैं। लेकिन अगर आप इंटरव्यू के लिए जाने से पहले इन बातों का ध्यान रखेंगे तो अवश्य आप नौकरी पाने में कामयाब रहेंगे। ताे आइए जाने कैसे आप लाेग आसान तरीेके से इंटरव्यू में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
इंटरव्यू के लिए जाने से पूर्व कंपनी की वेबसाइट को अच्छी तरह से देखें। हो सकता हो आपको इंटरव्यू में कुछ ऐसी जानकारी काम आ जाए, जो कंपनी की बेसिक जानकारियों में से एक हो।
मौजूदा समय में अधिकतर कंपनियां लिंक्डइन प्रोफाइल का सहारा लेती है। इसके माध्यम से आप कंपनी से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
कंपनी की वेबसाइट और लिंक्डइन प्रोफाइल के अलावा आप सोशल मीडिया के माध्यम से भी कंपनी से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जैसे- फेसबुक, ट्विटर आदि।
यदि आप किसी कंपनी में इंटरव्यू के लिए जा रहे हैं, और आपका कोई परिचित वहां काम करता हो तो आप उनसे भी कंपनी के वातावरण और बैकग्राउंड सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इंटरव्यू में किसी भी कंपनी की प्राेफाइल का ध्यान हाेना अति आवश्यक है।
नौकरी क्यों मिलनी चाहिए का दें सही जवाब
अक्सर इंटरव्यू में यह सवाल पूछा जाता है कि आखिर आपको यह नौकरी क्यों मिलनी चाहिए... और इसका मतलब स्पष्ट है कि मैनेजमेंट आपसे दो बातें जानना चाहता है कि आप में दूसरों के मुकाबले क्या खास बात है तथा आप उनके संस्थान में क्यों आना चाहते हैं। यह सवाल सिर्फ आपसे ही नहीं पूछा जाता है, बल्कि आपके साथ इंटरव्यू के लिए आने वाले सभी उम्मीदवारों से पूछा जाता है और जिसका जवाब सबसे बेहतर होता है उसकी नौकरी पाने की संभावना भी बढ़ जाती है।
इस बात को जान लें कि किसी भी व्यक्ति को कंपनी में शामिल करते हुए एच.आर. मैनेजर बेहतर व्यक्ति के चयन को ले कर बहुत ज्यादा सतर्क होता है। ऐसे में यदि आप अपने बारे में ठीक से बताने में सफल होते हैं तो ही अपने लिए संभावना पैदा कर पाते
हैं। यह इतना साधारण सवाल भी नहीं है, जिसका आप कुछ भी जवाब दे देंगे, बल्कि इस सवाल का जवाब यदि बेहतर ढंग से दिया जाए,तो आप जॉब इंटरव्यू में सिलैक्ट हो सकते हैं।
1.पहचानें कि वे क्या चाहते हैं
किसी भी नई कंपनी में नौकरी के लिए अप्लाई करते हुए आपकी पहली कोशिश यही होनी चाहिए कि आप यह जान लें कि आपसे किस जिम्मेदारी को निभाने की उम्मीद की जा रही है। यदि आप उनके दिए ब्यौरे को ध्यान से पढेंगे तो जान जाएंगे कि उनकी मांग क्या है और उसके अनुरूप अपनी क्षमताओं को उनके सामने रख सकते हैं। अपने पद के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी के बाद उस कंपनी के बारे में भी आपकी जानकारी पुख्ता होनी चाहिए। कंपनी मार्किट में किस तरह की प्रतिष्ठा रखती है, यह तो हर कोई पता करता है, परंतु आपको जानना चाहिए कि उसके सामने चुनौतियां क्या हैं।
2. अपनी जरूरत न बताएं
नौकरी पाने की कोशिश करते हुए कभी भी मैनेजमेंट से यह न कहें कि आप ऊंचे पैकेज या घर के पास होने के कारण यह कंपनी ज्वाइन कर रहे हैं। ऐसे में नई जिम्मेदारी आपकी प्राथमिकता नजर नहीं आती है, तब लगता है कि आप अधिक सुविधाजनक जीवन की तलाश में इस नई नौकरी में आ रहे हैं और चुनौती उठाने से बचना चाहते हैं। याद रहे कि आप नौकरी मांग रहे हैं और इसलिए आपको यह बताना चाहिए कि आपके इस कंपनी में आने से क्या बदलाव आएगा और आप किस तरह अपनी तरफ से नई चीजें जोड़ेंगे। यह बताने की कोशिश करें कि आप कंपनी के लिए ज्यादा फायदेमंद होंगे।
3. खूबियों का जिक्र
इंटरव्यू के दौरान यह बताएं कि आपने अपनी पिछली कंपनी में किस तरह का प्रदर्शन किया है और वहां किन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के साथ आप जुड़े रहे हैं और नई कंपनी के लिए किस तरह महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। उन्हें बताएं कि किस तरह आप चीजों को आगे ले जाने में यकीन रखते हैं, जब आप इस तरह खुद को उनके सामने प्रस्तुत करेंगे तो आपके चयन की संभावना बढ़ जाएगी।
4. अपना उत्साह दिखाएं
इंटरव्यू में गुपचुप रहने की अपेक्षा अपना उत्साह दिखाएं कि आप इस नई कंपनी में आने के लिए उत्सुक हैं और उत्साहित भी आपकी डिग्रियों से भी ज्यादा आपकी बातचीत ही आपके चयन का मुख्य आधार बनेगी। कंपनी आपको क्यों चुनें, इस प्रश्न का उत्तर देते हुए आपका उत्साह भी झलकना चाहिए।
5. सीधे तुलना न करें
बहुत सारे उम्मीदवार इस सवाल के जवाब में अपनी तुलना दूसरे उम्मीदवारों से करने लगते हैं, जब आप दूसरे उम्मीदवारों कोजानते भी नहीं हैं, तो उनके मुकाबले खुद को स्मार्ट और भरोसेमंद बताना जंचता नहीं है। इसकी अपेक्षा आप उनसे यह कह सकते हैं कि आप अपना काम बहुत ईमानदारीऔर यकीन के साथ करते हैं। दूसरों के मुकाबले खुद को खड़ा मत करें, सिर्फ अपनी खूबियों पर ही ध्यान दें।
6.घिसे-पिटे शब्दों से बचें
जब भी आप यह कहते हैं कि आपको नौकरी इसलिए मिलनी चाहिए, क्योंकि आप कड़ी मेहनत करते हैं या भरोसेमंद हैं या फिर टीम में अच्छी तरह काम करना जानते हैं तो याद रखें कि यह बात तो कोई भी कह सकता है। आप उन्हें कुछ रोचक आइडियाज दें।
संक्षेप में रखें बात
जब भी आपसे यह सवाल होगा कि कंपनी आपको क्यों रखे, तो आप अनुभव, योग्यता, खूबियों,ट्रेनिंग और शिक्षा के बारे में बताएंगे। इन सभी के बारे में आप संक्षेप में अपनी बात रखें, परंतु इन चीजों के बारे में तो सभी उम्मीदवार बताएंगे तो यह सोच कर रखें कि आप इस सवाल के जवाब में क्या अलग जवाब दे सकते हैं। आपमें ऐसी क्या बात है जो आपको दूसरों के मुकाबले अलग खड़ा करती है। याद रहे कि जो पूछा गया है जानकारी उसी पर फोकस रखें। यदि आप इधर-उधर ले जाने की कोशिश करेंगे तो यह आपके खिलाफ जाएगा।
नौकरी लेते समय न दें झूठी जानकारी
जल्द नौकरी हासिल करने या अत्यधिक महत्वाकांक्षा के चलते उम्मीदवार नौकरी मांगने के दौरान कई बार योग्यता संबंधी ऐसी जानकारी दे देते हैं, जो उनके पास होती ही नहीं। हकीकत सामने आने पर वे जॉब से तो वंचित हो ही जाते हैं, उनके आगे की राह भी कठिन हो जाती है। इसी मुद्दे पर संजीव चन्द की रिपोर्ट
शाइन डॉट कॉम के एक सर्वे के अनुसार वर्तमान समय में ज्यादातर संस्थान अपने कर्मचारियों द्वारा दिए जाने वाले शिक्षा संबंधी प्रमाण-पत्रों में गड़बड़ियों की समस्या से जूझ रहे हैं। एक कंपनी छोड़ दूसरी ज्वाइन करने पर दोनों में दी गई जानकारी में भी काफी अंतर देखने को मिल रहा है। यह सही है कि कंपनियां जॉब देते समय उम्मीदवार के पिछले तीन-चार साल का अनुभव, शैक्षिक योग्यता और अंतिम 4-5 साल का पता खंगालती हैं, लेकिन ज्यादातर कंपनियां सीनियर पद पर किसी को ज्वाइन कराते वक्त लचीला रुख अपनाती हैं। वे उम्मीदवार के प्रोफाइल व पैकेज को ही आधार बनाती हैं। सर्वे बताते हैं कि भारत ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन और अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी ऐसे उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा है, जो बायोडाटा में अपनी उपलब्धियों, अनुभव और शैक्षिक योग्यताओं के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर लिखते हैं। बाद में वेरिफिकेशन के दौरान उनकी गलतियां उजागर होती हैं। इन नेगेटिव वेरिफिकेशन रिपोर्ट से न सिर्फ उनकी नौकरी जाती है, बल्कि इंडस्ट्री में उनकी प्रतिष्ठा भी धूमिल होती है।
झूठ ने मुश्किल किए हालात
ग्लोबलाइजेशन और जॉब मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते हर कंपनी चाहती है कि वह कुशल व प्रतिभाशाली कर्मचारियों को नियुक्त करे। देश में जितनी ज्यादा नौकरियां हैं, उससे कई गुना ज्यादा नौकरी ढूंढ़ने वाले लोग। हर साल देश में लगभग 23 लाख ग्रेजुएट पैदा होते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर को उनकी पढ़ाई और स्किल्स के मुताबिक नौकरी नहीं मिल पाती।
एचआर कंसल्टिंग मैन पावर की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय कंपनियों में 61 प्रतिशत पद खाली हैं। सबसे ज्यादा अवसर सेल्स, आईटी, अकाउंटिंग, फाइनेंस व ऑफिस सपोर्ट जैसे सेक्टरों में मौजूद हैं। इनमें सही टैलेंट नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि आवेदन के समय उम्मीदवार अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ा कर लिख रहे हैं या झूठी सूचनाएं दे रहे हैं।
रेज्यूमे में दें सही जानकारी
एक अच्छी नौकरी पाने की तलाश में जुटे उम्मीदवार कई बार अपने रेज्यूमे में भ्रामक सूचनाएं दे जाते हैं। इसके चलते उन्हें शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ता है। इसलिए यदि आप किसी नई नौकरी के लिए रेज्यूमे देने जा रहे हैं तो अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों और उपलब्धियों के बारे में बताने से पहले विशेष सावधानी बरतें। जॉब की जरूरत के हिसाब से अपनी स्किल्स मैच कराएं। एक-एक बिन्दु का स्पष्ट उल्लेख करें, दूसरों का सीवी कॉपी करने से पहले बचें।
कानूनी कार्रवाई का खतरा
32 वर्षीय रोहन (बदला नाम) पर फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर शिक्षक की नौकरी करते समय पकड़े जाने पर नौकरी से बर्खास्तगी और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस से बचने के लिए आजकल वह फरार है। यह एक उदाहरण भर हो सकता है, पर रोहन जैसे असंख्य लोग इस तरह का फर्जीवाड़ा करते हैं। रेज्यूमे में गलत जानकारी देकर अच्छी नौकरी तो हासिल की जा सकती है, लेकिन पकड़े जाने पर नौकरी जाने के साथ-साथ कार्रवाई का खतरा मंडराता रहता है।
गलती आपकी, नुकसान कंपनी का
गलत सूचना देकर नौकरी हासिल करने वाले कर्मचारियों की मंशा कंपनी को नुकसान पहुंचाने की बेशक न हो, लेकिन वह उसकी कार्यनीति और परंपरा को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है। गलत सूचना देकर नौकरी हासिल करने पर कंपनी को अपने प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले अयोग्य प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग में पैसा लगाना पड़ता है। इससे उनको भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कंपनी की सुरक्षा की दृष्टि से घातक
अपने बारे में गलत सूचना देने वाले किसी भी ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदार पद पर बैठाना कंपनी की सुरक्षा की दृष्टि से घातक हो सकता है। चूंकि कंपनियों को गोपनीय सूचनाएं या डेटा लीक होने का खतरा रहता है, इसलिए ज्यादातर कंपनियां किसी व्यक्ति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से पहले उसकी पूरी छानबीन कराती हैं। कोई कंपनी कभी नहीं चाहती कि ऐसे लोगों को अपने यहां जॉब दे, जिनकी बुनियाद ही झूठ के सहारे रखी गई हो।
हो रही है ऑनलाइन मॉनीटरिंग
आजकल कई ऐसे एप प्रचलन में हैं, जिनके जरिये उम्मीदवार अपनी योग्यता, अनुभव व अन्य विवरण ऑनलाइन भेज सकते हैं। इसके लिए आवेदनकर्ता और नियोक्ता दोनों का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। इस आईडी नंबर के जरिये वे उम्मीदवार का पूरा वेरिफिकेशन कर सकते हैं। यह एप जल्द ही सोशल मीडिया ‘डिजिटल टैलेंट पूल’ के जरिये लोगों को नौकरी पर रखे जाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका अदा करेंगे। कंपनियां भी एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं, जो सीवी का विश्लेषण करता है।
बेरोजगारी से पनप रही समस्या
एक सर्वे के मुताबिक भारत में जितनी नौकरियां पैदा हो रही हैं, उनमें से करीब 90 प्रतिशत के लिए खास स्किल्स की जरूरत पड़ती है। इसकी ट्रेनिंग स्कूल-कॉलेज अथवा इंस्टीट्यूट में नहीं मिल पा रही, लिहाजा बड़ी आबादी बेरोजगारी का दंश झेल रही है। जल्दी नौकरी पाने की चाहत में उम्मीदवार कई बार झूठी सूचनाएं देकर नौकरी हासिल करने की कोशिश करते हैं या अपने नकारात्मक पहलुओं को छिपाने का प्रयास करते हैं।
इन रूपों में होती है हेराफेरी
क्वालिफिकेशन
उम्मीदवार आवेदन के दौरान कई बार ऐसी शैक्षिक योग्यता का जिक्र कर बैठते हैं, जो उनके पास होती ही नहीं या गलत तरीके से हासिल की गई होती है। ज्यादातर संस्थानों में आवेदन के दौरान ऐसा देखने को मिलता है। बैकग्राउंड चेकिंग फम्र्स के जरिये ऐसे फ्रॉड को पकड़ा जाता है।
फर्जी डिग्री
देश में कई ऐसे संस्थान चल रहे हैं, जिनकी मान्यता नहीं है या उनके कोर्स को संबंधित अथॉरिटी से मान्यता प्राप्त नहीं है। वहां की डिग्री फर्जी डिग्री की श्रेणी में आती है। कई बार अज्ञानता में तो कई बार जान-बूझ कर उम्मीदवार इन डिग्रियों का इस्तेमाल करते हैं।
सेलरी पैकेज
एक कंपनी से दूसरी कंपनी ज्वाइन करने पर सबसे अहम फैक्टर सैलरी पैकेज होता है। मोटा पैकेज पाने की चाहत में उम्मीदवार या तो अपनी स्लिप से छेड़छाड़ करते हैं या फर्जी सेलरी स्लिप बनवाते हैं। एचआर डिपार्टमेंट की छानबीन में इस तरह के मामले पकड़ में आ जाते हैं।
एक्सपीरिएंस
उम्मीदवार एक्सपीरिएंस सर्टिफिकेट के रूप में अकसर किसी ऐसे संस्थान से 2-3 साल का अनुभव दर्शाते हैं, जो वर्तमान में बंद हो चुका होता है या उसकी पुष्टि नहीं हो पाती। कई बार वे अनुभव के साल बढ़ा-चढ़ा कर दिखाते हैं। वे मान कर चलते हैं कि उनका खेल पकड़ में नहीं आएगा, पर वेरिफिकेशन में इस खेल से पर्दा उठ जाता है।
मैरिटल स्टेटस
सैन्य अथवा कई ऐसे सेवा क्षेत्र हैं, जिनमें अविवाहित उम्मीदवारों से आवेदन मांगा जाता है। ऐसे नौकरी के लिए विवाहित उम्मीदवार अकसर अपनी पहचान छुपा लेते हैं। इस आधार पर वे कई साल नौकरी भी कर लेते हैं। बैकग्राउंड अथवा एड्रेस वेरिफिकेशन में इसका पता चलता है।
क्रिमिनल रिकॉर्ड
उम्मीदवारों पर नौकरी के लिए आवेदन देने से पूर्व यदि कोई आपराधिक मामला दर्ज हुआ है तो वे आवेदन में इसका उल्लेख नहीं करते। इस तरह की प्रवृत्ति वाले उम्मीदवारों को कोई भी अपने यहां नहीं रखना चाहता। हेल्थकेयर व फाइनेंशियल कंपनियां ऐसी पृष्ठभूमि की जांच करवाती हैं।
जल्द नौकरी पाने के लिए Resume बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
हम में से कई सारे एेसे लोग होते है जो अपनी मौजूदा नौकरी से परेशान रहते है। कई बार उन्हें बॉस या काम को लेकर कई सारी समस्या होती है, लेकिन ज्यादातर लोगों के नई नौकरी तलाश करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस वजह से भी ज्यादातर लोग नौकरी नहीं छोड़ नहीं पाते। एेसे में अगर आप भी अपनी मौजूदा नौकरी से परेशानी है और जॉब स्विच करने की सोच रहे है तो आइए जानते है कुछ एेसे टिप्स के बारे में जिन्हें फॉलो करके आप आसानी से नौकरी पा सकते है
नेटवर्किंग
दूसरी नौकरी पाने में जो चीज सबसे ज्यादा आपके काम आती है, वो है 'नेवर्किंग'. फील्ड में रह कर बनाए गए कॉन्टैक्ट्स जॉब चेंज करने में काफी मदद करते हैं। किस कंपनी में जॉब वैकेंसी और किसमें नहीं ये आपके कॉन्टैक्ट्स ही आपको बताते हैं. इसलिए भले ही आप ऊंचे से ऊंचे मुकाम तक क्यों न पहुंच जाएं, कभी भी लोगों से अपना संपर्क न तोड़ें।
इवेंट्स अटेंड करें
नई नौकरी पाने के लिए आपको अलग-अलग संस्थानों या फिर चैरिटी द्वारा आयोजित किए गए इवेंट्स में शामिल होना चाहिए। आपको इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए और हर मीटिंग में अपनी फील्ड से जुड़े कम से कम एक व्यक्ति से जरूर मिलना चाहिए। क्या पता कब कौन जॉब दिलाने में आपकी मदद कर दे
लिंक्डइन का उठाएं फायदा
लिंक्डइन पर अकाउंट बनाने का फायदा आपको आपकी मनपसंदीदा जॉब भी दिला सकता है। लिंक्डइन सही लोगों से जुड़ने का एक पावरफुल माध्यम है। यहां पर आप अपने टारगेट मार्केट (जिसमें आप नौकरी ढूंढ रहे हों) को सर्च कर सकते हैं। लिंक्डइन के हर एक सेक्शन में अगर आप सही जानकारी फिल करते हैं और अपनी सर्च में सही कीवर्ड्स का इस्तेमाल करते हैं तो इससे दूसरों को आपके बारे में बेहतर पता चल पाता है।
जॉब साइट्स पर बनाए रखें नजर
नई जॉब तलाश रहे लोगों को लिंकडिन या फिर किसी और अॉनलाइन जैसे जॉब पोर्टल्स पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए। साथ ही आपको समय-समय पर अपना सीवी भी अपडेट करते रहना चाहिए। इसके अलावा जॉब से जुड़े ई-मेल्स पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए। इससे नौकरी पाने में आपको आसानी होगी।
इंटरव्यू में पूछे जाने वाले ये 10 सबसे कठिन सवाल, ऐसे दें इनका जवाब...
आज के दौर में किसी जॉब के लिए लिखित परीक्षा से ज्यादा कठिन इंटरव्यू पास करना होता है। सरकारी विभाग हो या निजी क्षेत्र आज हर जगह इंटव्यू के बगैर कैंडिटेट को हायर किए जाना संभव नही होता है। खासकर बिजनेस के क्षेत्र में, क्योंकि इंटरव्यू के जरिए कैंडिटेड की कैपेसिटी से लेकर उससे जुड़ी बातों का आकलन कर लिया जाता है। इस दौरान चयनकर्ताओं के सवालों के जवाब में ही कैंडिटेड की एक सही तस्वीर सामने आ जाती है। जिससे कई बार लोग लास्ट में होने वाले इन इंटरव्यू के सवालों से एक अच्छी जॉब से हाथ धो बैठते हैं। सबसे खास बात तो यह है कि इस दौरान कुछ सवाल तो ऐसे हैं जो काफी सरल होते हैं और लगभग हर इंटरव्यू में पूछे जाते हैं, लेकिन इनका जवाब कठिन होता है। ऐसे में आइए जानें इंटरव्यू में पूछे जाने वाले ये 10 सवाल...
*दुनिया के मशहूर इंटरव्यूवर जेम्स रीड कहते हैं कि अक्सर निजी कंपनियां इंटरव्यू में दिमाग चेक करने से के लिए कैंडिडेट से यह सवाल जरूर पूछती हैं कि लंदन में कितनी ट्रैफिक लाइट्स हैं ? इसका मतलब होता है कि आप दुनिया दारी की चीजों से मतलब रखत हैं या फिर सीमित रहते हैं।
*ली बिगिंस की फाउंडर सीवी लाइबरी कहती हैं कि कैंडिडेट की रिलीवेंसी चेक करने के लिए यह पूछा जाता है कि आप बैटमैन और सुपरमैन के अंतर को कैसे पहचानेंगे ? आपको जितना पता है उसी के आधार पर जवाब दे बिना गुमराह करे।
*पेनी दे वाक का कहना है कि कैंडिडेट कितना क्रिएटिव है। ये चेक करने के लिए एक कागज का टुकड़ा देकर पूछ जाता है कि इस पेपर के टुकड़े का क्या कर सकते है ? इस दौरान आप जिस कंपनी में जिस काम के लिए अप्लाई कर रह हैं उसी को ध्यान में रखकर जवाब दें।
*करियर राइटर पौल मैकेजिन कुमिंस के मुताबिक कैंडिटेट कैसा जवाब दे सकता है। इसे चेक करने के लिए कई बार यह पूछा जाता है कि अगर आपको पेंसिल के आकार में किसी एक ब्लेंडर में डाल दिया जाए तो आप से बाहर निकलने की कोशिश करेंगे? इन सवालों में काफी सोच समझकर जवाब देने की जरूरत होती है।
*जेम्स रीड का कहना है कि यह सवाल भी अक्सर पूछा जाता है कि आपके दिमाग का रंग कैसा है ? यह सवाल कैंडिडेट का मूड चेक करने के लिए पूछा जाता है। इस दौरान बिना घबडा़ए और कुछ ज्यादा सोचे बगैर किसी अपने फेवरेट कलर का नाम ले लें।
*आप गार्डेन गेम्स के बारे में क्या सोचते हैं? यह सवाल कैंडिडेट कंपनी की ग्रोथ में किस तरह की भूमिका निभा सकता है यह जानने के लिए पूछा जाता है। ऐसे में कैंडिडेट को नर्वस होने की बजाय काफी पॉजिटिव वे जवाब देना चाहिए।
*कैंडिडेट की मेमोरी चेक करने लिए अक्सर यह पूछा जाता है कि क्या आप 7 बौनों के नाम बता सकते हैं?ऐसे में अगर आपकों इन 7 बौनों के नाम नहीें याद हैं तो आप उन्हें गलत बताने या टाइम वेस्ट करने की बजाय बता दीजिए की इनके नाम काफी लंबे थे। इसलिए आप भूल गए हैं।
*अगर आप किसी क्रिएटिव डिजाइन आदि के लिए अप्लाई कर रहे हैं तो अक्सर ही आपकी क्रिएटिविटी चेक करने के लिए पूछा जाता है कि आप कौन सा फल बनना चाहोगे ? इसके जवाब में आपको यह जाहिर करना होगा कि आपने यह फील्ड क्यों चुनी है।
*अगर आपकी जिंदगी की खबर बने तो आप उसकी हेड लाइन क्या देना चाहोगे ? यह भी एक अहम सवाल है। इसके पीछे आपकी पर्सनालिटी औक्र एटीट्यूड को आपके ही शब्दों को जानने का मकसद होता है। ऐसे में साफ है कि अपनी पर्सनालिटी के मुताबिक जवाब दे।
*कई बार यह भी कह दिया जाता है कि आप कोई एक स्टोरी सुनाए..इस दौरान आपके दिमाग में कई सारी स्टोरी घूमने लगती हैं। ऐसें में आप इस जगह पर अपने प्रोफेशन, करियर, लक्ष्य को देखते हुए बिना ज्यादा सोचे स्टोरी नरेट करें। कोई कॉमिक या डाकू मवाली वाली स्टोरी कतई न सुनाएं।
इंटरव्यू में जाने से पहले ये पढ़ लीजिए, गदर काट देंगे
पहला पॉइंट न भुलाएं. इंटरव्यू में भूलकर भी ना कहें ये 5 बातें टाइप आर्टिकल तब लिखे जाते हैं जब अगले के पास स्टोरी आइडिया न हो. जो खुद का काम सस्ते में निपटाने के लिए ऐसा लिख रहा है. वो आपकी मदद क्या करेगा?
दरवाजे के भीतर जैसा मन आए वैसा (इंसानों सरीखे) घुसें. आप इंटरव्यू देने गए हैं. सलमान या अक्षय की फिल्म का इंट्री सीन नहीं चल रहा है. जो अगला आपका इंट्री सीन देखने बैठा हो.
हाथ और पैरों को क्रॉस करके न बैठें. ऐसा लिखने वालों से पूछे टेबल पार से सामने वाले को पैर कैसे दिखते होंगे बेई? इंटरव्यू में आई कांटेक्ट, और कंधों की स्थिति बताने वालों को पता होना चाहिए अगला मार्कशीट देखता है. जवाब सुनता है. ये नहीं नापता कि आपका कंधा साढ़े तेरह डिग्री में झुका है या आई कांटेक्ट 1.3 माइक्रो सेकंड को हट गया था. कायदे से, आराम से बैठिए. जो पूछा जाए उसका जवाब वैसे ही दीजिए जैसा एक आम सवाल का जवाब दिया जाता है.
मुस्कान और हंसी. आप ज्यादा मुस्कुरा देंगे या हंस देंगे तो कोई आफत न होगी. बला सिर पर न टूट पड़ेगी. जितना हंसते-मुस्कुराते हैं उतने ही रहिए. अब ऐसा तो करेंगे नहीं कि हंसी आए और आप गाल दबाकर बैठे रहें. या उसने हाथी-चींटी वाली बात कह दी तो ही ही ही हंसिए. जैसी सिचुएशन हो हंसिए-बतियाइए. और अगले को इससे दिक्कत हो तो ऐसी (गंदा शब्द) जगह में काम न कीजिए, जहां कोई (गंदा शब्द) आपके हंसने से खौराता हो.
. अपने एक्शंस में धीमापन लाएं. और ऐसा सुझाव देने वाले को स्लो मोशन में लप्पड़ मार दें. क्यों? क्यों लोग ऐसी बात लिखते हैं? क्यों ऐसा बरगलाते हैं. लिखा रहता है आप अपने बॉडी मूवमेंट स्लो कर लीजिए. इससे आप खुद को ज्यादा आश्वस्त महसूस कर सकते हैं. प्लीज यार! इसके पीछे क्या लॉजिक है? क्विक सिल्वर न बन जाएं? ये तमाम बातें एक पॉइंट भरने को होती हैं.
प्रतीक्षालय में साथियों से बातचीत के क्रम में अनावश्यक बहस में न उलझें. हम बैल हैं? इंटरव्यू देने नहीं झगड़ने गए हैं. बे तुमको का लगता है. हम वहां वेटिंग रूम में बैठकर बाकियों को मार-मार भगा देंगे. सबसे झगड़ेंगे? हमको वहां यूएन की शांतिवार्ता करनी है? कश्मीर मुद्दे पर बहसवार्ता करनी है? हम बात ही काहे करेंगे? हाय-हैलो करेंगे. साइड से निकल लेंगे. कोई मुंह बनाईस तो लुक दे देंगे. भटस्प चला लेंगे. किसी से बहस काहे करेंगे.
जब तक बैठने को न कहा जाए बैठे नहीं. ये हमको विशुद्ध (गंदा शब्द) लगता है. काहे न बैठें. नौकरी मांगने गए हैं, भीख नहीं. और सुनो. पहली बात. ये जो ऐसी बात लिखते हैं इनने कहीं इंटरव्यू तो दिया होता नहीं. धंसते ही सबसे पहले वो लोग कुर्सी ऑफर करते हैं. आपको क्या लगता है आप इंटरव्यू देने जाएंगे और सामने वाला खड़ा रख कर आपका पेशेंस नापेगा? कुर्सी न देगा? जान लीजिए, इंटरव्यू बोर्ड में सलीके के आदमी होते हैं ब्रह्मराक्षस नहीं.
कभी न करें उल्टे सवाल. ये भी दर (गंदा शब्द) है. आप अपनी तैयारी करके जाइए. कंपनी के बारे में पढ़कर जाइए. अपना होमवर्क पूरा कर लीजिए. लेकिन जब बात पूछने की आए तो जो आपको पूछना हो वो पूछ लीजिए. ऐसा कोई फॉर्मेट नहीं होता कि आप ये या वो नहीं पूछ सकते. (गंदी गाली + ई की मात्रा) वाले सवाल छोड़कर, आप जब कहा जाए तो अपनी क्वेरीज रख सकते हैं. पैसा पूछने में भी बुराई नहीं होती. उस मामले में सबसे मुंहफट होना चाहिए.
पहला पॉइंट न भूलें. याद रखिए. वहां जो बैठा है वो आपको लेने बैठा है. रिजेक्ट करने नहीं. आपमें भास होगा. टैलेंट होगा तो वो आपको लेगा ही. बाकी आप कितना भी स्लो मोशन में घुस लो. जूता चिकना लो. टाई बांध लो. कमर का एंगल और बालों में इस्त्री-प्रेस कर लो. टैलेंट न नजर आएगा तो न लेना. एक बात और वहां भी बहुत खखोरू लोग बैठते हैं, हो सकता है तुम्हारे घुसते ही तुमसे किलस जाए. फिर इंटरव्यू कितना भी अच्छा जाए न ही लेगा. तो बहुत टेंशन न लो, मजे से इंटरव्यू देने जाओ. एक इंटरव्यू के लिए खुद को न बदल दो.
जवाब दिलाएं जॉब
किसी भी पद के लिए ली जाने वाली लिखित परीक्षा प्रसिजर ऑफ रिजेक्शन होती है, जबकि इंटरव्यू प्रसिजर ऑफ सिलेक्शन होता है। कहने का मतलब यह है कि लिखित परीक्षा में आपका एम्प्लॉयर ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को रिजेक्ट करने के मूड से बैठता है। इसके उलट इंटरव्यू में एम्प्लॉयर सिलेक्ट करने के मूड में होता है। वह चाहता है कि आप कुछ ऐसा कहें जिसके बहाने वह आपको चुन ले।
जाहिर है, इंटरव्यू देने पूरी उम्मीद और भरोसे के साथ जाएं कि यह नौकरी आप ही को मिलेगी। लेकिन इस भरोसे और उम्मीद के ऊपर कुछ कारगर टिप्स की टॉपिग करना भी जरूरी है। एक्सर्पट्स से बात करके ऐसे ही कुछ टिप्स दे रहे हैं प्रभात गौड़:
पांच गलतियां
1. देर से पहुंचना
इंटरव्यू में देर से पहुंचने का मतलब है, एम्प्लॉयर पर आपका पहला इंप्रेशन ही गलत पड़ गया। तय समय से एक मिनट की देरी भी आपके सब किए कराए पर पानी फेर सकती है। जाहिर है, इंटरव्यू की जगह आदि के बारे में ठीक से पता कर लें और इस हिसाब से घर से निकलें कि समय से 10 मिनट पहले ही पहुंच जाएं।
2. खराब डेसिंग सेंस
इंटरव्यू रूम में घुसते ही सबसे पहला इंप्रेशन आपका डेसिंग सेंस डालता है। अगर कैजुअल, फंकी और स्टाइलिश बनकर इंटरव्यू देने जा रहे हैं तो समझिए आप शुरुआती लड़ाई ही हार गए। सही ड्रेस न होने से आपका कॉन्फिडेंस लेवल भी कम रहेगा इसलिए इंटरव्यू में जाने से पहले ड्रेस के बारे में सही से तय कर लें।
3. कम्यूनिकेशन स्किल्स में समस्या
अक्सर देखा जाता है कि कैंडिडेट के पास स्किल्स भी हैं, योग्यता भी है और अनुभव भी, लेकिन कम्यूनिकेशन स्किल्स में उसका हाथ तंग है। ऐसे में आपका पूरा अनुभव और स्किल्स कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाएंगे। एक ही माध्यम को अपनाएं। या तो सिर्फ अंग्रेजी या सिर्फ हिंदी। हिंग्लिश का प्रभाव गलत पड़ता है।
4. झूठ का सहारा
रेज्युमे में और इंटरव्यू के दौरान झूठ का सहारा लेना एक बड़ी गलती है। कई स्टूडेंट्स कभी झूठा अनुभव दिखा देते हैं तो कभी इंटरव्यू में पूछे गए सवालों के जवाब गोलमोल दे देते हैं। आजकल कंपनियां आपके दावों को क्रॉस चेक भी करने लगी हैं। बेहतर यही है कि जो बोला और लिखा जाए, वह पूरी तरह सही हो।
5. नेगेटिव एटिट्यूड
कई कैंडिडेट इंटरव्यू के दौरान थके हुए, उत्साहहीन, चिंतित या बोर नजर आते हैं। कई कैंडिडेट्स का रवैया इंटरव्यू बोर्ड के किसी सदस्य के साथ हठीला भी हो जाता है। ऐसी बातें कैंडिडेट की पर्सनैलिटी को नेगेटिव साबित करती है। पूरे इंटरव्यू के दौरान अपने व्यवहार और बॉडी लैंग्वेज का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
1. इंटरव्यू से पहले तैयारी
- रेज्युमे पढ़ें
इंटरव्यू देने जाने से पहले एक बार अपना रेज्युमे अच्छी तरह से पढ़ लें। कहीं ऐसा न हो कि आपने अपने रेज्युमे में कोई सूचना दे रखी है और पूछने पर कुछ और बता दिया।
- मॉक इंटरव्यू
इंटरव्यू देने जाने से पहले अपने दो-तीन साथियों के साथ दो-चार मॉक इंटरव्यू कर लें। मतलब आपके साथी इंटरव्यू बोर्ड बनें। आप उन्हें इंटरव्यू दें और उनसे अपना आकलन कराएं। हालांकि अचानक छोटी-सी कॉल पर होने वाले प्राइवेट कंपनियों इंटरव्यू में ऐसा करने का मौका नहीं मिलता, लेकिन अगर किसी सरकारी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जा रहे हैं तो मॉक इंटरव्यू जरूर कर लें।
- साथ क्या ले जाएं
आपके पास एक पूरी फाइल होनी चाहिए। इस फाइल में रेज्युमे की एक कॉपी रखें। सभी ओरिजनल सर्टिफिकेट और उनकी एक एक फोटोकॉपी हो और हो सके तो तीन फोटो भी अपने साथ रखें। पेन तो आपके पास होना ही चाहिए।
- ड्रेस का चुनाव
इंटरव्यू में जाने के लिए सिंगल ब्रेस्टेड सूट पहनना सबसे अच्छा होता है। कोट के सभी बटन लगाकर रखें। पैंट को हिप्स पर नहीं, वेस्ट पर बांधें। जहां तक रंग का सवाल है, ग्रे या नेवी ब्लू में से कोई भी एक कलर का सूट अपने लिए चुना जा सकता है। इसके नीचे वाइट कलर की शर्ट या फिर कोई और लाइट कलर की कॉटन शर्ट पहनें। इससे आपको पसीना कम आएगा और आप कंफटेर्बल महसूस करेंगे।
-टाई सिल्क की हो तो अच्छा है। इससे नॉट अच्छी लगती है। टाई का कलर शर्ट के कलर से कंट्रास्ट होना चाहिए।
-बेल्ट का कलर जूतों के कलर जैसा होना चाहिए और बेल्ट के बकल का कलर आपकी घड़ी से मैच करना चाहिए।
-जुर्राब आपके सूट के कलर से मैच करने चाहिए। ब्लैक सूट के साथ ब्लैक जुर्राब। ब्लैक जुर्राब गहरे रंग के किसी भी सूट के साथ चल सकते हैं।
-जूतों पर अच्छी तरह पॉलिश हो और उनके फीते टूटे-फटे न हों।
-जूलरी न पहनें तो ही अच्छा है, लेकिन अगर पहनना ही चाहते हैं, तो सिर्फ एक अंगूठी पहन सकते हैं। पुरुष कानों में भूलकर भी कुछ न पहनें। महिलाएं अंगूठी के अलावा कानों और नाक में बेहद जरूरी जूलरी पहन सकती हैं।
-महिलाएं हाई हील न पहनें। नेल पेंट और मेकअप न हो तो अच्छा है।
कैसे अपने अगले नौकरी साक्षात्कार में सफल होने के लिए
युक्तियां तुंहारी अगली नौकरी साक्षात्कार में मदद करने के लिए
एक नौकरी के लिए इंटरव्यू क्या है?
एक नौकरी साक्षात्कार आप और नियोक्ता के बीच एक वार्तालाप है. एक साक्षात्कार के दौरान नियोक्ता आप कई अतीत में अपने काम के अनुभव के बारे में सवाल करेंगे, अपनी शिक्षा और लक्ष्य.
साक्षात्कार के दौरान आप एक अच्छा प्रभाव बनाने के लिए चाहते हैं जाएगा. इसका मतलब यह है कि आप नियोक्ता बताते हैं कि आप इस काम के लिए एक अच्छे व्यक्ति हैं और बहुत दोस्ताना हो करने के लिए प्रयास करना चाहिए.
यहां अपने अगले नौकरी साक्षात्कार के लिए सुझाव है
1. गूगल और लिंक्डइन पर कंपनी ने की रिसर्च
साक्षात्कार से पहले, कंपनी के बारे में आप जितना जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. गूगल और लिंक्डइन पर सर्च करें इन सवालों के जवाब:
2. अपने रेज़्यूमे की समीक्षा करें.
आप पहले से ही बना दिया है और अपने फिर से शुरू में भेजा. (आप सीख सकते है कि कैसे एक फिर से शुरू कर पर हमारे कैसे एक नौकरी पृष्ठ को खोजने के लिए). यह महत्वपूर्ण है कि आप पढ़ आप साक्षात्कार से पहले फिर से शुरू. तुम कंपनियों आप काम किया है या अतीत में के लिए स्वेच्छा का वर्णन करने में सक्षम होना चाहिए.
3. अभ्यास उत्तर साक्षात्कार प्रश्न
किसी मित्र से पूछें, पड़ोसी, या अपने अंग्रेजी शिक्षक आप के साथ जवाब साक्षात्कार सवालों का अभ्यास करने के लिए. यहां कुछ आम साक्षात्कार सवाल और विचारों को मदद से आप उंहें जवाब दे रहे है.
आम साक्षात्कार प्रश्न: हमें अपने बारे में बताएं.
इस सवाल के लिए, आप के बारे में बात करनी चाहिए: अपने पिछले नौकरियां और व्यावसायिक अनुभव. तुम साक्षात्कारकर्ता बताना चाहिए कि तुम क्यों नौकरी के लिए आवेदन कर रहे है चाहता हूं. आप केवल व्यक्तिगत बातों के बारे में बात करनी चाहिए अगर वे नौकरी के लिए आवेदन कर रहे है से संबंधित है.
अपने बच्चों के बारे में बात मत करो, अपने शौक या अपने धर्म.
आम साक्षात्कार प्रश्न: आप क्यों चाहते हैं यह जॉब?
इस सवाल के लिए, आप के बारे में बात करनी चाहिए: आप नौकरी में क्यों रुचि रखते है; के बारे में क्यों आप कंपनी की तरह और अपने कैरियर के लक्ष्यों के बारे में.
पैसे के बारे में बात नहीं करते. मत कहो तुम्हे नौकरी मिल जाये. अपनी पुरानी नौकरी या पुरानी कंपनी के बारे में नकारात्मक बातें न बोलें.
आम साक्षात्कार प्रश्न: आपकी क्या ताकतें हैं?
इस सवाल के लिए, आप अपने व्यक्तिगत शक्तियों के बारे में बात करनी चाहिए. नौकरी विवरण या कंपनी को देखो. चीजों के बारे में सोचो कि तुम उस पर अच्छा काम के साथ मदद कर सकता है. उदाहरण के लिए, आप एक तेजी से शिक्षार्थी हो सकता है. तुम बात हो सकती है 3 भाषाएँ.
कहते हैं न कि आप नौकरी के लिए योग्य नहीं हैं.
आम साक्षात्कार प्रश्न: क्या हैं आपके कमजोरियों?
इस सवाल के लिए, तुम कुछ तुम पर सुधार किया है या एक बाधा आप का सामना करना पड़ा है के बारे में बात करनी चाहिए. उदाहरण के लिए, आप कह सकते हैं, “क्योंकि मैं एक शरणार्थी था, मैं अपने घर देश में हाई स्कूल खत्म करने के लिए नहीं मिला. हालांकि, क्योंकि शिक्षा मेरे लिए मूल्यवान है, मैं संयुक्त राज्य अमेरिका में स्कूल में वापस चला गया. हालांकि एक शिक्षा नहीं होने मेरे पीछे डाल दिया, मैंने पाया मैं एक त्वरित शिक्षार्थी हूं और सफल हो सकता है जब मौका दिया ।”
तुम जैसे बातें मत कहो: मैं हर समय देर हो रही है, मैं आलसी हूं, या मैं इस प्रकार की नौकरी के बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानता.
4. सुनिश्चित करें कि आप नौकरी के साक्षात्कार के स्थान पता.
आगे की योजना और अपने आप को अतिरिक्त समय दे. साक्षात्कार में पहुंचने की कोशिश 10 मिनट जल्दी. यदि आप बस ले जा रहे हैं, आप समय से आगे कंपनी के लिए बस की सवारी अभ्यास करना चाहते है तो तुंहें पता है कि यह साक्षात्कार के दिन पर है हो सकता है.
5. पेशेवर पोशाक
हमेशा एक साक्षात्कार करने के लिए साफ कपड़े पहनना. आप साक्षात्कार के लिए जाने से पहले एक शॉवर ले. अपने दाँत ब्रश और अपने बालों में कंघी.
एक साक्षात्कार के दौरान या पहले सुपारी या तम्बाकू नहीं चबाना. धूम्रपान नहीं करते हैं या एक साक्षात्कार से पहले शराब का उपयोग करें. धूम्रपान करने अपने कपड़े बुरी गंध महसूस कर सकते हैं और शराब में किसी भी नौकरी की अनुमति नहीं है.
सैंडल पहनना नहीं (फ्लिप फ्लॉप) एक साक्षात्कार के लिए. मोज़े और जूते पहनने. अच्छा पैंट और एक शर्ट खोजने की कोशिश. शॉर्ट्स या टैंक टॉप पहनना नहीं. टोपी नहीं पहन, मोजा टोपी, या एक साक्षात्कार के दौरान धूप का चश्मा.
6. जब तक आप धर्म या संस्कृति की वजह से नहीं कर सकते हाथ मिलाने के लिए सुनिश्चित करें
उनके handshakes अमेरिका में आम हैं और यह एक व्यक्ति से दूसरे लिंग के साथ हाथ मिलाने के लिए ठीक है. आप हाथ मिलाने के लिए नहीं करना चाहते हैं, वह भी ठीक है. इसके बजाय, अपने सीने के पार अपने हाथ प्लेस और थोड़ा आगे अपने सिर झुकाव. स्पष्ट रूप से कहो, “यह तो तुमसे मिलना अच्छा है. तुम समय लेने के लिए मुझे आज साक्षात्कार के लिए धंयवाद ।”
7. मुस्कान
मुस्कान के लिए प्रयास करें. इससे साक्षात्कारकर्ता पता चलता है आप सकारात्मक रहे हैं. हालांकि यह अपनी संस्कृति में से अलग हो सकता है, यह आप एक नौकरी पाने में मदद करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में कर सकते हैं सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है. जब आप साक्षात्कार में पहुंचें, तुम अलग लोगों द्वारा स्वागत किया जा सकता है. हर किसी को आप से मिलने और मुस्कान हर किसी के लिए विनंर होने की कोशिश.
8. आंखों में साक्षात्कारकर्ता देखो
आँख से संपर्क बनाने के लिए प्रयास करें. संयुक्त राज्य अमेरिका में, आँख से संपर्क बनाने सम्मान से पता चलता है और आप पर विश्वास लोगों में मदद करता है.
9. सुनिश्चित करें कि आपका फ़ोन बंद है.
साक्षात्कार से पहले अपने फोन बंद. साक्षात्कार के दौरान अपने फोन पर मत देखो. आप गलती से भूल जाते हैं और अपने फोन की घंटी बजती, इसे तुरंत बंद करें या इसे मौन. इसका जवाब नहीं.
10. तुम्हारा सबसे अच्छा है
याद रखें, आप पहले से ही सबसे कठिन हिस्सा किया है क्योंकि आप पहले से ही नौकरी साक्षात्कार मिल गया. आप पहले से ही तैयार है. अब तुंहारा सबसे अच्छा करने के लिए समय है.
11. एक से कम एक प्रश्न पूछें
साक्षात्कार के अंत में, एक से कम एक प्रश्न पूछें. इससे पता चलता है कि आप नौकरी और कंपनी में interstsed हैं.
सैलरी के बारे में सवाल नहीं पूछते (भुगतान) या समय बंद. आप इन सवालों के बाद पूछ सकते हैं, जॉब ऑफर मिलने के बाद.
12. साक्षात्कार के बाद एक धंयवाद ईमेल या पत्र भेजें
छोड़ने से पहले, व्यक्ति के कार्ड के लिए पूछें ताकि आप उंहें एक धंयवाद नोट भेज सकते है. अगर आपको नौकरी नहीं मिलती, उंहें एक ईमेल भेजें और उंहें पूछना अगर वे तुंहें क्यों तुम नौकरी नहीं मिली पर प्रतिक्रिया दे देंगे.
शुभकामनाएँ! हमें उंमीद है कि इस मदद से आप एक नौकरी साक्षात्कार के लिए तैयार हो जाओ.
अंडे से जुड़ी है ये पहेली, जवाब देकर Apple में मिलेगी 76 लाख की नौकरी
नौकरी में सबसे ज्यादा पैकेज देने के मामले में एप्पल का कोई तोड़ नहीं. लेकिन, एप्पल में नौकरी हासिल करना इतना आसान नहीं है. यहां का इंटरव्यू क्रैक करना ही अपने आप में बड़ी बात है.
नौकरी में सबसे ज्यादा पैकेज देने के मामले में एप्पल का कोई तोड़ नहीं. लेकिन, एप्पल में नौकरी हासिल करना इतना आसान नहीं है. यहां का इंटरव्यू क्रैक करना ही अपने आप में बड़ी बात है. हालांकि, यहां नौकरी करने के लिए पहला पैमाना तो आपकी क्वालिफकेशन है, लेकिन एप्पल सिर्फ डिग्री नहीं देखती बल्कि उन्हें ऐसा शख्स अपनी कंपनी में चाहिए जो किसी भी समस्या को सुलझाने में सक्षम हो. इस बात पर कंपनी का कितना जोर है इसका अंदाजा इंटरव्यू में पूछे गए इन सवालों से लग सकता है. यह सवाल कंपनी ने ऐसे उम्मीदवारों से पूछा, जिन्हें फोर्ब्स और बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट्स के मुताबिक आमतौर पर सालाना 76 लाख से 91 लाख रुपए की सैलरी मिलती है. ऐसा ही एक सवाल अंडे से जुड़ा है, जिसमें सिर्फ इस सवाल का जवाब देकर एप्पल में नौकरी मिल सकती है वो सालाना 76 लाख रुपए के पैकेज पर.
आइये जानते हैं किस पद पर कितनी नौकरी हैं और उससे जुड़े सवाल क्या हैं...
पद: सॉफ्टवेयर इंजीनियर
सैलरी: 76 लाख रुपए सालाना
सवाल: आपके पास दो अंडे हैं और आपको ये तय करना है कि आप इन्हें ज्यादा से ज्यादा कितनी ऊंची मंजिल से अंडे को गिरा सकते हैं कि वो टूटे नहीं. आप यह कैसे करेंगे और इसका सबसे वाजिब समाधान क्या है?
पद: सॉफ्टवेयर इंजीनियर
सैलरी: 76 लाख रुपए सालाना
सवाल: आपके पास 100 सिक्के हैं जो एक टेबल पर पड़े हैं. दस में हेड ऊपर है और 90 में टेल ऊपर है. आप न तो देख सकते हैं या महसूस कर सकते हैं कुल मिलाकर आपके पास ऐसा कोई जरिया नहीं है कि आप ये जान सकें कि किस सिक्के की कौन सी साइड ऊपर है. सारे सिक्कों को दो हिस्सों में इस तरह बांटें कि हर हिस्से में हेड ऊपर वाले बराबर सिक्के हों.
पद: सॉफ्टवेयर QA इंजीनियर
सैलरी: 66 लाख सालाना
सवाल: तीन बॉक्स हैं, जिनमें से एक में केवल सेब, एक में केवल संतरे और एक में दोनों फल रखे हैं. बॉक्स पर लेबल लगाने वाले से गलती हो गई. उसने सारे लेबल गलत लगा दिए हैं. आपने एक बॉक्स को खोला और बिना उसमें झांके एक फल उठा लिया और अब उस फल को देखकर आप तुरंत कैसे सारे बॉक्स पर सही लेवल लगा सकते हैं.
पद: एट होम एडवाइजर
सैलरी: 23 लाख सालाना
सवाल: एक 8 साल के बच्चे को समझाएं कि मॉडम या राउटर क्या होता है और क्या काम करता है.
पद: ग्लोबल सप्लाई मैनेजर
सैलरी: 83 लाख रुपए सालाना
सवाल: हर दिन कितने बच्चे पैदा होते हैं ?
पद: गलोबल सप्लाई मैनेजर
सैलरी: 83 लाख रुपए सालाना
सवाल: इस पैन की कॉस्ट को कैसे कम करेंगे ?
पद: एट होम एडवाइजर
सैलरी: 23 लाख रुपए सालाना
सवाल: एक कस्टमर को आप यह कैसे दिखाएंगे कि आप उसकी मदद करने को तैयार हैं. इसमें आपको केवल अपनी आवाज का इस्तेमाल करना है. हमें रोल करके दिखाएं ?
पद: सॉफ्टवेयर QA इंजीनियर
सैलरी: 66 लाख रुपए सालाना
सवाल: आप एक टोस्टर को कैसे टेस्ट करेंगे.
पद: सॉफ्टवेयर इंजीनियर
सैलरी: 76 लाख रुपए सालाना
सवाल: आप एप्पल क्यूं ज्वाइन करना चाहते हैं और अगर एप्पल ने आपको हायर कर लिया तो इस वक्त जहां आप जॉब करते हैं उसके बारे में क्या मिस करेंगे ?
पद: इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मैनेजर
सैलरी: 91 लाख रुपए सालाना
सवाल: बीते 4 सालों में कौन से दिन आपके बेस्ट दिन रहे और कौन से दिन सबसे खराब रहे?
इंटरव्यू में बोल दें बस ये एक बात, आपकी नौकरी हो जाएगी कंफर्म
किसी भी व्यक्ति के लिए नौकरी हासिल करना बहुत बड़ी बात होती है। हर कोई चाहता है कि वह एक अच्छी और बड़ी कंपनी में बेहतर सैलरी वाली नौकरी करे। अच्छी नौकरी उस व्यक्ति को मिलती है जिसके पास अच्छी क्वालिफिकेशन हो और साथ ही इंटरव्यू में जिसने बेहतरीन प्रदर्शन दिया हो। आपका इंटरव्यू ही इस बात का फैसला लेता है कि आप उस कंपनी में काम करने के उपयुक्त हैं या नहीं। इंटरव्यू में आपका प्रदर्शन ही आपको अच्छी सैलरी वाली अच्छी नौकरी दिला सकता है लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आपका इंप्रेशन इंटरव्यू लेने वाले पर काफी अच्छा हो। आज हम आपको बताएंगे ऐसी ही कुछ बातों के बारे में जिन्हें इंटरव्यू में बोलने से आपकी नौकरी कंफर्म हो जाएगी। उसे आपसे कोई नहीं छीन सकता।
कम बातें करना
इंटरव्यू में जितना बोलना जरूरी हो उतना ही बोलना चाहिए। किसी भी बात को बढ़ा-चढ़ाकर बोलने की कोशिश न करें। ऐसा करने से नुकसान हो सकता है। कई बार आपका इंटरव्यू ले रहे लोगों को यह समझ में नहीं आता कि आप क्या सही बोल रहे हैं और क्या गलत। इससे आपका इंप्रेशन खराब होता है। जरूरी है कि आप सोच समझकर सिर्फ जरूरी बातें करें।
जितना काम कर सकें उतना ही बोलें
कुछ कैंडिडेट्स सोचते हैं कि यदि वह यह बोल देंगे कि उन्हें सारे काम आते हैं तो उनका सिलेक्शन आसानी हो जाएगा लेकिन यह बिल्कुल गलत है। ऐसा बोलने से आपका इंप्रेशन गलत पड़ता है। आपको सिर्फ उतना ही बोलना चाहिए जितना आप कर सकते हें। जितना काम कर सकें उतने के बारे में ही चर्चा करें।
अपने बारे मे सच कहें
कुछ कैंडिडेट्स इंटरव्यू में बैठकर अपनी तारीफ शुरू कर देते हैं। वह अपने आप को परफेक्ट साबित करने के लिए कुछ भी कहने लगते हैं। कई बार ऐसा करने के लिए झूठ भी बोल देते हैं जो कि गलत है। अपने बारे में हमेशा सच ही कहें। इंटरव्यू में कोई भी बात बोलने से पहले कई बार सोच लें।
अपनी कमजोरियों नहीं मजबूतियों का जिक्र करें
किसी भी कैंडिडेट को अपने इंटरव्यू में अपनी कमजोरियों और किसी भी तरह की परेशानियों का जिक्र कभी नहीं करना चाहिए। उन्हें सिर्फ अपने स्ट्रॉन्ग प्वाइंट के बारे में ही बताना चाहिए। आप भले ही कितने भी परेशान हों लेकिन अपनी इन परेशानियों के बारे में कोई बात न करें। ये किसी को जानने न दें कि आपको अपनी निजी जिंदगी में क्या प्रॉब्लम हो रही है।
आज सब लोग सुन्दर दिखना चाहते है और क्यों न चाहें | सुन्दर दिखना हमेशा से लोगों की चाहत रही है | पहले अक्सर लोग घर ही वे प्रयास करती थी जिससे वे सुन्दर दिख सकें, लेकिन इन दिनों लोगो की खर्च करने की क्षमता बढ़ गयी है इसलिए लोग बाहर जाकर किसी एक्सपर्ट से अपनी ख़ूबसूरती बढ़ाना पसंद करती हैं | जोकि, अच्छी बात है क्योकि जो काम एक्सपर्ट कर सकती है, वह घर करना आसान नहीं होता है |
ब्यूटी एक्सपर्ट को काम करने के लिए एक जगह की जरूरत होती है, जिसे हम आम भाषा में ब्यूटी पार्लर कहते हैं | इसलिए यदि आप में से कोई ब्यूटी पार्लर खोलना (Beauty Parlour Kaise Khole) चाहती है और इसे अपने रोजगार का जरिया बनाना चाहती है, तो यहां पार दी गयी टिप्स आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकती हैं |
IAS के एग्जाम में लड़की से पूछा भारत देश के कितने नाम है ? जवाब सुनकर हैरान हो जाओगे
अगर आप आईएएस इंटरव्यू के ट्रिकी और सर घुमा देने वाले सवाल रेगुलर प्राप्त करना चाहते है तो उपर दिए गए follow बटन पर क्लिक करना ना भूले
दोस्तों आईएएस तो हर कोई बनना चाहता है लेकिन इसकी तैयारी के लिए हमें जीवन के हर क्षेत्र से वाकिफ होना चाहिए आईएएस के इंटरव्यू में हमेशा गुड प्रेसेंस ऑफ़ माइंड होना चाहिए जिससे आप हर सवाल का जवाब बड़े ही चतुराई से दे सको, जिससे आप अपनी बात सामने वाले के सामने रख सको और उसे बुरा भी नहीं लगे आईएएस की मैं एग्जाम पास करने के बाद जब काव्या इंटरव्यू देने पहुची तो इनसे किस तरह के सवाल इंटरव्यू में पूछे गए, उनके बारे में आपको यह बताया जा रहा है हमें उम्मीद है की आपको ये प्रश्न और उनके जवाब पढ़कर बहुत कुछ सिखने को मिल
सवाल 1: सोचो की आप एक बस चला रहे हो जो मुंबई से पुणे जा रही है, मुंबई में 17 लोग बस में चढ़े और पुणे में 2 लोग बस से उतर गए तो बस के ड्राईवर का क्या नाम होगा
जवाब 1: क्यों खा गए ना धोखा, अरे भाई इतना मत सोचो, ये बताओ की आप अगर इस लड़की की जगह होते तो क्या आंसर देते लड़की ने अपना नाम बता दिया क्योकि प्रश्न में कहा गया है सोचो आप बस चला रहे हो, तो भाई कितनी भी सवारी उतरे या चढ़े उससे ड्राईवर का नाम थोड़े ही बदल जायेगा लेकिन ऐसे प्रश्न के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए इंटरव्यू में
सवाल 2: कुछ महीने 31 दिन के होते है और कुछ महीने 30 दिन के होते है, तो कितने महीने 28 दिन के होते है ?
जवाब 2: आपके दिमाग में भी फरवरी आ गया है, सही कहा ना मैंने, लेकिन मेरे दोस्त 28 दिन के तो सारे महीने होते है, ये प्रश्न आपको कंफ्यूज करने के लिए पूछा जा सकता है लेकिन इस लड़की ने कोई गलती नहीं की और एकदम सही आंसर दिया
सीवी में हो दम तो जॉब मिले बम-बम
यह जमाना मार्केटिंग का है यानी जो बिके वही सफल। जॉब मार्केट में भी यही फॉर्मूला लागू होता है। इसलिए नौकरी पाने वाले उम्मीदवार को अपनी सॉलिड मार्केटिंग करनी होती है, ताकि वह किसी स्ट्रांग कंपनी में जॉब पा सके।
किसी भी नई नौकरी के लिए आपको सबसे पहले अपना रिज्यूमे यानी सीवी संबंधित कंपनी को देना होता है। आमतौर पर सीवी में उम्मीदवार के तब तक के प्रोफेशनल जीवन का पूरा इतिहास, कामयाबियां, खास-खास हुनर और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि दर्ज की जाती है
सीवी ही किसी उम्मीदवार को जरूरतमंद कंपनी को काम पर रखने के लिए तैयार करने वाला अहम दस्तावेज है। अर्थात सीवी उम्मीदवार की मार्केटिंग का औजार है। यह नियोक्ता कंपनी को आपके बारे में प्रथम सूचना देता है। अगर ये असरदार होता है, तो कंपनी आपको फौरन बुलावा भेज देती है। इसलिए इसे नियोक्ता की नजर में आने लायक बनाना ही सबसे अहम है, और यही इसकी सार्थकता है।
सीनियर एचआर कंसलटेंट लुईस गोर्बी कहते हैं कि रिज्यूमे में खुद को दूसरों से अलग साबित करना जरूरी है, मसलन अन्य लोगों से आप किन मायनों में बेहतर हैं। ऐसे में बेहद जरूरी है कि रिज्यूमे में अपनी क्षमताओं के बारे में प्रभावशाली तरीके से बताएं।
कवर लैटर
कवर लैटर सीवी के ऊपर लगाया जने वाला वह संक्षिप्त पत्र है, जिसमें कोई उम्मीदवार कंपनी विशेष में जॉब विशेष के लिए अपने सबसे अहम प्लस-प्वॉइंट्स को हाइलाइट करता है, और इस पद पर अपनी नियुक्ित के पक्ष में मजबूत दलीलें पेश करता है। इससे प्रभावित होकर ही उम्मीदवार को इंटरव्यू के लिए बुलाया जता है। अच्छा कवर लैटर लिखने के टिप्स इस प्रकार हैं-
- कवर लैटर को आपकी पेशेवर योग्यता का आईना माना जता है। इसलिए इसमें किसी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए। इसकी भाषा ऐसी विशिष्ट होनी चाहिए कि अपेक्षित नौकरी पाने के लिए आपका जबर्दस्त जज़्बा और उत्साह नजर आए। इसमें कंपनी के प्रति आपकी पॉजिटिव सोच और विश्वास प्रकट होना चाहिए।
- कवर लैटर से आपके व्यक्तित्व और महत्वाकांक्षा का आभास होना चाहिए। नियोक्ता अक्सर ऐसे कवर लैटर से प्रभावित होते हैं, जो काफी सोच-विचार कर लिखे गए हों।
- कवर लैटर में सबसे ऊपर आपके संपर्क सूत्र का उल्लेख होना चाहिए। यह नियोक्ता कंपनी के उच्चधिकारी को व्यक्तिश: संबोधित हो, तो अच्छा माना जता है।
- कवर लैटर में अपने अब तक के कार्यानुभव और उन कामयाबियों की जनकारी मजबूती से प्रस्तुत की जनी चाहिए, जो आपको बाकी उम्मीदवारों की भीड़ से अलग करते हैं। अपने विशिष्ट कार्यो का सिलसिलेवार ब्यौरा देना भी उपयोगी साबित होता है। स्पष्ट बताइए कि आप किसी खास जॉब को पाने के लिए क्यों उत्सुक हैं, और इसके लिए आपके पास कौन सी विशिष्ट योग्यताएं हैं।
- कवर लैटर में अपनी जीवनाकांक्षा का उल्लेख भी ारूर करना चाहिए। आपको बताना चाहिए कि उस आकांक्षा पूर्ति की दिशा में ये जॉब हासिल करना आपके लिए कितना अहम है। इससे आपके आत्मविश्वास और पहल करने की क्षमता का पता चलेगा।
और अंत में, ये निवेदन अवश्य कीजिए कि आप व्यक्ितश: मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं, और इसके लिए सुविधाजनक समय दिये जने का बेसब्री से इंतजर कर रहे हैं।
कैसे बने सीवी सार्थक
- हर नौकरी के लिए उसकी अपेक्षाओं के हिसाब से अपना अलग सीवी बनाना चाहिए।
- अपने सीवी में अपने पेशेवर मजबूत पक्षों को इस प्रकार हाईलाइट करें, कि वे न केवल नियोक्ता कंपनी के एचआर मैनेजर की नार में ारूर आ जए, बल्कि अन्य उम्मीदवारों से भारी भी पड़े।
- जिस पद के लिए आवेदन कर रहे हैं, उससे संबंधित अपनी योग्यताओं का सिलसिलेवार ब्यौरा सीवी में दें, और उन्हें हाईलाइट करें।
- सीवी को संक्षिप्त और स्पष्ट रखें। अनावश्यक बातें दर्ज करके बोङिाल न करें। कलात्मक फॉण्ट और हस्तलिपि का प्रयोग न करें। चारों ओर एक इंच स्पेस जरूर छोड़ें। आमतौर पर अंग्रेजी फॉण्ट टाइम्स न्यू रोमन या एरियल में बारह पॉइंट में टाइप करना ठीक रहता है।
- सीवी में टाइप और स्पैलिंग की गलती न छोड़ें। ध्यान रहे, ऑटोमैटिक स्पैल-चैक से कई बार बड़ी गलतियां छूट जती हैं।
- सीवी में उन बिंदुओं को हाईलाइट करें, जिनसे आप अपने पद और कंपनी के लिए विशेष तौर पर उपयोगी साबित हो सकते हैं।
- सीवी बनाते समय नवीनतम बाजार प्रवृत्तियों को जरूर ध्यान में रखें। लंबा-चौड़ा और मक्खनबाज सीवी न बनाएं। इससे नियोक्ता बोर होकर आपके सीवी को रद्दी में फेंक देगा।
- सीवी के कुछ स्थायी स्तंभ भी हैं, जिन्हें दर्ज करना आवश्यक है। जसे कि शक्षणिक और प्रोफेशनल योग्यता, अतिरिक्त प्रशिक्षण प्रमाण्पत्र, उल्टे क्रम में पिछली नौकरियों का ब्यौरा, संक्षिप्त व्यक्तिगत विवरण, पता, फोन नंबर, मेल एर्ड्ैस और संदर्भ के लिए दो व्यक्तियों के नाम।
इन गलतियों से बचें
कभी-कभी हम सीवी को आकर्षक और असरदार बनाने के लिए ऐसी-ऐसी जनकारियां ठूस देते हैं, जिन्हें देखते ही नियोक्ता बिफर सकता है। जाहिर है, ये अच्छा सीवी नहीं हो सकता। तब सवाल ये उठता है कि अच्छा सीवी तैयार करने के लिए किन-किन चीजों से परहेज किया जाए?
दरअसल, उम्मीदवारों की भीड़ से अलग दिखने के प्रयास में ही हम अपने सीवी को बोङिाल बनाने की गलती कर बैठते हैं, जिनका नौकरी मिलने से कोई ताल्लुक नहीं होता। इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है, क्योंकि जिन अधिकारियों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट करने की जिम्मेदारी दी जती है, वे ऐसे सीवी को देखकर कन्फ्यूा हो जते हैं। ऐसी स्थिति में आपको न बुलाने का फैसला ही, उनके लिए सबसे आसान विकल्प बन जता है। इसलिए ये बातें ध्यान रखें-
- कभी भी अपना सीवी स्टाइलिश फॉण्ट में तैयार न करें। सीवी में केवल स्टैंडर्ड एरियल या वरदान फॉण्ट का ही इस्तेमाल करें। फैंसी फॉण्ट होने पर आपका सीवी इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर से फिल्टर होने से भी रह जता है। आजकल अधिकतर कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर का प्रयोग करती हैं। यही नहीं, सीवी का सही फॉण्ट न होने पर आपको गैर-पेशेवर भी माना ज सकता है।
- सीवी के लिए फॉण्ट के अलावा प्वॉइंट साइज भी सही होना चाहिए। हैडिंग 12 प्वॉइंट में और मैटर 10 प्वॉइंट में देना ठीक माना जता है। इससे छोटे प्वॉइंट साइज से पढ़ने में दिक्कत आती है।
- सीवी का प्रस्तुतिकरण सरल और सादा होना चाहिए। जगह-जगह इटैलिक, बोल्ड या अंडरलाइन देने से देखने वाले की आंखों की तकलीफ बढ़ जती है। सिर्फ हैडिंग और हाईलाइट के लिए बोल्ड का प्रयोग करना चाहिए। सादा सीवी सबसे पावरफुल माना जता है।
- बहुत पुरानी जनकारियों को सीवी में से हटा दें। इससे जगह बर्बाद होती है, और हासिल कुछ नहीं होता। जसे कि आपका कार्यानुभव दस साल से ज्यादा है, तो इंटर्नशिप और स्कूल प्रोजेक्ट का जिक्र बेमानी है।
- सीवी में फालतू व्यक्तिगत विवरण न दें। वाक्य छोटे रखें किसी भी तथ्य के विस्तृत स्पष्टीकरण पेश न करें।
दमदार रिज्यूमे के दस मंत्र
कवर लैटर : सव्रे बताते हैं कि 80 प्रतिशत कंपनियां ऐसे कैंडिडेट को तरजीह नहीं देतीं जो कवर लैटर नहीं देते या उनके द्वारा लिखे गए कवर लैटर की भाषा अस्पष्ट होती है। सीधे तौर पर कहा जए, कि अगर आपका कवर लैटर आपकी जॉब के बारे में जनकारी न दे पाएं, तो उसका कोई मकसद ही नहीं। कवर लैटर एक तरह से आपके सामने खुद के अनुभव और विशेषज्ञता को बताने का मौका होता है।
संपर्क के बारे में जानकारी : अगर आपका रिज्यूमे एक से ज्यादा पेज का है, तो प्रत्येक पेज पर अपना कांटेक्ट इनफॉरमेशन जरूर दें। प्रत्येक पेज के टॉप पर अपना फोन नंबर, ई-मेल दें।
शुरुआती स्टेटमेंट : बेहतर तरीके से लिखा गया प्रभावशाली स्टेटमेंट कंपनी का ध्यान खींचता है। अपनी क्वालिफिकेशन, अनुभव और महत्वपूर्ण स्किल्स के बारे में जनकारी दें।
स्किल्स के बारे में बताएं : आप जिस क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, उसके बारे में आपका पुराना अनुभव कितना है, इसका जिक्र जरूर करें।
ज्यादा लंबी जनकारियां न दें : अगर आप किसी स्पेसिफिक जॉब के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो आप अपने रिज्यूमे में उसके बारे में संक्षेप में जनकारी दें। ज्यादा लंबा रिज्यूमे होने की स्थिति में कर्मचारी की रुचि जल्द ही खत्म हो जती है। अपनी वर्तमान स्किल और हालिया अनुभवों की जनकारी दें।
एक्यूरेसी : रिज्यूमे में अपनी बात छोटी, लेकिन सही कहें। प्रचलित एब्रीविएशन को ही लिखें। संभव हो जो भी जनकारी दें, उसमें एब्रीविएशन और एक्रोनम से
परहेज करें।
खुद के बारे में : रिज्यूमे में उम्र, विवाहित या अविवाहित, लिंग, वजन के बारे में जनकारी न दें। रिफ्रेंस के बारे में रिज्यूमे में न बताना बेहतर रहेगा।
देखने में आकर्षक : आपका रिज्यूमे देखने में आकर्षक होना चाहिए, लेकिन ज्यादा फैंसी भी न हो, इस बात का जरूर ध्यान रखें। महत्वपूर्ण बिंदुओं को बुलेट और बोल्ड शब्दों में बताएं। उच्च गुणवत्ता वाले सफेद कागज का इस्तेमाल करें। अगर आपके रिज्यूमे से आपके संबंधी महत्वपूर्ण जनकारियां नहीं मिलतीं तो उसका कोई मकसद नहीं है। कंपनी आपके रिज्यूमे में महत्वपूर्ण जनकारियों के बारे में पहले देखती है, इसलिए उसे
पहले दें।
प्रूफरीड : रिज्यूमे बनाने के बाद एक बार उसे जरूर पढ़ लें। देख लें कि कहीं कोई अनावश्यक जनकारी तो आपके रिज्यूमे में नहीं ज रही, साथ ही बड़े वाक्यों में ग्रामर की गलती न होने पाएं, इसका विशेष ध्यान रखें।
बार-बार जॉब बदलना : अपने रिज्यूमे में सारी बातों का जिक्र न करें। अगर आपका अनुभव लंबा है, लेकिन एक दो जगह ऐसी है, जहां आपने कम समय नौकरी है, तो उसके बारे में जनकारी न दें। अपनी जॉब हिस्ट्री बेहतर बनाएं।
न करें गुमराह
सीवी वह शुरुआती दस्तावेज है, जिसके आधार पर भावी नियोक्ता आपको काम पर रखने के लिए प्रक्रिया की शुरू करता है। इसलिए सीवी लिखना किसी कला से कम नहीं है। और अच्छी नौकरी पाने के लिए तो अच्छा और ‘सही-सही’ सीवी होना बहुत ही जरूरी है। यहां हम ‘सही-सही’ सीवी पर इसलिए जोर दे रहे हैं, कि इसमें गुमराह करने वाले तथ्य देने से आपको काफी नुकसान हो सकता है। इसके विपरीत ईमानदारी के साथ सीवी बनाएंगे, तो नियुक्ति प्रक्रिया के आगे के चरणों में आपकी विश्वसनीयता बढ़ेगी ही।
आमतौर पर देखा गया है कि लोग अपने सीवी में अपने बारे में बढ़ा-चढ़ा कर फर्जी जनकारियां डाल देते हैं, जो अक्सर इंटरव्यू के दौरान सामने भी आ जती है, और उन्हें नौकरी नहीं मिल पाती। आमतौर पर उम्मीदवारों की तरफ से दी जाने वाली गलत जानकारियां ये हैं : ऊंचे पद और सफलताओं की अवास्तविक फेहरिस्त, जॉब प्रोफाइल में बढ़ा-चढ़ा कर दी गई जिम्मेदारियां, बार-बार जॉब बदलने वालों द्वारा इस तथ्य को छुपाने के लिए गलत तारीखों का उल्लेख, तनख्वाह और पैकेज की अवास्तविक तस्वीर, अमान्य और अधूरे कोर्स और डिग्रियों का गोलमोल जिक्र।
लेकिन याद रखिए, इंटरव्यू लेने वाले इतने नासमझ नहीं हैं कि आपके बोगस सीवी के झंसे में आ जएं। वे चंद मिनटों में ही असलियत भांप कर आपको रेस से आउट कर देंगे। क्या करें, क्या न करें? इसका जवाब इन बिंदुओं में छुपा है-
- अपनी पिछली नौकरियों की समयावधि और तारीखों में हेराफेरी न करें। अगर किसी कंपनी में अनुबंध पर रहे हैं, तो उसकी सही-सही अवधि बताएं और उसे स्थायी नौकरी न बताएं।
- शैक्षणिक योग्यता से छेड़छाड़ या गलत तस्वीर पेश न करें। अगर कोई कोर्स या डिग्री अधूरी रह गई, तो उसका स्पष्ट उल्लेख कर दें। प्रोफेशनल कोर्स अधूरा रहने पर कोई खास अंतर नहीं पड़ जाएगा। लेकिन हां, कोर्स और डिग्री का नाम बदलकर दिखाना गंभीर अपराध माना जएगा।
- अब बे-वजूद हो चुकी कंपनियों में नौकरी के बारे में उल्लेख करते समय खासतौर पर झूठ से बचें क्योंकि कोई न कोई सुराग मिलने पर झूठ पकड़ में आ सकता है।
- अप्रासंगिक और महत्वहीन नौकरी का सीवी में जिक्र करना जरूरी नहीं है। इंटरव्यू में ऐसे संघर्ष काल का चलताऊ जिक्र कर देना काफी है। लेकिन हाल के प्रासंगिक जॉब्स का पूरा ब्यौरा जरूर दें।
फोन काॅल पर Interview देते समय इन बातों का रखें ध्यान
आज कल बहुत सी कंपनियां इंटरव्यू का फर्स्ट राउंड फोन काल्स पर ही होता है। कैंडिडेट्स को शार्टलिस्ट करने के लिए बहुत ही प्रभावपूर्ण तरीका माना जाता है। इसका एक फायदा यह होता है कि जो लोग फेस टू फेस इंटरव्यू देने के लिए मौजूद नही हो पाते तो उनके लिए फोन पर इंटरव्यू देना बहुत अच्छा रहता है। लेकिन इसमें कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत अनिवार्य माना जाता है। तो आईए जानें उन बातों के बारे में-
रिज्यूम अपने सामने रखें
अपना रिज्यूम प्रिंट करें और उन पॉइंट्स को हाइलाइट कर अपने सामने रखें जिसे आप इंटरव्यू के दौरान शामिल करना चाहते हैं। इससे अापको काफी मदद मिल सकती है। कंपनी द्वारा पूछे जाने वाले किसी भी प्रश्न के जवाब देने के दैरान भी आपके काम आ सकता है। इसके साथ ही अपने हाथ में एक पैन और नोटपैड भी जरूर रखें। इस बात का ध्यान रखें कि फौन व लैपटाॅप पर कभी रिज्यूम न खोलें, क्योंकि ये किसी भी वक्त बंद हो सकता है, आप नर्वस हो सकते हैं जिसका असर इंटरव्यू पर पड़ सकता है।
आरामदायक माहौल
इंटरव्यू के दौरान शोर-शराबे वाले माहौल से दूर रहें। कोई शांत सी जगह खोजें और कोशिश करें की उस वक्त कोई और वहां न आए।
पहले सुनें
पहले कंपनी के मैनेजर को सुनें की वो क्या चाहते हैं उसे एक पेपर पर नोट करें। फिर उनके जरूरत के हिसाब से अपने जवाब दें।
स्माइल रखें
बात करते वक्त अपनी आवाज से अच्छा इंप्रेशन बनाना भी जरूरी है। ऐसे में इंटरव्यू से पहले अपना गला ठीक रखें और बीच-बीच में पानी पीते रहें। सबसे जरुरी ये है कि अपने चेहरे पर मुस्कुराहट बरकरार रखें।
कोई काम न करें
टेलीफोनिक इंटरव्यू के दौरान कोई भी अन्य काम न करें। इससे आपका इंटरव्यू बिगड़ सकता है।
